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Question
कुछ ऐसे देशभक्तों के नाम पता करके लिखो जो बचपन से ही आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े थे।
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Solution
भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, इंदिरा गांधी, झाँसी की रानी।
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RELATED QUESTIONS
बहुविकल्पी प्रश्न
कवि की वीणा में कैसी चिनगारियाँ आ बैठी हैं?
क्रांति लाने के लिए कवि किसका सहारा लेता है?
कवि के कंठ से निकले गीत का क्या प्रभाव पड़ेगा?
हमारे देश में पुराने समय से ही पेड़-पौधों को लगाने और उन्हें कटने से बचाने की परंपरा रही है। कई बार लोगों ने मिलकर पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन भी किया। ऐसे ही किसी आंदोलन के बारे में जानकारी इकट्ठी करके कॉपी में लिखो। इसके लिए तुम्हें पुस्तकालय, समाचार-पत्रों, शिक्षिका या माता-पिता और इंटरनेट से भी सहायता मिल सकती है।
कवि फूलों, गीतों और विद्या की खेती क्यों करना चाहता है?
इस पंक्ति से बारिश के बारे में क्या पता चलता है?
| नमूना → | सूरज की माँ ने उसको बुला लिया। |
| ऐसा लगता है कि आसमान में सूरज नज़र नहीं आ रहा होगा। |
काका किसी को ज़ोर-ज़ोर से डाँट रहे हैं।
जब बच्ची अपनी माँ से सब बातें कर रही थी, उस समय का आसमान और मौसम कैसा रहा होगा? अपनी कल्पना से बताओ। (संकेत- धूप, सूरज, बादल, धरती, बिजली, लोगों की परेशानियाँ आदि)
नीचे लिखे शब्दों को तुम्हारे घर की भाषा में क्या कहते हैं?
|
क |
देश______ |
घ |
जनता______ |
|
ख |
धरती______ |
ङ |
त्योहार______ |
|
ग |
दूध______ |
च |
इंसान______ |
बहुत से लोग पक्षी पालते हैं-
पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपने विचार लिखिए।
स्वर्ण-श्रृंखला और लाल किरण - सी में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए।
कविता की भाषा में लय या तालमेल बनाने के लिए प्रचलित शब्दों और वाक्यों में बदलाव होता है। जैसे-आगे-पीछे अधिक प्रचलित शब्दों की जोड़ी है, लेकिन कविता में 'पीछे-आगे' का प्रयोग हुआ है। यहाँ 'आगे' का '...बोली ये धागे' से ध्वनि का तालमेल है। इस प्रकार के शब्दों की जोड़ियों में आप भी परिवर्तन कीजिए-दुबला-पतला, इधर-उधर, ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, गोरा-काला, लाल-पीला आदि।
शाम के समय ये क्या करते हैं? पता लगाइए और लिखिए-
| पक्षी | खिलाड़ी | फलवाले | माँ |
| पेड़-पौधे | पिता जी | किसान | बच्चे |
जंगल में खिले पलाश के फूल कैसे प्रतीत होते हैं?
बहुविकल्पी प्रश्न
जाल पड़ने पर पानी क्यों बह जाता है?
बहुविकल्पी प्रश्न
पेड़ अपना फल स्वयं क्यों नहीं खाते हैं।
वृक्ष और सरोवर किस प्रकार दूसरों की भलाई करते हैं?
स्वाधीनता संग्राम के दिनों में अनेक कवियों ने स्वाधीनता को मुखर करने वाली ओजपूर्ण कविताएँ लिखीं। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ऐसी कविताओं की चार-चार पंक्तियाँ इकट्ठा कीजिए जिनमें स्वाधीनता के भावे ओज से मुखर हुए हैं।
कविता में दो शब्दों के मध्य (−) का प्रयोग किया गया है, जैसे− 'जिससे उथल-पुथल मच जाए' एवं 'कण-कण में है व्याप्त वही स्वर'। इन पंक्तियों को पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कवि ऐसा प्रयोग क्यों करते हैं?
नमूने के अनुसार लिखो:
| नमूना → |
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात।
|
| चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे। |
खाने-गाने के सब साथी,
देख रहे हैं मेरी बाट।
नमूने के अनुसार लिखो:
| नमूना → |
छोड़ घोंसला बाहर आया. देखी डालें, देखे पात।
|
| चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे। |
कच्चे-पक्के फल पहचाने,
खाए और गिराए काट।
