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Question
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हरे रंग की जीरे जैसी, |
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Solution
सौंफ
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कूटी जाती, पीसी जाती, भोजन तीखा खूब बनाती। खाने में जो ज़्यादा डल गई, तो फिर मुँह से निकली सी-सी। आँख-नाक से निकले पानी, याद दिला दूँ, सबको नानी। सोचो, सोचो कौन हूँ मैं, जल्दी बोलो, कौन हूँ मैं? |
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कूटी जाती, पीसी जाती, खाने में पीला रंग लाती। तेल में मुझे मिलाकर दादी, चोट लगे तो झट से लगाती। सबकी चोट को ठीक कराती, इसीलिए मैं सबको भाती। सोचो, सोचो कौन हूँ मैं, जल्दी बोलो, कौन हूँ मैं? |
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काले-काले मोती जैसी, छोटी-सी पर गोल हूँ, बारीक पिसी या दरदरी, मैं तीखे स्वाद वाली हूँ। मीठे और नमकीन में, मैं दोनों में ही डाली जाती हूँ, सोचो, सोचो कौन हूँ मैं, जल्दी बोलो, कौन हूँ मैं? |
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मैं पतला-सा, पर छोटा हूँ, भूरा भी हूँ, और काला भी हूँ। गरम घी और तेल में, मैं खुशबू फैलाता हूँ, दही और जलज़ीरे में, भून कर डाला जाता हूँ। सोचो, सोचो कौन हूँ मैं, जल्दी बोलो, कौन हूँ मैं? |
- पता करो - तुम्हारे घर में खाने में कौन-कौन से मसाले काम में लाए जाते हैं। उनकी सूची बनाओ।
- अपने साथियों की सूची भी देखो।
अपने दादा-दादी / नाना-नानी से पता करो, जब वे बच्चे थे, तब उनकी रसोई में कौन-कौन से मसाले अधिकतर इस्तेमाल होते थे?
पता करो, खाने को खट्टा बनाने के लिए उसमें क्या डाला जाता है?
कैसी लगी तुम्हें आलू की चाट?
सोचो, अगर चाट में मसाले न डाले होते, तो इसका स्वाद कैसा होता?
एक तरह की चाट बनाना और सीखो। कक्षा में उसे मिल-बाँट कर खाओ।





