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प्रश्न
दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

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उत्तर
जल
उपसर्ग - सजल - माँ को वर्षों बाद देखकर रूपाली की आँखें सजल हो गइर्।
प्रत्यय - जलचर - मछली जलचर है।
संबंधित प्रश्न
पाठ में आए ‘से’ के विभिन्न प्रयोगों से वाक्य की संरचना को समझिए।
(क) राजकपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह भी किया।
(ख) रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ।
(ग) फ़िल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिफ़ थे।
(घ) दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने के गणित जानने वाले की समझ से परे थी।
(ङ) शैलेंद्र राजकपूर की इस याराना दोस्ती से परिचित तो थे।
निम्न विरमचिन्ह का नाम लिखकर उनका वाक्य में प्रयोग करो:
‘‘ ’’
पाठ्यपुस्तक के पाठों से विलोम और समानार्थी शब्द ढूँढ़कर उनकी सूची बनाओ और उनका अलग-अलग वाक्यों में प्रयोग करो।
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
फक्कड़ना लापरवाही और निर्मम अक्खड़ता उनके आत्मविश्वास का परिणाम थी।
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
राजेश अभिमानी लड़का है।
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
मोह-ममता उन्हें अपने मार्ग से विचलित नहीं कर सकती थी।
निम्न वाक्य में कारक रेखांकित कर उनके नाम और चिह्न लिखकर पाठ से अन्य वाक्य खोजकर लिखिए:
उस सी.डी. को तुरंत सुनने की व्यवस्था की गई।
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:
कश्मीर में कई दर्शनीय स्थल देखने योग्य है।
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:
उसने प्राण की बाजी लगा दी।
दिए गए अव्यय भेदों के वाक्य पाठ्यपुस्तक से ढूँढ़कर लिखिए:

दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:
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उचित विराम चिह्न लगाओ:
कामायनी महाकाव्य कवि जयशंकर प्रसाद
पढ़ो :
आधे होकर जुड़ें हम
| मक्खी | सिक्का |
| रफ़्तार | डॉक्टर |
| शगुफ्ता | मुजफ्फर |
कोई, इस सर्वनाम का उपयोग करके अर्थपूर्ण वाक्य तैयार कीजिए।
इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्सम, तद्भव शब्द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्द ढूँढ़िए।
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कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है। हिंदी में कुछ शब्द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं। शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है। हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है। प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा। तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे। |
विज्ञापन पढ़िए और शब्द युग्म ढूँढ़कर लिखिए:
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शब्द-युग्म पूरे करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।
घर -
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
व्यक्ति को हमेशा परोपकारी वृत्ति रखनी चाहिए।
रिक्त स्थान की पूर्ति अव्यय शब्द से कीजिए और नया वाक्य बनाइए:
जहाँ एक लड़का ______ देख रहा था।
नीचे दिए गए विरामचिह्न के सामने उनके नाम लिखकर इनका उपयोग करते हुए वाक्य बनाइए:
| चिह्न | नाम | वाक्य |
| , |
