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[Fe(H2O)6]3+ का चुंबकीय आघूर्ण 5.92 BM होता है जबकि [Fe(CN)6]3− का चुंबकीय आघूर्ण केवल 1.74 BM होता है। स्पष्ट कीजिए।

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Question

[Fe(H2O)6]3+ का चुंबकीय आघूर्ण 5.92 BM होता है जबकि [Fe(CN)6]3− का चुंबकीय आघूर्ण केवल 1.74 BM होता है। स्पष्ट कीजिए।
Short/Brief Note
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Solution

[Fe(CN)6]3− में d2sp3 संकरण होता है और एक अयुगलित इलेक्ट्रॉन होता है परंतु [Fe(H2O)6]3+ में sp3d2 संकरण होता है तथा 5 अयुगलित इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह अंतर इन संकुलों में क्रमशः प्रबल CN और दुर्बल H2O लिगंडों के कारण होता है।

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उपसहसंयोजन यौगिकों में आंबधन
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Chapter 9: उपसहसंयोजन यौगिक - अभ्यास [Page 132]

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NCERT Exemplar Chemistry [Hindi] Class 12
Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक
अभ्यास | Q III. 31. | Page 132

RELATED QUESTIONS

उपसहसंयोजन यौगिकों का रंग क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन पर निर्भर करता है। संकुलों [Co(NH3)6]3+, [Co(CN)6]3− तथा [Co(H2O)6]3+ का दृश्य क्षेत्र में तरंगदैर्घ्य के अवशोषण का सही क्रम क्या होगा?


अष्टफलकीय [CoCl6]4− के लिए CFSE 18,000 cm−1 है, तो चतुष्फलकीय [CoCl4]2− की CFSE होगी ______।


Mn, Fe और Co की परमाणु संख्या क्रमशः 25, 26 और 27 है। निम्नलिखित में से कौन-से आन्तरिक कक्षक अष्टफलकीय संकुल प्रतिचुंबकीय हैं?
(i) [Co(NH3)6]3+
(ii) [Mn(CN)6]3–
(iii) [Fe(CN)6]4–
(iv) [Fe(CN)6]3–

कोबाल्ट (II) क्लोराइड के गुलाबी रंग के जलीय विलयन में आधिक्य में HCl मिलाने से यह गहरे नीले रंग का हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि

(i) [Co(H2O)6]2+ का [CoCl6]4− में परिवर्तन होता है।

(ii) [Co(H2O)6]2+ का [CoCl4]2− में परिवर्तन होता है।

(iii) चतुष्फलकीय संकुलों का क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन अष्टफलकीय संकुलों की तुलना में कम होता है।

(iv) चतुष्फलकीय संकुलों का क्रिस्टल क्षेत्र विषाटन अष्टफलेकीय संकुलों की तुलना में अधिक होता है।


[MnCl4]2− का चुंबकीय आघूर्ण 5.92 BM है। इसे कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि Co(III) दुर्बल क्षेत्र लिगंड के साथ अनुचुंबकीय अष्टफलकीय संकुल क्यों बनाता है जबकि प्रबल क्षेत्र लिगंड के साथ यह प्रतिचुंबकीय अष्टफलकीय संकुल बनाता है।


निम्न प्रचक्रण चतुष्फलकीय संकुल क्यों नहीं बनते?


क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन सिद्धांत के आधार पर निम्नलिखित संकुलों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

[CoF6]3−, [Fe(CN)6]4− और [Cu(NH3)6]2+

क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन सिद्धांत का प्रयोग करते हुए ऊर्जा स्तर आलेख बनाइए और निम्नलिखित में केंद्रीय धातु परमाणु/आयन का इलेक्ट्रॉनी विन्यास लिखकर चुंबकीय आघूर्ण का मान निर्धारित कीजिए।

[FeF6]3–, [Fe(H2O)6]2+, [Fe(CN)6]4–


संयोजकता आबंध सिद्धांत द्वारा [FeCl6]4− के संबंध में निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए।

  1. संकरण का प्रकार
  2. आंतरिक अथवा बाह्य कक्षक संकुल
  3. चुंबकीय व्यवहार
  4. केवल प्रचक्रण चुंबकीय आघूर्ण मान

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