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Question
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?
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Solution
बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबी ज्ञान से नहीं आती बल्कि अनुभव से आती है। इसके लिए उन्होंने अम्माँ, दादा व हैडमास्टर की माँ के उदाहरण भी दिए हैं कि वे पढ़े लिखे न होने पर भी हर समस्याओं का समाधान आसानी से कर लेते हैं। अनुभवी व्यक्ति को जीवन की समझ होती है, वे हर परिस्थिति में अपने को ढालने की क्षमता रखते हैं।
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बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि −
भाई साहब को ज़िंदगी का अच्छा अनुभव है।
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बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि −
भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
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लेखक अपने बड़े भाई के हुक को कानून समझने में शालीनता समझता था, ऐसा क्यों? स्पष्ट कीजिए।
लेखक को अपने वार्ड के रौद्र रूप के दर्शन क्यों हो जाया करते थे?
डाँट-फटकार लगाते भाई साहब लेखक को क्या-क्या सलाह दे डालते थे? उनके ऐसे व्यवहार को आप कितना उचित समझते हैं?
लेखक अपने ही बनाए टाइम-टेबिल पर अमल क्यों नहीं कर पाता था?
फेल होने पर भी भाई साहब किस आधार पर अपना बड़प्पन बनाए हुए थे?
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए:
| सालाना इम्तिहान हुआ। भाई साहब फ़ेल हो गए, मैं पास हो गया और दरजे में प्रथम आया। मेरे और उनके बीच में केवल दो साल का अंतर रह गया। जी में आया, भाई साहब को आड़े हाथों लूँ - “आपकी वह घोर तपस्या कहाँ गई ?' मुझे देखिए, मज़े से खेलता भी रहा और दरजे में अव्वल भी हूँ।' लेकिन वह इतने दुखी और उदास थे कि मुझे उनसे दिली हमदर्दी हुई और उनके घाव पर नमक छिड़कने का विचार ही लज्जास्पद जान पड़ा। हाँ, अब मुझे अपने ऊपर कुछ अभिमान हुआ और आत्मसम्मान भी बढ़ा । भाई साहब का वह रौब मुझ पर न रहा। आज़ादी से खेलकूद में शरीक होने लगा। दिल मज़बूत था। अगर उन्होंने फिर मेरी फ़जीहत की, तो साफ़ कह दूँगा - 'आपने अपना खून जलाकर कौन - सा तीर मार लिया। मैं तो खेलते - कूदते दरजे में अव्वल आ गया।' ज़बान से यह हेकड़ी जताने का साहस न होने पर भी मेरे रंग - ढंग से साफ़ ज़ाहिर होता था कि भाई साहब का वह आतंक मुझ पर नहीं था। भाई साहब ने इसे भाँप लिया - उनकी सहज बुद्ध बड़ी तीव्र थी और एक दिन जब मैं भोर का सारा समय गुल्ली - डंडे की भेंट करके ठीक भोजन के समय लौटा, तो भाई साहब ने मानो तलवार खींच ली। |
- कक्षा में प्रथम आने पर छोटे भाई के व्यवहार में बड़े भाई साहब के प्रति झलकने लगा: [1]
- प्रसन्नता
- अहंकार
- स्वाभिमान
- गर्व
- छोटा भाई बड़े भाई साहब को आड़े हाथों लेना चाहता था परंतु ऐसा कर नहीं पाया, क्यों? [1]
- उनकी डाँट-डपट का डर था
- उसकी हिम्मत नहीं पड़ी
- लोक-लाज का डर था
- उनसे हमदर्दी हो आई
- छोटे भाई के अव्वल आने पर भाई साहब के व्यवहार में क्या अंतर आया? [1]
- वे और अधिक ध्यानपूर्वक पढ़ने लगे
- उनके रौब में थोड़ी नरमी आ गई
- वे भी खेल - कूद में भाग लेने लगे
- अपनी पीड़ा भूलकर बेहद प्रसन्न हो गए
- निम्नलिखित कथन तथा कारण को पढ़कर दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए: [1]
कथन: भाई साहब गुस्सा हो गए और उन्होंने तलवार खींच ली।
कारण: छोटा भाई सुबह से शाम तक गुल्ली-डंडा खेलकर लौटा था।
विकल्प:
- कथन और कारण दोनों गलत हैं।
- कथन सही है लेकिन कारण उसकी गलत व्याख्या करता है।
- कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।
- कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
-
कौन-सा/से वाक्य गद्यांश से मेल खाते हैं? [1]
- वार्षिक परीक्षा में हर बार की तरह छोटा भाई भी अच्छे अंकों से पास हो गया।
- भाई साहब दुखी और उदास हो गए थे।
- छोटे भाई ने अपने हाव-भाव से दर्शा दिया कि उन दोनों में कोई बराबरी नहीं है।
- अब बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को कुछ भी कहना पूरी तरह से छोड़ दिया था।
विकल्प:- I, II
- केवल III
- II, III
- III. IV
