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488 nm तरंगदैर्घ्य का प्रकाश एक ऑर्गन लेसर से उत्पन्न किया जाता है, जिसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव के उपयोग में लाया जाता है। जब इस स्पेक्ट्रमी-रेखा के प्रकाश को उत्सर्जक पर आपतित किया जाता - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

488 nm तरंगदैर्घ्य का प्रकाश एक ऑर्गन लेसर से उत्पन्न किया जाता है, जिसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव के उपयोग में लाया जाता है। जब इस स्पेक्ट्रमी-रेखा के प्रकाश को उत्सर्जक पर आपतित किया जाता है, तब प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों का निरोधी (अंतक) विभव 0.38 V है। उत्सर्जक के पदार्थ का कार्य-फलन ज्ञात करें।

Numerical
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Solution

ऑर्गन लेसर द्वारा उपन्न प्रकाश की तरंगदैर्घ्य, λ = 488 nm = 488 × 10−9 m

प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों का निरोधी (अंतक) विभव, V0 = 0.38 V

प्लांक स्थिरांक, h = 6.6 × 10−34 Js

एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश, e = 1.6 × 10−19 C

प्रकाश की गति, c = 3 × 108 m/s

आइंस्टाइन के प्रकाश-विद्युत प्रभाव से, उत्सर्जक पदार्थ का कार्य-फलन `phi_0` का संबंध इस प्रकार हैः

`eV_0 = (hc)/lambda - phi_0`

`phi_0 = (hc)/lambda - eV_0`

= `(6.6 xx 10^(-34 ) xx 3 xx 10^8)/(488 xx 10^(-9)) - 1.6 xx 10^(-19) xx 0.38`

= 2.54 − 0.38

= 2.16 eV

इसलिए, जिस सामग्री से उत्सर्जक बनाया जाता है, उसका कार्य-फलन 2.16 eV है।

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इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन
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Chapter 11: विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - अभ्यास [Page 289]

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NCERT Bhautiki bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12
Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति
अभ्यास | Q 11.9 | Page 289

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सीज़ियम धातु का कार्य-फलन 2.14 eV है। जब 6 × 1014 Hz आवृत्ति का प्रकाश धातु-पृष्ठ पर आपतित होता है, इलेक्ट्रॉनों का प्रकाशिक उत्सर्जन होता है।

  1. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा,
  2. निरोधी विभव, और
  3. उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम चाल कितनी है?

एक विशिष्ट प्रयोग में प्रकाश-विद्युत प्रभाव की अंतक वोल्टता 1.5 v है। उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा कितनी है?


632.8 nm तरंगदैर्घ्य का एकवर्णी प्रकाश एक हीलियम-नियॉन लेसर के द्वारा उत्पन्न किया जाता है। उत्सर्जित शक्ति 9.42 mW है।

  1. प्रकाश के किरण-पुंज में प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा तथा संवेग प्राप्त कीजिए।
  2. इस किरण-पुंज के द्वारा विकिरित किसी लक्ष्य पर औसतन कितने फोटॉन प्रति सेकंड पहुँचेंगे? (यह मान लीजिए कि किरण-पुंज की अनुप्रस्थ काट एकसमान है जो लक्ष्य के क्षेत्रफल से कम है।)
  3. एक हाइड्रोजन परमाणु को फोटॉन के बराबर संवेग प्राप्त करने के लिए कितनी तेज चाल से चलना होगा?

किसी धातु की देहली आवृत्ति 3.3 × 1014 Hz है। यदि 8.2 × 1014 Hz आवृत्ति का प्रकाश धातु पर आपतित हो, तो प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन के लिए अंतक वोल्टता ज्ञात कीजिए।


किसी धातु के लिए कार्य-फलन 4.2 eV है। क्या यह धातु 330 nm तरंगदैर्घ्य के आपतित विकिरण के लिए प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन देगा?


  1. एक निर्वात नली के तापित कैथोड से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उस चाल का आकलन कीजिए, जिससे वे उत्सर्जक की तुलना में 500v के विभवान्तर पर रखे गए एनोड से टकराते हैं। इलेक्ट्रॉनों के लघु प्रारम्भिक चालों की उपेक्षा कर दें। इलेक्ट्रॉन का आपेक्षिक आवेश अर्थात् \[\frac{e}{m}\] = 1.76 x 1011 C kg है।।
  2. संग्राहक विभव 10 MV के लिए इलेक्ट्रॉनों की चाल ज्ञात करने के लिए उसी सूत्र का प्रयोग करें, जो (a) में काम में लाया गया है। क्या आप इस सूत्र को गलत पाते हैं? इस सूत्र को किस प्रकार सुधारा जा सकता है?

  1. एक समोर्जी इलेक्ट्रॉन किरण-पुंज जिसमें इलेक्ट्रॉन की चाल 5.20 x 106 ms-1 है, पर एक चुम्बकीय-क्षेत्र 1.30 x 10-4 किरण-पुंज की चाल के लम्बवत् लगाया जाता है। किरण-पुंज द्वारा आरेखित वृत्त की त्रिज्या कितनी होगी, यदि इलेक्ट्रॉन के e/m का मान 1.76 x 1011C kg-1 है।
  2. क्या जिस सूत्र को (a) में उपयोग में लाया गया है वह यहाँ भी एक 20 Mev इलेक्ट्रॉन किरण-पुंज की त्रिज्या परिकलित करने के लिए युक्तिपरक है? यदि नहीं तो किस प्रकार इसमें संशोधन किया जा सकता है?

आगे आने वाली दो संख्याओं का आकलन रोचक हो सकता है। पहली संख्या यह बताएगी कि रेडियो अभियान्त्रिक फोटॉन की अधिक चिन्ता क्यों नहीं करते। दूसरी संख्या आपको यह बताएगी कि हमारे नेत्र ‘फोटॉनों की गिनती क्यों नहीं कर सकते, भले | ही प्रकाश साफ-साफ संसूचन योग्य हो।

  1. एक मध्य तरंग (medium wave) 10 kW सामर्थ्य के प्रेषी, जो 500 m तरंगदैर्ध्य की रेडियो तरंग उत्सर्जित करता है, के द्वारा प्रति सेकण्ड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या।
  2. निम्नतम तीव्रता का श्वेत प्रकाश जिसे हम देख सकते हैं (10-10 w m4) के संगत फोटॉनों की संख्या जो प्रति सेकण्ड हमारे नेत्रों की पुतली में प्रवेश करती है। पुतली का क्षेत्रफल लगभग 0.4 cm और श्वेत प्रकाश की औसत आवृत्ति को लगभग 6 x 1024 Hz मानिए।

10-5 W m-2 तीव्रता का प्रकाश सोडियम प्रकाश सेल के 2 cm2 क्षेत्रफल के पृष्ठ पर पड़ता है। यह मान लें कि ऊपर की सोडियम की पाँच परतें आपतित ऊर्जा को अवशोषित करती हैं तो विकिरण के तरंग-चित्रण में प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन के लिए आवश्यक समय का आकलन कीजिए। धातु के लिए कार्य-फलन लगभग 2eV दिया गया है। आपके उत्तर का क्या निहितार्थ है?


X-किरणों के प्रयोग अथवा उपयुक्त वोल्टता से त्वरित इलेक्ट्रॉनों से क्रिस्टल-विवर्तन प्रयोग किए जा सकते हैं। कौन-सी जाँच अधिक ऊर्जा सम्बद्ध है? (परिमाणिक तुलना के लिए, जाँच के लिए तरंगदैर्घ्य को 1 Å लीजिए, जो कि जालक (लेटिस) में अंतर-परमाणु अंतरण की कोटि को है) (me = 9.11 x 10-31 kg)।


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