मास्टर प्रीतमचंद स्वभाव से बहुत कठोर और कर्तव्यनिष्ठ थे। छोटी-सी गलती करने पर भी वे बच्चों को कड़ी सज़ा देने के लिए तैयार रहते थे। इसके बावजूद बच्चे खेलकूद के लिए मैदान में जाना कभी नहीं छोड़ते थे। पढ़ाई में उनकी रुचि कम थी, पर खेल के प्रति उनका आकर्षण बना रहता था, क्योंकि खेल का मैदान बच्चों को अनुशासन, सक्रियता और आपसी मेल-जोल सिखाता है। वहाँ न तो किसी प्रकार का डर होता है और न ही कोई बंधन। खेल के नियमों का पालन करने से अपनी और टीम की प्रतिष्ठा बनी रहती है। साथ ही परेड के समय पीटी मास्टर की डाँट-फटकार ने भी उन्हें अनुशासन में रहना सिखाया।
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Question
‘संचयन’ पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए:
‘खेलकूद बच्चों को अनुशासित, सक्रिय और मिलनसार बनाता है।’ - इस कथन पर अपने विचार ‘सपनों के से दिन’ पाठ से उदाहरण देते हुए लिखिए।
Very Long Answer
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Solution
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