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जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं।। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।। भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक

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प्रश्न

जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं।। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।

भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?

दीर्घउत्तर
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उत्तर

राम के इस विलापपूर्ण कथन में, जो वे अपने भाई के वियोग के दुःख में कहते हैं, स्त्री के प्रति उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण दिखाई देता है। उस समय समाज पूरी तरह पुरुष-प्रधान था, जहाँ महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त नहीं थे। उन्हें सामाजिक रूप से निम्न और गौण माना जाता था। समाज स्त्री की गरिमा और अस्तित्व को संदेह की दृष्टि से देखता था तथा उसे कमजोर और असहाय समझता था। परिणामस्वरूप, उसके सम्मान और आत्मसम्मान को बार-बार आघात पहुँचाया जाता था।

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लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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अध्याय 7: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप) - अभ्यास [पृष्ठ ४४]

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एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 7 तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)
अभ्यास | Q 8. | पृष्ठ ४४

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