English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

किसी एक पद का सरल अर्थ लिखिए। - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

Advertisements
Advertisements

Question

किसी एक पद का सरल अर्थ लिखिए।

Answer in Brief
Advertisements

Solution

सोहत है चँदवा सिर मोर को, तैसिय सुंदर पाग कसी है ।
वैसिय गोरज भाल बिराजत, जैसी हिये बनमाल लसी है ।।
‘रसखान’ बिलोकत बौरी भई, दृग मूँदि कै ग्वालि पुकार हँसी है ।
खोलि री घूँघट, खोलौं कहा, वह मूरति नैननि माँझ बसी है ।।

जैसे श्री कृष्ण के सिर पर मोर पंख का मुकुट। उनकी पगड़ी भी उतनी ही शानदार और प्यारी है. कृष्ण का मस्तक पर गोरज, या गाय की धूल, विराजमान है। उतने ही सुन्दर उनके हृदय पर विराजित फूलों की माला अद्भुत है। ऐसा प्रतीत होता है कि दूधवाली मोहक कृष्ण के इतने अद्भुत रूप को देखने के बाद बौरा गई है। वो आँखें से मूँदकर हँसते हुए अपने दोस्तों को पुकारती है। जब आपका मित्र घूंघट खोलेगा, यदि चरवाहा अनुरोध करेगा, तो वह यह कहकर घूंघट खोलने से इंकार कर देगा, "मुझे पता है कि श्याम की आकर्षक छवि मेरी आंखों में बस गई है, इसलिए मैं घूँघट खोलूंगा।" तब वह भव्य मूर्ति आँखों से ओझल हो जायेगी, इसलिये मैं घूँघट न उठाऊँगा।

shaalaa.com
अति सोहत स्‍याम जू
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 2.6: अति सोहत स्‍याम जू - स्वाध्याय [Page 50]

APPEARS IN

Balbharati Hindi (Composite) Lokvani [English] Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 2.6 अति सोहत स्‍याम जू
स्वाध्याय | Q (८) | Page 50

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित पठित पदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

धूरि भरे अति सोहत स्याम जू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी।
खेलत खात फिर अँगना, पग पैंजनि बाजति, पीरी कछोटी।।
वा छबि को 'रसखान' बिलोकत, वारत काम कला निधि कोटी।
'काग के भाग कहा कहिए, हरि हाथ सों लै गयो माखन रोटी।।

सोहत है चँँदवा सिर मोर को, तैसिय सुंदर पाग कसी है।
वैसिय गोरज भाल बिराजत, जैसी हिये बनमाल लसी है।।
'रसखान' बिलोकत बौरी भई, दृग मूँदि के ग्वालि पुकार हँसी है।
खोलि री घूँघट, खोलौं कहा, वह नैननि माँश बसी है।।

(1) आकृति में लिखिए: (1)

(i)

(ii) कृष्ण ने पहने हैं - (1)

  1. पग में - ______
  2. सुंदर कसी हुई - ______

(2) पद्यांश की प्रथम दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

सेस, गनेस, महेस, दिनेस, सुरेसहु, जाहिं निरतर गावैं।
जाहिं अनादि, अनंत, अखंड, अछेद, अभेद, सुबेद बतावैं।।
नारद से सुक व्यास रटें, पचिहारे तऊ मुनि पार न पावैं।।
ताहिं अहीर की छोहरियाँ, छछ्ठिया भरि छाछ पै नाच नचावैं।।

(1) कृति पूर्ण कीजिए-   (2)

(2) अंतिम दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।  (2)


संजाल पूर्ण कीजिए:


कृति पूर्ण कीजिए:


कवि यहाँ और यह बनकर रहना चाहता है -

  1. __________________
  2. __________________
  3. __________________
  4. __________________



निम्‍न शब्‍द के भिन्न-भिन्न अर्थ लिखिए:


निम्‍न शब्‍द के भिन्न-भिन्न अर्थ लिखिए:


पद्य में इस अर्थ में आए शब्‍द:

शोभा देता है = ______


पद्य में इस अर्थ में आए शब्‍द:

ग्‍वाल - बालाएँ = ______


पद्य में इस अर्थ में आए शब्‍द:

गोरस देने वाली = ______


पद्य में इस अर्थ में आए शब्‍द:

शुक मुनि = ______


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×