English

व्याख्या करें ज़ोर ज़बरदस्ती सेबात की चूड़ी मर गईऔर वह भाषा में बेकार घूमने लगी।

Advertisements
Advertisements

Question

व्याख्या करें

ज़ोर ज़बरदस्ती से
बात की चूड़ी मर गई
और वह भाषा में बेकार घूमने लगी।

Explain
Advertisements

Solution

कवि के अनुसार एक बार वह सरल और सीधी बात को व्यक्त करते समय भाषा के जाल में इस तरह उलझ गया कि वह अपनी मूल बात को ठीक से कह ही नहीं पाया और उसे अपना कथ्य ही बदला हुआ प्रतीत होने लगा। कवि बताता है कि जैसे अधिक जोर लगाने से कील की चूड़ियाँ घिस जाती हैं और फिर उसे बिना चूड़ी वाली कील की तरह इस्तेमाल करना पड़ता है, वैसे ही जब कथ्य के अनुरूप सही भाषा नहीं मिलती, तो अभिव्यक्ति का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

shaalaa.com
बात सीधी थी पर
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 3: कुँवर नारायण (कविता के बहाने, बात सीधी थी पर) - अभ्यास [Page 20]

APPEARS IN

NCERT Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
Chapter 3 कुँवर नारायण (कविता के बहाने, बात सीधी थी पर)
अभ्यास | Q 1. | Page 20

RELATED QUESTIONS

कविता और बच्चे को समानांतर रखने के क्या कारण हो सकते हैं?


‘भाषा को सहूलियत’ से बरतने से क्या अभिप्राय है?


बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं, किंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में ‘सीधी बात भी टेढ़ी हो जाती है’ कैसे?


आधुनिक युग में कविता की संभावनाओं पर चर्चा कीजिए।


चूड़ी, कील, पेंच आदि मूर्त्त उपमानों के माध्यम से कवि ने कथ्य की अमूर्त्तता को साकार किया है। भाषा को समृद्ध एवं संप्रेषणीय बनाने में, बिंबों और उपमानों के महत्त्व पर परिसंवाद आयोजित करें।


सुंदर है सुमन, विहग सुंदर
          मानव तुम सबसे सुंदरतम।

पंत की इस कविता में प्रकृति की तुलना में मनुष्य को अधिक सुंदर और समर्थ बताया गया है ‘कविता के बहाने’ कविता में से इस आशय को अभिव्यक्त करने वाले बिंदुओं की तलाश करें।

प्रतापनारायण मिश्र का निबंध ‘बात’ और नागार्जुन की कविता ‘बातें’ ढूँढ़ कर पढ़ें।


निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

व्यक्ति पर प्रशंसा का क्या प्रभाव पड़ता है? 'बात सीधी थी पर' कविता के आधार पर बताइए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×