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Question
कविता की वे पंक्ति छाँटकर लिखो जिनसे पता चलता है कि
काबुलीवाला कंजूस था।
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Solution
जा तू अपनी राह सिपाही, मैं खाता हूँ पैसा!
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काबुलीवाले को सब्ज़ी बेचने वाली की भाषा अच्छी तरह समझ नहीं आती थी। इसलिए उसे अपनी बात समझाने में बड़ी मुश्किल हुई। चलो, देखते हैं तुम अपनी बात बिना बोले अपने साथी को कैसे समझाते हो? नीचे लिखे वाक्य अलग-अलग पर्चियों मे लिख लो। एक पर्ची उठाओ। अब यह बात तुम्हें अपने साथी को बिना कुछ बोले समझानी है–
- मुझे बहुत सर्दी लग रही है।
- बिल्ली दूध पी रही है, उसे भगाओ।
- मेरे दाँत में दर्द है।
- चलो, बाज़ार चलते हैं।
- अरे, ये तो बहुत कड़वा है।
- चोर उधर गया है, चलो उसे पकड़ें।
- पार्क में चलकर खेलेंगे।
- मुझे डर लग रहा है।
- उफ़ ये बदबू कहाँ से आ रही है।
- अहा! लगता है कहीं हलवा बना है।
काबुलीवाले ने कहा – अगर ये लाल चीज़ खाने की है, तो मुझे भी दे दो।
सब्ज़ी बेचने वाली ने कहा – हाँ, ये तो सब खाते हैं।ले लो।
इस तरह बेचारा काबुलीवाला मिर्च खा बैठा। तुम्हारे हिसाब से काबुलीवाले को मिर्च देखने के बाद क्या पूछना चाहिए था?
मुँह सारा जल उठा और आँखों में जल भर आया।
यहाँ जल शब्द को दो अर्थो में इस्तेमाल किया गया है।
जल – जलना
जल – पानी
इसी तरह नीचे दिए गए शब्द के भी दो अर्थ हैं।
इस शब्द का इस्तेमाल करते हुए एक-एक वाक्य बनाओ पर ध्यान रहे-
- वाक्य में वह शब्द दो बार आना चाहिए
- दोनों बार उस शब्द का मतलब अलग निकलना चाहिए। (जैसे ऊपर दिए गए वाक्य में जल)
पर - ____________
कविता की वे पंक्ति छाँटकर लिखो जिनसे पता चलता है कि
काबुलीवाला कुछ शब्द अलग तरीके से बोलता था।
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कविता की वे पंक्ति छाँटकर लिखो जिनसे पता चलता है कि
काबुलीवाले को 25 पैसे की मिर्च चाहिए थी।
चवन्नी मतलब चार आना।
चार आना मतलब 25 पैसे।
तो एक रुपए में कितने पैसे?
अब बताओ –
इकन्नी मतलब ______ आना।
अब बताओ –
दुअन्नी मतलब ______ आने।
काबुलीवाले ने मिर्च को स्वादिष्ट फल क्यों समझ लिया?
सब्ज़ी बेचने वाली ने क्या सोचकर उसे झोली भर मिर्च दी होगी?
सारी मिर्चें खाने के बाद काबुलीवाले की क्या हालत हुई होगी?
कुंजड़िन से बोला बेचारा ज्यों-त्यों कुछ समझाकर
इस पंक्ति को ऐसे भी लिख सकते हैं –
बेचारा ज्यों-त्यों कुछ समझाकर कुंजड़िन से बोला।
अब इसी तरह इस पंक्ति को फिर से लिखो –
हमको दो तोल छीमियाँ फ़कत चार आने की।
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कुंजड़िन से बोला बेचारा ज्यों-त्यों कुछ समझाकर
इस पंक्ति को ऐसे भी लिख सकते हैं –
बेचारा ज्यों-त्यों कुछ समझाकर कुंजड़िन से बोला।
अब इसी तरह इस पंक्ति को फिर से लिखो –
वह खाता ही रहा मिर्च की छीमी को सिसियाते।
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कुंजड़िन से बोला बेचारा ज्यों-त्यों कुछ समझाकर
इस पंक्ति को ऐसे भी लिख सकते हैं –
बेचारा ज्यों-त्यों कुछ समझाकर कुंजड़िन से बोला।
अब इसी तरह इस पंक्ति को फिर से लिखो –
जा तू अपनी राह सिपाही, मैं खाता हूँ पैसा।
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लाल-लाल मिर्च देखकर काबुलीवाले के मुँह में पानी आ गया। तुम्हारे मुँह में किन चीज़ों को देखकर या सोचकर पानी आ जाता है?
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