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Question
कभी-कभी बाहरी दबाव भी भीतरी उन्मेष बन जाते हैं, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
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Solution
कई बार लेखक का मन कुछ लिखने को नहीं होता है परंतु प्रकाशक और संपादक का आग्रह उसे लेखन के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा आर्थिक विवशता भी लिखने को विवश करती है तब इस तरह से लिखा गया साहित्य भी आंतरिक अनुभूति को जगा देता है। इससे लेखक इन वाहय दबावों के बिना भी लिखने को तत्पर हो जाता है क्योंकि ये वाय दबाव केवल सहायक साधना का ही काम करते हैं, फिर भी लेखन अच्छा लेखन कर जाता है।
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