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प्रश्न
निम्नलिखित विषय पर 60-70 शब्दों में निबंध लिखिए:
मेरा प्रिय नेता
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उत्तर
मेरा प्रिय नेता
भारत के क्रांतिकारी सेनानी और मेरे प्रिय नेता सुभाष चंद्र बोस है। किसी भी देश या संगठन के उन्नति की बागडोर नेता के हाथ में होती है। पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधने के लिए और भाईचारे का संदेश देने के लिए भी एक अच्छे नेता का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। मेरे प्रिय नेताजी एक महान भारतीय राष्ट्रवादी सोच और विचारधारा के व्यक्ति थे। उनके अंदर देशभक्ति की भावना कूट कूट कर भरी हुई थी। सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म 1897 में 23 जनवरी को हुआ था। उनके देश को आजादी दिलाने में इन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी। सुभाष चंद्र बोस जी के पिताजी का नाम जानकीनाथ बोस था। उस समय के ये जाने माने वकील थे।
नेताजी की शुरुआती शिक्षा कटक, ओडिशा में हुई थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल (वर्तमान में स्टीवर्ट स्कूल) और बाद में रावेनशॉ कॉलेजिएट स्कूल से प्राप्त की। बचपन से ही वे पढ़ाई में मेधावी और राष्ट्रभक्ति के प्रति समर्पित थे। आई सी ए स की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनके पास एक सुनहरा अवसर था एक आराम और विलासिता पूर्वक जीवन जीने का। लेकिन इन्होंने देशभक्ति को ही चुना। नेताजी ने राजनीति में दस्तक असहयोग आंदोलन से दि थी। उन्होंने नमक आंदोलन का नेतृत्व सन् 1930 में किया था। उस समय प्रिंस ऑफ वेल्स के आगमन पर विरोध आंदोलन चल रहा था। इस पर नेताजी को सरकार की ओर से छह महीने की सजा भी दी गई थी। नेताजी ने सिविल डिसओबेडिएंस मूवमेंट में हिस्सा लिया था। इसके बाद से ही मेरे प्रिय नेता सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बन गए थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य और 'नेताजी' के रूप में लोग इनको जानने लगे।
ब्रिटिश नेताजी से काफी परेशान थे और उनके मन में नेताजी के प्रति खौफ था। यही वजह है कि ब्रिटिश सरकार ने नेताजी को घर पर नजर बंद करके रखा था। लेकिन उन्होंने अपने विवेक का इस्तेमाल किया और वहाँ से निकल गए। मेरे प्रिय नेता सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजो के विरुद्ध मदद मांगने के लिए यूरोप तक गए। उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ लड़ने के लिए रूस और जर्मनी जैसे देशों से सहायता मांगी। नेताजी सन् 1943 में जापान भी गए थे। इसके पीछे मुख्य वजह यह थी कि जापानियों ने भारत को आजाद करवाने में उनके दिए गए प्रस्ताव को स्वीकृत कर लिया था। जापान में रहकर मेरे प्रिय नेता सुभाष चंद्र बोस जी ने, भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन करने का कार्य आरंभ कर दिया।
सुभाष चंद्र बोस लगातार दूसरी बार भी कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे। लेकिन उसी दौरान गांधीजी और कांग्रेस के साथ उनके कुछ मतभेद उत्पन्न हो गए। सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के अहिंसावादी विचारो से असहमत थे। गांधीजी और नेहरू जी के अहिंसावादी विचारो के चलते सुभाष चंद्र बोस को उनका उचित समर्थन न मिला। और इसी के कारण नेताजी ने इस्तीफा दे दिया था। भारतीय राष्ट्रीय सेना ने भारत के उत्तर - पूर्वी भागो पर हमला किया था। इस हमले का नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस कर रहे थे। आई-एन-ए कुछ हिस्सा लेने में सफल रहे। सुभाष चंद्र बोस जी ने आत्मसमर्पण करने से मना कर दिया। नेताजी विमान में बच कर निकल रहे थे कि कुछ तकनीकी खराबी की वजह से, विमान संभवतः दुर्घटना का शिकार हो गया। सुभाष चंद्र बोस जैसे महान देशभक्त नेता खोने से पूरे भारतवर्ष के लोगो को काफी धक्का लगा था। सुभाष चंद्र बोस जैसे महान देशभक्त नेता खोने से पूरे भारतवर्ष के लोगो को काफी धक्का लगा था।
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