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NCERT solutions for हिन्दी आरोह भाग २ कक्षा १२ chapter 7 - तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप) [Latest edition]

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Chapters

    1: हरिवंश राय बच्चन (आत्मपरिचय, एक गीत)

    2: आलोक धन्वा (पतंग)

    3: कुँवर नारायण (कविता के बहाने, बात सीधी थी पर)

    4: रघुवीर सहाय (कैमरे में बंद अपाहिज)

    5: शमशेर बहादुर सिंह (उषा)

    6: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (बादल राग)

▶ 7: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)

    8: फ़िराक गोरखपुरी (रुबाइयाँ)

    9: उमाशंकर जोशी (छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख)

    10: महादेवी वर्मा (भक्तिन)

    11: जैनेन्द्र कुमार (बाज़ार दर्शन)

    12: धर्मवीर भारती (काले मेघा पानी दे)

    13: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)

    14: हजारी प्रसाद द्विदेदी (शिरीष के फूल)

    15: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज)

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Solutions for Chapter 7: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)

Below listed, you can find solutions for Chapter 7 of CBSE NCERT for हिन्दी आरोह भाग २ कक्षा १२.


अभ्यास
अभ्यास [Pages 44 - 45]

NCERT solutions for हिन्दी आरोह भाग २ कक्षा १२ 7 तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप) अभ्यास [Pages 44 - 45]

पाठ के साथ

1.Page 44

कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।

2.Page 44
पेट की आग का शमन ईश्वर (राम) भक्ति का मेघ ही कर सकता है- तुलसी का यह काव्य-सत्य क्या इस समय का भी युग-सत्य है? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
3.Page 44

तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?

4.Page 44

धूत कहौ... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?

5. (क)Page 44

व्याख्या करें-

मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।
जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहूं। पितु बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।

5. (ख)Page 44

व्याख्या करें-

जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

5. (ग)Page 44

व्याख्या करें-

माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।

5. (घ)Page 44

व्याख्या करें-

ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।।

6.Page 44
भ्रातृशोक में हुई राम की दशा को कवि ने प्रभु की नर लीला की अपेक्षा सच्ची मानवीय अनुभूति के रूप में रचा है। क्या आप इससे सहमत हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
7.Page 44
शोकग्रस्त माहौल में हनुमान के अवतरण को करुण रस के बीच वीर रस का आविर्भाव क्यों कहा गया है?
8.Page 44

जैहउँ अवध कवन मुहुँ लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं।। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।

भाई के शोक में डूबे राम के इस प्रलाप-वचन में स्त्री के प्रति कैसा सामाजिक दृष्टिकोण संभावित है?

पाठ के आसपास

1.Page 45

कालिदास के रघुवंश महाकाव्य में पत्नी (इंदुमती) के मृत्यु-शोक पर अज तथा निराला की सरोज-स्मृति में पुत्री (सरोज) के मृत्यु-शोक पर पिता के करुण उद्गार निकले हैं। उनसे भ्रातृशोक में डूबे राम के इस विलाप की तुलना करें।

2.Page 45
पेट ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।
3.Page 45
तुलसी के युग की बेकारी के क्या कारण हो सकते हैं? आज की बेकारी की समस्या के कारणों के साथ उसे मिलाकर कक्षा में परिचर्चा करें।
4.Page 45
राम कौशल्या के पुत्र थे लक्ष्मण सुमित्रा के। इस प्रकार वे परस्पर सहोदर (एक ही माँ के पेट से जन्मे) नहीं थे। फिर, राम ने उन्हें लक्ष्य कर ऐसा क्यों कहा- “मिलइ न जगत सहोदर भ्राता”? इस पर विचार करें।
5.Page 45
यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया- ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ।

Solutions for 7: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)

अभ्यास
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