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Arts (English Medium) कक्षा १२ - CBSE Question Bank Solutions

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कविता और बच्चे को समानांतर रखने के क्या कारण हो सकते हैं?

[3] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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‘भाषा को सहूलियत’ से बरतने से क्या अभिप्राय है?

[3] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं, किंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में ‘सीधी बात भी टेढ़ी हो जाती है’ कैसे?

[3] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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व्याख्या करें

ज़ोर ज़बरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी।

[3] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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आधुनिक युग में कविता की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए।

[3] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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चूड़ी, कील, पेंच आदि मूर्त्त उपमानों के माध्यम से कवि ने कथ्य की अमूर्त्तता को साकार किया है। भाषा को समृद्ध एवं संप्रेषणीय बनाने में, बिंबों और उपमानों के महत्त्व पर परिसंवाद आयोजित करें।

[3] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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सुंदर है सुमन, विहग सुंदर
          मानव तुम सबसे सुंदरतम।

पंत की इस कविता में प्रकृति की तुलना में मनुष्य को अधिक सुंदर और समर्थ बताया गया है ‘कविता के बहाने’ कविता में से इस आशय को अभिव्यक्त करने वाले बिंदुओं की तलाश करें।
[3] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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प्रतापनारायण मिश्र का निबंध ‘बात’ और नागार्जुन की कविता ‘बातें’ ढूँढ़ कर पढ़ें।

[3] कुँवर नारायण : कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति का मेघ ही कर सकता है- तुलसी का यह काव्य-सत्य क्या इस समय का भी युग-सत्य है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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व्याख्या करें-

मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।
जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहूं। पितु बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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व्याख्या करें-

जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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भ्रातृशोक में हुई राम की दशा को कवि ने प्रभु की नर लीला की अपेक्षा सच्ची मानवीय अनुभूति के रूप में रचा है। क्या आप इससे सहमत हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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शोकग्रस्त माहौल में हनुमान के अवतरण को करुण रस के बीच वीर रस का आविर्भाव क्यों कहा गया है?
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं।। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।

भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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कालिदास के रघुवंश महाकाव्य में पत्नी (इंदुमती) के मृत्यु-शोक पर अज तथा निराला की सरोज-स्मृति में पुत्री (सरोज) के मृत्यु-शोक पर पिता के करुण उद्गार निकले हैं। उनसे भ्रातृशोक में डूबे राम के इस विलाप की तुलना करें।

[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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राम कौशल्या के पुत्र थे लक्ष्मण सुमित्रा के। इस प्रकार वे परस्पर सहोदर (एक ही माँ के पेट से जन्मे) नहीं थे। फिर, राम ने उन्हें लक्ष्य कर ऐसा क्यों कहा- “मिलइ न जगत सहोदर भ्राता”? इस पर विचार करें।
[7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
Chapter: [7] तुलसीदास : कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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शब्दों के माध्यम से जब कवि दृश्यों, चित्रों, ध्वनि-योजना अथवा रूप-रस-गंध को हमारे ऐन्द्रिक अनुभवों में साकार कर देता है तो बिंब का निर्माण होता है। इस आधार पर प्रस्तुत कविता से बिंब की खोज करें।
[9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
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बगुलों के पंख कविता को पढ़ने पर आपके मन में कैसे चित्र उभरते हैं? उनकी किसी भी अन्य कला माध्यम में अभिव्यक्ति करें।

[9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapter: [9] उमाशंकर जोशी : छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
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आदर्श समाज के तीन तत्त्वों में से एक ‘भ्रातृता’ को रखकर लेखक ने अपने आदर्श समाज में स्त्रियों को भी सम्मिलित किया है अथवा नहीं? आप इस ‘भ्रातृता’ शब्द से कहाँ तक सहमत हैं? यदि नहीं तो आप क्या शब्द उचित समझेंगे/समझेंगी?
[15] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
Chapter: [15] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
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बाबा भीमराव आंबेडकर के अनुसार उनकी कल्पना का आदर्श समाज कैसा होना चाहिए? अपने शब्दों में अभिव्यक्त करें।

[15] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
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