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प्रश्न
व्याख्या करें
ज़ोर ज़बरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी।
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उत्तर
कवि के अनुसार एक बार वह सरल और सीधी बात को व्यक्त करते समय भाषा के जाल में इस तरह उलझ गया कि वह अपनी मूल बात को ठीक से कह ही नहीं पाया और उसे अपना कथ्य ही बदला हुआ प्रतीत होने लगा। कवि बताता है कि जैसे अधिक जोर लगाने से कील की चूड़ियाँ घिस जाती हैं और फिर उसे बिना चूड़ी वाली कील की तरह इस्तेमाल करना पड़ता है, वैसे ही जब कथ्य के अनुरूप सही भाषा नहीं मिलती, तो अभिव्यक्ति का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
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