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Question
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ किं प्रयोजनम्।
Options
धनेन
धनात्
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Solution
धनेन किं प्रयोजनम्।
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उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ पाठयति।
उचितपदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ विकसन्ति
उदाहरणानुसारं सार्थक पदं लिखत –
| शा | खा | सु |
उदाहरणानुसारं शब्दरचनां कुरुत –

यथा-वानराः
उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ च पश्यन्ति। (वृक्ष, पुष्प, बहुव.)
कर्मकारक द्वितीयाविभक्तिं च प्रयुज्य प्रदत्तम् उदाहरणम् अनुसृत्य पञ्च वाक्यानि लिखत।
उदाहरणाम् –
1. कौमुदी संस्कृतं पठति।
2. वत्सला आम्रं खादति।
उदाहरणानुसारं लिखत –
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| निरधन | तृतीया | निर्धनेन | निर्धनभ्याम् | निर्धनैः |
| जन | ______ | ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
सूद: ______ पाकाशाला गच्छित।
चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि स्थूलरेखया चिह्नतानि कुरुत पृथक्तया लिखत च –
ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय।
पंचमीविभक्तियुक्तपदं उदाहरणानुसारं चिह्नितं कुरुत –
यथा- काष्ठात् अग्निः जायते मध्यमानात्।
धैयात् कदाचित् स्थितिम् आप्नुयात् सः।
उदाहरणानुसारं लिखत –
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| यथा- सैनिकः | पञ्चमी | सैनेकात | सैनेकाभ्याम् | सैनेकेभ्यः |
| रक्षकः | ______ | ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
बालः ______ अङ्के उपविशति।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ रक्षणाय वृक्षाणाम् आरोपणम् आवश्यकम्।
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
महाजनस्य संसर्गः
कस्य नोन्नतिकारकः।
| ______ | ______ |
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
गच्छन् पिपीलको याति
योजनानां शतान्यपि।
उदाहरणानुसारं लिखत –
यथा-
| नर | ||
| नरस्य | नर्योः | नराणां |
| वेद | ||
| ______ | ______ | ______ |
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितान् कोष्ठकान् यथायोग्यपदैः पूरयत –
यथा- जन
| जने | जन्योः | जनेषु |
विद्वत्
| ______ | ______ | ______ |
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितान् कोष्ठकान् यथायोग्यपदैः पूरयत –
यथा- जन
| जने | जन्योः | जनेषु |
आत्मन्
| ______ | ______ | ______ |
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितान् कोष्ठकान् यथायोग्यपदैः पूरयत –
यथा- जन
| जने | जन्योः | जनेषु |
क्षमा
| ______ | ______ | ______ |
सप्तमीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
परोक्षे कार्यहन्तारम्,
प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्ययेत् तादृशं मित्रम्,
विषकुम्भं पयोमुखम्॥

