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प्रश्न
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
व्यक्ति को हमेशा परोपकारी वृत्ति रखनी चाहिए।
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उत्तर
| उपसर्ग | मूलशब्द | प्रत्यय |
| पर | उपकार | ई |
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संबंधित प्रश्न
नीचे दिए गए वाक्य पढ़िए तथा ‘और’ शब्द के विभिन्न प्रयोगों पर ध्यान दीजिए-
(क) पास में सुंदर और शक्तिशाली युवक रहा करता था। (दो पदों को जोड़ना)
(ख) वह कुछ और सोचने लगी। (‘अन्य’ के अर्थ में)
(ग) एक आकृति कुछ साफ़ हुई… कुछ और… कुछ और… (क्रमशः धीरे-धीरे के अर्थ में)
(घ) अचानक वामीरो कुछ सचेत हुई और घर की तरफ़ दौड़ गई। (दो उपवाक्यों को जोड़ने के अर्थ में)
(ङ) वामीरो का दुख उसे और गहरा कर रहा था। (‘अधिकता’ के अर्थ में)
(च) उसने थोड़ा और करीब जाकर पहचानने की चेष्टा की। (‘निकटता’ के अर्थ में)
निम्नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक हिंदी शब्द का अर्थ लिखो तथा उन शब्द का अलग-अलग पूर्ण वाक्यों में प्रयोग कराे:
हल
सौहार्द-सौमनस्य इस पाठ में आए अव्ययों को पहचानो और उनके भेद बताकर उनका अलग-अलग वाक्यों में प्रयोग करो।
पाठ में प्रयुक्त उद्धरण, सुवचन, मुहावरे, कहावतें, आलंकारिक शब्द आदि की सूची बनाकर अपने लेखन प्रयोग हेतु संकलन करो।
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए :
भारत की अलौकिकता सारे विश्व में फैली है।
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
पूर्णिमा के दिन चाँद परिपूर्णता लिए हुए था।
निम्न संधि का विग्रह कर उसका प्रकार लिखिए:
भारतीय कलाकारों का सम्मान तथा उन्हें नमन करने का मन करता है।
निम्नलिखित मुहावरे/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:
नाक - की - किरकिरी - होना - ______ - ______ - ______ - ______
निम्नलिखित मुहावरे/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:
लाठी - पानी - का - बैर - ______ - ______ - ______ - ______
‘हीन’ शब्द का प्रयोग करके कोई तीन अर्थपूर्ण शब्द तैयार करके लिखिए:
जैसे - आत्म + हीन = आत्महीन
(च) ______
(छ) ______
(ज) ______
दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

__________________
__________________
उचित विराम चिह्न लगाओ:
घर
किसी दिन हम भी आपके आएँगे।
निम्नलिखित शब्द के युग्म शब्द बताओ और वाक्य में उचित शब्दयुग्म लिखो:
______ - पहचान
समारोह में सभी ______ वालों को आमंत्रित किया।
निम्नलिखित वाक्य पढ़ो और मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :
वाह! क्या रंग-बिरंगी छटा है।
दिए गए शब्द कार्ड देखो पढ़ो और उनकी सहायता से सरल, मिश्र तथा संयुक्त वाक्य बनाकर कक्षा में सुनाओ। ( एक शब्द कार्ड का प्रयोग अनेक बार कर सकते हैं।)
| रहा | घर | यह | सड़क | पानी | और | |||||
| राष्ट्रीय | बाईं | उदाहरण | का | बरसना | के | |||||
| ओर | वहीं | दाईं | भारत | जी | है | |||||
| एकात्मता | हैं | कुआँ | उत्तम | देश | की |
पेड़ के पत्तों पर दिए गए वर्णों से संयुक्ताक्षरयुक्त शब्द बनाओ :
(आधे हाेकर, पाई हटाकर, हल लगाकर, ‘र’ के प्रकार )
(क, फ, ग, त, थ, घ, ष, व, द, म, ह, ठ, ड, ट, प, र)

नीचे दिए सर्वनामों के चित्र देखो, पहचानो और वाक्यों में प्रयोग करो। (तुम, कोई, हम, आप)
| १. | ![]() |
______ |
| २. | ![]() |
______ |
| ३. | ![]() |
______ |
| ४. | ![]() |
______ |
विरामचिह्न रहित अनुच्छेद में विरामचिह्न लगाओ।
(,, !, ।, ?, -, – , ‘ ’ , ‘‘ ’’)
काबुलीवाले ने पूछा बिटिया अब कौन सी चूड़ियॉं चाहिए मैंने अपनी गुड़िया दिखाकर कहा मेरी गुड़िया के लिए अच्छी सी चूड़ियॉं दे दो जैसे लाल नीली पीली (यह अनुच्छेद काबुलीवाला कहानी से है।)
निम्न पत्र में आए कालों के वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए तथा निर्देशानुसार परिवर्तित करके पुनः लिखिए:-
|
धन्यवाद पत्र ______ घर क्र. ______ ग्राम/शहर ______ जिला दिनांक ______ सम्माननीय .................... जी सादर नमस्कार। मैं आपको नहीं जानता। आप मुझे नहीं जानते। मेरे और आपके बीच एक ही नाता है - एक भले इनसान का। मैं आपके द्वारा भिजवाई गई अटैची को पाकर हृदय से कृतज्ञ हूँ। मेरा रोम-रोम आपको शुभकामना दे रहा है। मैं रेलगाड़ी में भूली हुई अटैची के कारण बहुत परेशान था। मेरे सारे सर्टीफिकेट, पैसे, महत्त्वपूर्ण कागजात उस अटैची में थे। पिछले तीन दिनों की अथक कोशिश के बाद मेरा मन निराश हो चुका था। मुझे लगने लगा था कि जैसे इस दुनिया में ईमानदारी बची ही नहीं है परंतु आपने मेरी अटैची अपने बेटे के हाथों भेजकर मेरी सारी निराशा को आशा में बदल दिया। तब से मैं बहुत प्रसन्न हूँ। मान्यवर! आपकी ईमानदारी ने सचमुच मुझे नया विश्वास दिया है। आप विश्वास रखिए, भविष्य में मैं किसी की भी परेशानी दूर करने का प्रयास करूँगा। भवदीय |
| क्रम. | काल | वाक्य | काल | परिवर्तित वाक्य |
| १. | सामान्य भूतकाल | सामान्य वर्तमान काल | ||
| २. | सामान्य वर्तमान काल | सामान्य भविष्यकाल | ||
| ३. | सामान्य भविष्यकाल | पूर्ण भूतकाल | ||
| ४. | अपूर्ण वर्तमान काल | अपूर्ण भूतकाल | ||
| ५. | पूर्ण भूतकाल | सामान्य वर्तमान काल |
निम्न शब्द के तीन पर्यायवाची शब्द रिक्त स्थान में लिखिए:-
| शब्द | पर्यायवाची शब्द | |||
| रत्नाकर | ||||
शब्द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए:-
ज्योति
शब्द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए:-
आँख
निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:
| संधि | संधि विच्छेद | संधि का प्रकार |
| ______ | निः + संतान |
इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्सम, तद्भव शब्द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्द ढूँढ़िए।
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कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है। हिंदी में कुछ शब्द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं। शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है। हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है। प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा। तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे। |
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कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है। हिंदी में कुछ शब्द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं। शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है। हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है। प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा। तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे। |
उपर्युक्त अंश से पंद्रह शब्द ढूँढ़िए उनमें प्रत्यय लगाकर शब्दों को पुनः लिखिए।
कविता (अद्भुत वीर) में प्रयुक्त विरामचिह्नों के नाम लिखकर उनका अर्थपूर्ण वाक्य में प्रयोग कीजिए।
रेखांकित शब्द के विलोम शब्द लिखकर नए वाक्य बनाइए।
साेच समझकर व्यय करना चाहिए ।
शब्द-युग्म पूरे करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।
ज्ञान-





