English

अभिकथन - ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर नाइट्रो समूह की उपस्थिति हैलोऐरीनों की नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति क्रियाशीलता बढ़ा देती है।

Advertisements
Advertisements

Question

अभिकथन - ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर नाइट्रो समूह की उपस्थिति हैलोऐरीनों की नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति क्रियाशीलता बढ़ा देती है।

तर्क - नाइट्रो समूह इलेक्ट्रॉन अपनयक समूह होने के कारण बेन्ज़ीन वलय पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व कम कर देता है।

Options

  • अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं और तर्क अभिकथन का सही स्पष्टीकरण है।

  • अभिकथन और तर्क दोनों ही गलत कथन हैं।

  • अभिकथन सही है परंतु तर्क गलत कथन है।

  • अभिकथन गलत है परंतु तर्क सही कथन है।

  • अभिकथन और तर्क दोनों सही कथन हैं परंतु तर्क अभिकथन का सही स्पष्टीकरण नहीं है।

MCQ
Advertisements

Solution

अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं और तर्क अभिकथन का सही स्पष्टीकरण है।

स्पष्टीकरण:

नाइट्रो समूह इलेक्ट्रॉन अपनयक समूह होने के कारण वलय पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व कम कर देता है इसलिए नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति हैलोएरीन की प्रतिक्रियाशीलता को बढ़ाता है।

shaalaa.com
रासायनिक अभिक्रियाएँ
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 10: हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - अभ्यास [Page 158]

APPEARS IN

NCERT Exemplar Rasayan Vigyaan [Hindi] Class 12
Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन
अभ्यास | Q V. 89. | Page 158

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित में से कौन-सी संरचना नीचे दिए अणु (A) का प्रतिबिंब रूप है?


क्लोरोबेन्जीन को AlCl3 की उपस्थिति में क्लोरीन की बेन्जीन से अभिक्रिया द्वारा बनाया जा सकता है। इस अभिक्रिया में निम्नलिखित में से कौन-सी स्पीशीज़ बेन्जीन बलय पर आक्रमण करती है?


सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ C6H5CH2Br की अभिक्रिया ______ अग्रसारित होती है।


नीचे दिए गए अणु में कौन-से कार्बन परमाणु असममित हैं?

\[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{HO}\phantom{.....}\ce{OH}\phantom{..}\ce{H}\phantom{.....}\ce{O}\phantom{..}\\
\phantom{..}\backslash\phantom{.....}|\phantom{....}|\phantom{.....}//\phantom{.}\\
\ce{\overset{a}{C} - \overset{b}{C} - \overset{c}{C} - \overset{d}{C}}\\
\phantom{..}//\phantom{.....}|\phantom{....}|\phantom{....}\phantom{.}\backslash\phantom{...}\\
\phantom{}\ce{O}\phantom{......}\ce{H}\phantom{...}\ce{OH}\phantom{....}\ce{H}\phantom{}\\
\end{array}\]


निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

(a)
(b)
(c)

उपरोक्त अभिक्रिया के लिए कौन-से कथन सही हैं?

(i) (a) और (e) दोनों नाभिकरागी हैं।

(ii) (c) में कार्बन परमाणु sp3 संकरित है।

(iii) (c) में कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।

(iv) (a) और (e) दोनों इलेक्ट्रॉनरागी हैं।


निम्नलिखित कथनों में से कौन-से कथन उपरोक्त अभिक्रिया के लिए सही हैं?

(i) अभिक्रिया SN2 क्रियाविधि का अनुसरण करती है।

(ii) (b) और (d) का विन्यास एक दूसरे के विपरीत है।

(iii) (b) और (d) का विन्यास समान है।

(iv) अभिक्रिया SN1 क्रियाविधि का अनुसरण करती है।


अभिक्रिया माध्यमिक के लिए निम्नलिखित में से कोन-से कथन सही हैं?

(i) माध्यमिक (c) अस्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन पाँच परमाणुओं से जुड़ा है।

(ii) माध्यमिक (c) अस्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।

(iii) माध्यमिक (c) स्थायी है क्योंकि इसमें कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।

(iv) माध्यमिक (c) अभिक्रियक (b) से कम स्थायी है।


इस अभिक्रिया की क्रियाविधि के संबंध में कौन-से कथन सही हैं?

(i) अभिक्रिया में कार्बधनायन (कार्बोकैटायन) माध्यमिक बनेगा।

(ii) OH− क्रियाधर (b) पर एक ओर से जुड़ेगा और उसी समय Cl− इसे छोड़ेगा।

(iii) एक अस्थायी माध्यमिक बनेगा जिसमें OH− और Cl− दुर्बल आबंधों से जुड़े होंगे।

(iv) अभिक्रिया SN1 क्रियाविधि से बढ़ेगी।


इस अभिक्रिया की गतिकी के लिए कौन-से कथन सही हैं?

(i) अभिक्रिया की दर केवल (b) की सांद्रता पर निर्भर करती है।

(ii) अभिक्रिया की दर (a) और (b) दोनों की सांद्रता पर निर्भर करती है।

(iii) अभिक्रिया की आण्विकता एक है।

(iv) अभिक्रिया की आण्विकता दो है।


हैलोऐरीन, हैलोऐल्केन और हैलोऐल्कीन से कम क्रियाशील होती हैं। समीक्षा कीजिए।


निम्नलिखित संरचना से संबंधित अन्य अनुनाद संरचनाएँ लिखिए और ज्ञात कीजिए कि अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह ऑर्थो-पैरा निदर्शन वाला है या मेटा निदर्शन वाला।


C4H9Br अणुसूत्र के यौगिक ‘क’ को KOH के जलीय विलयन से अभिकृत किया गया। इस अभिक्रिया की दर केवल यौगिक 'क' की सांद्रता पर निर्भर करती है। जब इस यौगिक के दूसरे ध्रुवण घूर्णक समावयव ‘ख’ को KOH के जलीय विलयन से अभिकत किया गया तो अभिक्रिया दर यौगिक और KOH दोनों की सांद्रता पर निर्भय पाई गई।

  1. दोनों यौगिकों ‘क’ और ‘ख’ संरचना सूत्र लिखिए।
  2. इन दोनों यौगिकों में से कौन-सा प्रतीपित विन्यास के उत्पाद में परिवर्तित होगा।

ऐलिल क्लोराइड n-प्रोपिल क्लोराइड की अपेक्षा अधिक आसानी से क्यों जलअपघटित होता है?


ग्रीन्यार अभिकर्मक के उपयोग में लेशमात्र नमी भी न होना क्यों आवश्यक है?


SN1 क्रियाविधि के प्रथम चरण में ध्रुवीय विलायक किस प्रकार सहायता करते हैं?

कॉलम I में दी गई अभिक्रियाओं को कॉलम II में दिए गए अभिक्रिया के प्रकारों से सुमेलित कीजिए।

  कॉलम I कॉलम II
(i) (a) नाभिकरागी ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन
(ii) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3 - CH = CH2 + HBr -> CH3 - CH - CH3}\\
\phantom{............................}|\phantom{}\\
\phantom{.............................}\ce{Br}\phantom{}
\end{array}\]
(b) इलेक्ट्रॉनरागी ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन
(iii) (c) सेत्जेफ निराकरण
(iv) (d) इलेक्ट्रॉनरागी योगज
(v) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3  CH2 CH CH3 ->[{ऐल्कोहॉली KOH}] CH3  CH = CH CH3}\\
\phantom{}|\phantom{..........................}\\
\phantom{}\ce{Br}\phantom{.........................}
\end{array}\]
(e) नाभिकरागी प्रतिस्थापन (SN1)

अभिकथन - tert-ब्यूटिल ब्रोमाइड वुर्ट्ज अभिक्रिया द्वारा 2, 2, 3, 3-टेट्रामेथिलब्यूटेन देता है।

तर्क - वुर्टज अभिक्रिया में ऐल्किल हैलाइड शुष्क ईथर में सोडियम से अभिक्रिया करते हैं और हैलाइड में उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या से दुगनी संख्या वाला हाइड्रोकार्बन बनाते हैं।


अभिकथन - क्लोरोबेन्जीन के नाइट्रोकरण से m-नाइट्रोक्लोरोबेन्जीन बनती है।

तर्के - −NO2 समूह m-निर्देशक समूह है।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×