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Question
क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि Co(III) दुर्बल क्षेत्र लिगंड के साथ अनुचुंबकीय अष्टफलकीय संकुल क्यों बनाता है जबकि प्रबल क्षेत्र लिगंड के साथ यह प्रतिचुंबकीय अष्टफलकीय संकुल बनाता है।
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Solution
दुर्बल क्षेत्र लिगंडों के साथ Δ0, < p, इसलिए Co(III) का इलेक्ट्रॉनी विन्यास \[\ce{t^4_{2g} e^2_g}\] होता है और इसमें 4 अयुगलित इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा यह अनुचुंबकीय होता है। प्रबल क्षेत्र लिगंडों के साथ, Δ0 > p, इसलिए इलेक्ट्रॉनी विन्यास \[\ce{t^6_{2g} e^0_g}\] होता है। इसमें कोई अयुगलित इलेक्ट्रॉन नहीं होता और यह प्रतिचुंबकीय होता है।
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उपसहसंयोजन यौगिकों का रंग क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन पर निर्भर करता है। संकुलों [Co(NH3)6]3+, [Co(CN)6]3− तथा [Co(H2O)6]3+ का दृश्य क्षेत्र में तरंगदैर्घ्य के अवशोषण का सही क्रम क्या होगा?
[Fe(CN)6]3– संकुल के विषय में कौन-से विकल्प सही हैं?
(i) d2sp3 संकरण
(ii) sp3d2 संकरण
(iii) अनुचुंबकीय
(iv) प्रतिचुंबकीय
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(ii) [Co(H2O)6]2+ का [CoCl4]2− में परिवर्तन होता है।
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CuSO4.5H2O का रंग नीला होता है जबकि CuSO4 रंगहीन होता है क्यों?
अभिकथन: [Cr(H2O)6]Cl2 और [Fe(H2O)6]Cl2 अपचायी प्रकृति के होते हैं।
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संयोजकता आबंध सिद्धांत द्वारा [Co(NH3)6]3+ के संबंध में निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए।
- संकरण का प्रकार
- आंतरिक अथवा बाह्य कक्षक संकुल
- चुंबकीय व्यवहार
- केवल प्रचक्रण चुंबकीय आघूर्ण मान
संकुल का प्रेक्षित रंग संकुल द्वारा अवशोषित तरंग दैर्घ्य से कैसे संबधित होता है?
