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Question
क्या परीक्षा पास कर लेना ही योग्यता का आधार है? इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
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Solution
भूमिका: वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली में परीक्षा उत्तीर्ण करने को ही प्रायः योग्यता मान लिया जाता है, परंतु परीक्षा में मिले अंक किसी व्यक्ति की संपूर्ण योग्यता, बुद्धिमत्ता और चरित्र का पूर्ण पैमाना नहीं हो सकते।
- अंक बनाम वास्तविक समझ: परीक्षा में 'अंधे के हाथ बटेर लगना' संभव है; रटकर या संयोगवश कोई भी अच्छे अंक ला सकता है, परंतु इससे विषय पर वास्तविक अधिकार सिद्ध नहीं होता।
- व्यावहारिक तजुर्बा (अनुभव की श्रेष्ठता): पाठ में बड़े भाई साहब सटीक उदाहरण देते हैं कि अनपढ़ अम्माँ और पाँचवीं पास दादा को दुनिया का तजुरबा एम.ए. पास हेडमास्टर से भी अधिक है। घर की व्यवस्था और संकट प्रबंधन डिग्रियों से नहीं, अनुभव से चलता है।
- नैतिकता और आत्मसंयम: रावण महापंडित और चक्रवर्ती राजा था, किंतु अहंकार ने उसका विनाश कर दिया। परीक्षा में अव्वल आने पर भी यदि व्यक्ति में विनम्रता और संस्कार न हों, तो वह विद्या व्यर्थ है।
- जीवन की चुनौतियों का सामना: योग्यता संकट के समय धैर्यपूर्वक सही निर्णय लेने, समस्या सुलझाने और विपरीत परिस्थितियों में अनुकूलन करने में निहित है, न कि केवल परीक्षा पत्र पर सही उत्तर लिखने में।
निष्कर्ष: परीक्षा पास करना शैक्षणिक प्रगति का एक औपचारिक चरण मात्र है; वास्तविक योग्यता अनुभव, विवेक, व्यावहारिक समझ और सुदृढ़ चरित्र से ही आँकी जा सकती है।
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