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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 9th Standard

निम्नलिखित मुद्दों के उचित क्रम लगाकर उनके आधार पर कहानी लेखन कीजिए : मन में निश्चय लोगों का जुड़ना कुआँ तैयार होना एक लड़का छुट्‌टियों में गाँव आना कुआँ पानी से भरना लोग

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Question

निम्नलिखित मुद्दों के उचित क्रम लगाकर उनके आधार पर कहानी लेखन कीजिए :

मन में निश्चय लोगों का जुड़ना कुआँ तैयार होना लोगों का खुश होना सीख,शीर्षक
छुट्‌टियों में गाँव आना कुआँ पानी से भरना लोगों का हँसना प्रतिवर्ष सूखे की समस्या का सामन -
कुआँ खोदने का प्रारंभ शहर के महाविद्‌यालय में पढ़ना एक मित्र का साथ देना एक लड़का -
Answer in Brief
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Solution

मुद्दों का उचित क्रम निम्नलिखित है :

१. एक लड़का

२. शहर के महाविद्यालय में पढ़ना

३. छुट्टियों में गाँव आना

४. प्रतिवर्ष सूखे की समस्या का सामना

५. मन में निश्चय

६. कुआँ खोदने का प्रारंभ

७. लोगों का हँसना

८. एक मित्र का साथ देना

९. लोगों का जुड़ना

१०. कुआँ तैयार होना

११. कुआँ पानी से भरना

१२. लोगों का खुश होना

१३. सीख, शीर्षक

जहाँ चाह, वहाँ राह

      महेश नाम का एक लड़का था। वह शहर के एक महाविद्यालय में पढ़ता था। महेश प्रतिवर्ष अपने परिवार के साथ गाँव घूमने जाया करता था। इस वर्ष भी वह गर्मियों की छुट्टियों में अपने गाँव आया था। अबकी बार उसने सूखे ताल-तलैया व पोखरों के साथ-साथ असहाय गाँव वालों के सूखे चेहरे भी देखे। ऐसे दयनीय चेहरे तो वह बचपन से ही देखता आ रहा था, लेकिन इस बार के दृश्य ने उसके अंतर्मन को झकझोर दिया। उसका कारण शायद उसकी वयस्कता और सूखे की समस्या की गहराई थी। सुबह से शाम तक बत्तीसों बार गाँव के चौपाल व सभाओं में, सड़क के नुक्कड़ों पर, खेतों की मेड़ों पर तथा अलग-अलग बैठकों में उसका सामना सूखे की समस्या से हो ही जाता था। गाँव वाले हाथ-पर-हाथ धरे केवल इस समस्या पर चर्चा करते। इससे निपटने का कोई उपाय उन्हें नहीं सूझता।

एक शाम बिस्तर पर लेटे-लेटे उसने मन में यह निश्चय कर लिया कि वह सूखे की इस समस्या से अपने गाँव को हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति दिलाएगा। कुँआ खोदने की योजना ने महेश को रातभर बेचैन रखा। भोर हुई तो महेश अपने साथ कुदाल, फरसा, खुरपा और एक टोकरी लेकर बगीचे में पहुँचा। उसने कुआँ खोदना शुरू किया। बगीचे में आने वाला हर कोई महेश से पूछता, ’महेश बेटा, क्या कर रहे हो?“ महेश मुस्करा कर कह देता, ’पानी की व्यवस्था।“ बगीचे में और बगीचे के रास्ते आने-जाने वाले लोग उसे देखकर हँसने लगते। महेश के गाँव के मित्र को जैसे ही यह बात पता चली वह तुरंत हाथ में टोकरी और कुदाल लेकर बगीचे में पहुँच गया। मित्र का साथ पाकर महेश का हौसला बढ़ गया। अब दोनों दुगुनी रफ़्तार से गड्ढा खोदने लगे।

     जब गाँव के मुखिया को यह बात पता चली तो उन्होंने बगीचे में जाकर देखा। गड्ढा काफी खोदा जा चुका था। महेश व उसके मित्र की निष्ठा व परिश्रम साफ-साफ उस गड्ढे की गहराई में झलक रही थी। मुखिया ने एक पल की देर किए बगैर पगड़ी बाँधी, कमर कसी और हाथ में कुदाल थामकर गड्ढा खोदना शुरू कर दिया। ’मुखिया जी गड्ढा खोद रहे हैं।“ यह बात पूरे गाँव में आग की तरह फैल गई। हर घर से बच्चे, जवान, बूढ़े सभी टोकरी, कुदाल, फरसा लेकर निकलने लगे। देखते-ही-देखते बगीचे में सौ-डेढ़ सौ की सशस्त्र फौज खड़ी हो गई। इस नेक काम में लोग जुड़ते चले गए। दो सप्ताह के भीतर ही कुँआ बनकर तैयार हो गया। जल्द ही बरसात आई। जमकर बारिश हुई और कुआँ लबालब भर गया। सभी गाँववाले खुशी से झूम उठे और फिर कभी गाँव में पानी की समस्या नहीं हुई।

सीख: एक-दूसरे के सहयोग से बड़े से बड़ा संकट भी दूर किया जा सकता है।

अथवा

मन में निश्चय कर लेने पर सफलता निश्चित मिलती है।

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कहानी लेखन
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Chapter 2.07: शिष्‍टाचार - स्वाध्याय [Page 69]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Lokbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 2.07 शिष्‍टाचार
स्वाध्याय | Q (१) | Page 69
Balbharati Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 1.12 झलमला (पूरक पठन)
स्वाध्याय | Q २ | Page 51

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