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Question
लेखक और अतिथि के बीच सौहार्द अब बोरियत का रूप किस तरह लेने लगा था?
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Solution
अतिथि जब लेखक के यहाँ चौथे दिन भी रुका रह गया तो लेखक के मन में जैसा उत्साह और रुचि थी वह सब समाप्त हो गया। उसने विविध विषयों पर बातें कर लिया था। अब और बातों का विषय शेष न रह जाने के कारण दोनों के बीच चुप्पी छाई थी। यह चुप्पी अब सौहार्द की जगह बोरियत का रूप लेती जा रही थी।
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अ, नि, अन, दुर, वि, कु, पर, सु, अधि
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आर्य |
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आगत |
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डर |
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आकर्षण |
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क्रय |
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मार्ग |
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उपस्थित |
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लोक |
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नायक |
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भाग्य |
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