Advertisements
Advertisements
Question
“हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।”
आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं- हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
Long Answer
Advertisements
Solution
मैं हीरा और मोती दोनों के विचारों में सही बात देखता हूँ, लेकिन हिंसा की सीमा में नहीं। हीरा का कहना सही है कि गिरे हुए या हार चुके शत्रु को और चोट नहीं पहुँचानी चाहिए। यह दया और न्याय का भाव है। मोती का अपने साथी की रक्षा करना भी सही था, क्योंकि उसने अन्याय और खतरे का विरोध किया। पर शत्रु को इतना मारना कि वह फिर उठ न सके, उचित नहीं है। विरोध करते समय भी दया और संयम रखना चाहिए।
shaalaa.com
Is there an error in this question or solution?
