Advertisements
Advertisements
Question
अक्षरों के ज्ञान से पूर्व मनुष्य अपनी बात को दूर दराज के इलाकों तक पहुँचाने के लिए किन-किन माध्यमों का सहारा लेता था?
Advertisements
Solution
अक्षरों के ज्ञान से पूर्व मनुष्य अपनी बात को दूर दराज़ इलाकों तक पहुँचाने के लिए कई तरीके अपनाए थे। उनमें चित्रों के जरिए अपने भाव व्यक्त करना था। जैसे-पशु, पक्षियों, व्यक्तियों के चित्र।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
पुस्तक के पहले अध्याय के पहले अनुच्छेद में लेखक ने सजीव ढंग से अवध की तसवीर प्रस्तुत की है।
तुम भी अपने आसपास की किसी जगह का ऐसा ही बारीक चित्रण करो। यह चित्रण मोहल्ले के चबूतरे, गली की चहल-पहल, सड़क के नज़ारे आदि किसी का भी हो सकता है जिससे तुम अच्छी तरह परिचित हो।
राम के वन-गमन के बाद अयोध्या में क्या-क्या हुआ?
बहुविकल्पीय प्रश्न:
“बचपन’ पाठ किसकी रचना है-
बहुविकल्पीय प्रश्न:
लेखिका का जन्म किस सदी में हुआ था?
आदमी ने गाँवों में रहना कब से शुरू किया?
बातचीत करते समय हमारी बातें, हाथ की हरकत से प्रभावशाली होकर दूसरे तक पहुँचती हैं। हाथ की हरकत से या हाथ के इशारे से भी कुछ कहा जा सकता है।
नीचे लिखे हाथ के इशारे किन अवसरों पर प्रयोग होते हैं? लिखो-
- ‘क्यों’ पूछते हाथ
- मना करते हाथ
- समझाते हाथ
- बुलाते हाथ
- आरोप लगाते हाथ
- चेतावनी देते हाथ
- जोश दिखाते हाथ
बहुविकल्पीय प्रश्न
‘साथी हाथ बढ़ाना’ गीत के गीतकार कौन हैं?
बहुविकल्पीय प्रश्न
कंट्रोल रूम में जाकर छोटू ने क्या हरकत की?
सुरंगनुमा रास्ते का प्रयोग कौन करते थे?
इकट्ठा किए हुए टिकटों का अलग-अलग तरह से वर्गीकरण किया जा सकता है, जैसे-देश के आधार पर। ऐसे और आधार सोचकर लिखो।
बहुविकल्पीय प्रश्न
किन बहानों को मास्टर जी समझ जाते हैं?
निम्नलिखित शब्दों को कहानी में ढूँढ़कर उनका अर्थ समझो। अब स्वयं सोचकर इनसे वाक्य बनाओ-
-
खोंसना
जमघट
टटोलना
कुढ़ना
अगुआ
पुचकारना
खलना
हेकड़ी
| कुढ़ता चेहरा | ईष्र्यालु चेहरा | घमंडी चेहरा | अपमानित चेहरा |
| भूखा चेहरना | चालबाज़ चेहरा | भयभीत चेहरा |
रूआँसा चेहरा |
इन भावों को अभिव्यक्त करके दिखाओ।
अगर मुझे इन चीज़ों को छूने भर से इतनी खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा।
- अगर मुझे इन चीज़ों को छूने भर से इतनी खुशी मिलती है, तो उनकी सुंदरता देखकर तो मेरा मन मुग्ध ही हो जाएगा। ऊपर रेखांकित संज्ञाएँ क्रमशः किसी भाव और किसी की विशेषता के बारे में बता रही हैं। ऐसी संज्ञाएँ भाववाचक कहलाती हैं। गुण और भाव के अलावा भाववाचक संज्ञाओं का संबंध किसी की दशा और किसी कार्य से भी होता है। भाववाचक संज्ञा की पहचान यह है कि इससे जुड़े शब्दों को हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं, देख या छू नहीं सकते। आगे लिखी भाववाचक संज्ञाओं को पढ़ो और समझो। इनमें से कुछ शब्द संज्ञा और क्रिया से बने हैं। उन्हें भी पहचानकर लिखो-
|
मिठास |
भूख |
शांति |
भोलापन |
|
बुढ़ापा |
घबराहट |
बहाव |
फुर्ती |
|
ताज़गी |
क्रोध |
मज़दूरी |
अहसास |
लोकगीत किससे जुड़े हैं?
बोअर-युद्ध के दौरान गांधी जी ने क्या किया?
किस मौसम में लोगों के पास खाली वक्त होता है? ऐसे मौसम में वे क्या करते हैं?
‘लोक’ शब्द में कुछ जोड़कर जितने शब्द तुम्हें सूझे, उनकी सूची बनाओ। इन शब्दों को ध्यान से देखो और समझो कि उनमें अर्थ की दृष्टि से क्या समानता है। इन शब्दों से वाक्य भी बनाओ, जैसे-लोककला।
आश्रम में कॉलेज के छात्रों से गांधी जी ने कौन-सा काम करवाया और क्यों?
