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अभिकथन - KCN मेथिल क्लोराइड से अभिक्रिया करके मेथिल आइसोसायनाइड देता है। तर्क - ​CN− एक उभदंती नाभिकरागी है।

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प्रश्न

अभिकथन - KCN मेथिल क्लोराइड से अभिक्रिया करके मेथिल आइसोसायनाइड देता है।

तर्क - ​CN− एक उभदंती नाभिकरागी है।

विकल्प

  • अभिकथन और तर्क दोनों सही हैं और तर्क अभिकथन का सही स्पष्टीकरण है।

  • अभिकथन और तर्क दोनों ही गलत कथन हैं।

  • अभिकथन सही है परंतु तर्क गलत कथन है।

  • अभिकथन गलत है परंतु तर्क सही कथन है।

  • अभिकथन और तर्क दोनों सही कथन हैं परंतु तर्क अभिकथन का सही स्पष्टीकरण नहीं है।

MCQ
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उत्तर

अभिकथन गलत है परंतु तर्क सही कथन है।

स्पष्टीकरण:

\[\ce{\underset{{ऐल्किल सायनाइड}}{R - Cl + KCN –> R - CN + KCl}}\]

इस अभिक्रिया में आइसोसायनाइड प्राप्त नहीं होता है। CN− एक उभदंती नाभिकरागी है।

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अध्याय 10: हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - अभ्यास [पृष्ठ १५७]

APPEARS IN

एनसीईआरटी एक्झांप्लर Rasayan Vigyaan [Hindi] Class 12
अध्याय 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन
अभ्यास | Q V. 87. | पृष्ठ १५७

संबंधित प्रश्न

निम्नलिखित में से किस अणु में तारांकित (*) कार्बन परमाणु असममित है?

(a) \[\begin{array}{cc}
\ce{H}\\
|\\
\phantom{.}\ce{C^*}\phantom{}\\
\phantom{}/\phantom{..}|\phantom{..}\backslash\phantom{}\\
\phantom{..}\ce{I}\phantom{...}\ce{Br}\phantom{.}\ce{Cl}\phantom{.}
\end{array}\]

(b) \[\begin{array}{cc}
\ce{D}\\
|\\
\phantom{.}\ce{C^*}\phantom{}\\
\phantom{}/\phantom{..}|\phantom{..}\backslash\phantom{}\\
\phantom{..}\ce{I}\phantom{...}\ce{Br}\phantom{.}\ce{Cl}\phantom{.}
\end{array}\]

(c) \[\begin{array}{cc}
\ce{H}\\
|\\
\phantom{.}\ce{C^*}\phantom{}\\
\phantom{}/\phantom{..}|\phantom{..}\backslash\phantom{}\\
\phantom{..}\ce{HO}\phantom{..}\ce{C2H5}\phantom{}\ce{CH3}\phantom{}
\end{array}\]

(d) \[\begin{array}{cc}
\ce{H}\\
|\\
\phantom{.}\ce{C^*}\phantom{}\\
\phantom{}/\phantom{..}|\phantom{..}\backslash\phantom{}\\
\phantom{....}\ce{H}\phantom{..}\ce{C2H5}\phantom{}\ce{CH3}
\end{array}\]


सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ C6H5CH2Br की अभिक्रिया ______ अग्रसारित होती है।


नीचे दिए गए अणु में कौन-से कार्बन परमाणु असममित हैं?

\[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{HO}\phantom{.....}\ce{OH}\phantom{..}\ce{H}\phantom{.....}\ce{O}\phantom{..}\\
\phantom{..}\backslash\phantom{.....}|\phantom{....}|\phantom{.....}//\phantom{.}\\
\ce{\overset{a}{C} - \overset{b}{C} - \overset{c}{C} - \overset{d}{C}}\\
\phantom{..}//\phantom{.....}|\phantom{....}|\phantom{....}\phantom{.}\backslash\phantom{...}\\
\phantom{}\ce{O}\phantom{......}\ce{H}\phantom{...}\ce{OH}\phantom{....}\ce{H}\phantom{}\\
\end{array}\]


निम्न यौगिकों में से कौन-सा OH− आयन द्वारा नाभिकरागी प्रतिस्थापन से रेसिमिक मिश्रण देगा।

(a) \[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{CH3 - CH - Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]

 

(b) \[\begin{array}{cc}
\phantom{..}\ce{Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{}\ce{CH3 - C - CH3}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]

 

(c) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3 - CH - CH2Br}\\
|\phantom{.....}\\
\ce{C2H5}\phantom{..}
\end{array}\]


निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

(a)
(b)
(c)

निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

(a)
(b)
(c)

निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

(a)
(b)
(c)

उपरोक्त अभिक्रिया के लिए कौन-से कथन सही हैं?

(i) (a) और (e) दोनों नाभिकरागी हैं।

(ii) (c) में कार्बन परमाणु sp3 संकरित है।

(iii) (c) में कार्बन परमाणु sp2 संकरित है।

(iv) (a) और (e) दोनों इलेक्ट्रॉनरागी हैं।


इस अभिक्रिया की क्रियाविधि के संबंध में कौन-से कथन सही हैं?

(i) अभिक्रिया में कार्बधनायन (कार्बोकैटायन) माध्यमिक बनेगा।

(ii) OH− क्रियाधर (b) पर एक ओर से जुड़ेगा और उसी समय Cl− इसे छोड़ेगा।

(iii) एक अस्थायी माध्यमिक बनेगा जिसमें OH− और Cl− दुर्बल आबंधों से जुड़े होंगे।

(iv) अभिक्रिया SN1 क्रियाविधि से बढ़ेगी।


निम्नलिखित में से कौन-से यौगिक सेकेन्डी ब्रोमाइड हैं?

(i) (CH3)2CHBr

(ii) (CH3)3C CH2Br

(iii) CH3CH(Br)CH2CH3

(iv) (CH3)2CBrCH2CH3


C4H9Br अणुसूत्र के यौगिक ‘क’ को KOH के जलीय विलयन से अभिकृत किया गया। इस अभिक्रिया की दर केवल यौगिक 'क' की सांद्रता पर निर्भर करती है। जब इस यौगिक के दूसरे ध्रुवण घूर्णक समावयव ‘ख’ को KOH के जलीय विलयन से अभिकत किया गया तो अभिक्रिया दर यौगिक और KOH दोनों की सांद्रता पर निर्भय पाई गई।

  1. दोनों यौगिकों ‘क’ और ‘ख’ संरचना सूत्र लिखिए।
  2. इन दोनों यौगिकों में से कौन-सा प्रतीपित विन्यास के उत्पाद में परिवर्तित होगा।

ऐल्किल हैलाइडों में निराकरण अभिक्रियाएँ (विशेषकर β-निराकरण) उतनी ही सामान्य हैं जितनी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ। दोनों के अभिकर्मकों का उल्लेख कीजिए।


tert-ब्यूटिलब्रोमाइड जलीय NaOH के साथ SN1 क्रियाविधि से अभिक्रिया करता है, जबकि n-ब्यूटिलब्रोमाइड SN2 क्रियाविधि द्वारा अभिक्रिया करता है। क्यों?


कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।

कॉलम I कॉलम II
(i) SN1 अभिक्रिया (a) विस-डाइब्रोमाइड
(ii) अग्निशामक में रसायन (b) जेम-डाइहैलाइड
(iii) ऐल्कीनों का ब्रोमीनन (c) रेसिमीकरण
(iv) ऐल्किलिडीन हैलाइड (d) सेत्जेफ नियम
(v) ऐल्किल हैलाइड से HX का निकलना (e) क्लोरोब्रोमोकार्बन

कॉलम I में दी गई संरचनाओं को कॉलम II में दिए गए नामों से सुमेलित कीजिए।

  कॉलम I कॉलम II
(i) (a) फिटिग अभिक्रिया
(ii) (b) वुर्ट्ज फिटिग अभिक्रिया
(iii) (c) फिंकेल्स्टाइन अभिक्रिया
(iv) \[\ce{C2H5Cl + NaI ->[{शुष्क ऐसीटोन}] C2H5I + NaCl}\] (d) सैन्डमायर अभिक्रिया

अभिकथन - ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर नाइट्रो समूह की उपस्थिति हैलोऐरीनों की नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति क्रियाशीलता बढ़ा देती है।

तर्क - नाइट्रो समूह इलेक्ट्रॉन अपनयक समूह होने के कारण बेन्ज़ीन वलय पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व कम कर देता है।


ऐरिल हैलाइड ऐल्किल हैलाइडों की अपेक्षा नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति कम क्रियाशील क्यों होते हैं? हम ऐरिल हैलाइडों की क्रियाशीलता कैसे बढ़ा सकते हैं?


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