English

जैसे चितवत चंद चकोरा’ के माध्यम से रैदास ने क्या कहना चाहा है?

Advertisements
Advertisements

Question

जैसे चितवत चंद चकोरा’ के माध्यम से रैदास ने क्या कहना चाहा है?

Short/Brief Note
Advertisements

Solution

‘जैसे चितवत चंद चकोरा’ के माध्यम से रैदास ने यह कहना चाहा है कि जिस प्रकार रात भर चाँद को देखने के बाद भी चकोर के नेत्र अतृप्त रह जाते हैं, उसी प्रकार कवि रैदास के नैन भी निरंतर प्रभु को देखने के बाद भी प्यासे रह जाते हैं।

shaalaa.com
पद्य (Poetry) (Class 9 B)
  Is there an error in this question or solution?

RELATED QUESTIONS

कवि ‘एक पत्र छाँह’ भी माँगने से मना करता है, ऐसा क्यों?


संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए −
गाता शुक जब किरण बसंत
छूती अंग पर्ण से छनकर


प्रकृति अपने विभिन्न क्रिया-कलापों से मनुष्य को प्रभावित करती है। ‘गीत-अगीत’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


‘गीत-अगीत’ कविता में अगीत का चित्रण कवि द्वारा किस तरह किया गया है, स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
कविता की उन पँक्तियों को लिखिए, जिनसे निम्नलिखित अर्थ का बोध होता है −

1. सुखिया के बाहर जाने पर पिता का हृ्दय काँप उठता था।
______________________________
______________________________
______________________________
______________________________

2. पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर की अनुपम शोभा।
______________________________
______________________________
______________________________
______________________________

3. पुजारी से प्रसाद/फूल पाने पर सुखिया के पिता की मनःस्थिति।
______________________________
______________________________
______________________________
______________________________

4. पिता की वेदना और उसका पश्चाताप।
______________________________
______________________________
______________________________
______________________________


इस कविता में से कुछ भाषिक प्रतीकोंबिंबों को छाँटकर लिखिए:

उदाहरण : अंधकार की छाया
(i) _______________
(ii) _______________
(iii) _______________
(iv) _______________
(v) _______________


सुखिया ने अपने पिता से देवी के प्रसाद का फूल क्यों माँगा?


आपके विचार से मंदिर की पवित्रता और देवी की गरिमा को कौन ठेस पहुँचा रहा था और कैसे?


“मनुष्य होने की गरिमा’ किस तरह नष्ट की जा रहीं थी?


‘आदमी नामा’ कविता का मूल कथ्य/प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।


नज़ीर अकबराबादी ने आदमी के चरित्र की विविधता को किस तरह उभारा है?’आदमी नामा’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए :
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।


निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए :
नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत।


निम्नलिखित भाव को पाठ में किन पंक्ति द्वारा अभिव्यक्त किया गया है −
कोई लाख कोशिश करे पर बिगड़ी बात फिर बन नहीं सकती।


उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −

उदाहण : कोय − कोई , जे - जो

ज्यों

_______________

कछु

_______________

नहिं

_______________

कोय

_______________

धनि

_______________

आखर

_______________

जिय

_______________

थोरे

_______________

होय

_______________

माखन

_______________

तरवारि

_______________

सींचिबो

_______________

मूलहिं

_______________

पिअत

_______________

पिआसो

_______________

बिगरी

_______________

आवे

_______________

सहाय

_______________

ऊबरै

_______________

बिनु

_______________

बिथा

_______________

अठिलैहैं

_______________

परिजाय

_______________

 

 

‘सुई की जगह तलवार काम नहीं आती’ तथा ‘बिन पानी सब सून’ इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।


‘रहिमन देखि बड़ेन को … दोहे में मनुष्य को क्या संदेश दिया गया है? इसके लिए उन्होंने किस उदाहरण का सहारा लिया है?


नट किस कला में पारंगत होता है? रहीम ने उसका उदाहरण किसलिए दिया है?


रैदास के पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×