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पेट ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे

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प्रश्न

पेट ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।
दीर्घउत्तर
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उत्तर

तुलसीदास के समय में संपन्न और धनवान लोग गरीब परिवारों के बच्चों को दास के रूप में खरीद लिया करते थे। उस युग में आर्थिक असमानता, सामाजिक पिछड़ापन, कठोर वर्ण-व्यवस्था और जातिवाद जैसी समस्याएँ व्यापक रूप से विद्यमान थीं। वर्तमान समय में भी अत्यधिक गरीबी, बेरोजगारी और जीविका के संकट के कारण कुछ निर्धन परिवार अपनी संतानों को बेचने के लिए विवश हो जाते हैं। बंधुआ मजदूरी इसी प्रकार के शोषण का एक उदाहरण है। यद्यपि आज की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियाँ पहले की अपेक्षा काफी बदल चुकी हैं, फिर भी कर्ज के बोझ, गरीबी और भुखमरी के कारण किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएँ आज भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।

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कवितावली (उत्तर कांड से)
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अध्याय 7: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप) - अभ्यास [पृष्ठ ४५]

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एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 7 तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ ४५

संबंधित प्रश्न

कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।


तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?


धूत कहौ... वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?


व्याख्या करें-

माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।


व्याख्या करें-

ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।।


तुलसी के युग की बेकारी के क्या कारण हो सकते हैं? आज की बेकारी की समस्या के कारणों के साथ उसे मिलाकर कक्षा में परिचर्चा करें।

यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया- ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ।

‘कवितावली’ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि तुलसीदास को अपने समय की आर्थिक-सामाजिक समस्याओं की समझ थी।


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