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“दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा

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प्रश्न

“दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

लघु उत्तरीय
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उत्तर

मैं इस बात से कुछ हद तक सहमत हूँ। घनिष्ठ मित्रों में हँसी-मज़ाक और हल्की नोक-झोंक सहज होती है। इससे अपनापन झलकता है। मेरे मित्र और मैं भी कभी-कभी खेलते समय मज़ाक करते हैं, पर हम ध्यान रखते हैं कि किसी को चोट या बुरा न लगे। दोस्ती का भरोसा धौल-धप्पे पर नहीं, बल्कि सम्मान, मदद और सच्चाई पर टिका होता है।

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अध्याय 1: दो बैलों की कथा - अभ्यास [पृष्ठ १८]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga Class 9
अध्याय 1 दो बैलों की कथा
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १८
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