Advertisements
Advertisements
Question
“दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
Short Answer
Advertisements
Solution
मैं इस बात से कुछ हद तक सहमत हूँ। घनिष्ठ मित्रों में हँसी-मज़ाक और हल्की नोक-झोंक सहज होती है। इससे अपनापन झलकता है। मेरे मित्र और मैं भी कभी-कभी खेलते समय मज़ाक करते हैं, पर हम ध्यान रखते हैं कि किसी को चोट या बुरा न लगे। दोस्ती का भरोसा धौल-धप्पे पर नहीं, बल्कि सम्मान, मदद और सच्चाई पर टिका होता है।
shaalaa.com
Is there an error in this question or solution?
