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Science (Hindi Medium) Class 12 [कक्षा १२] - CBSE Question Bank Solutions for Physics (भौतिक विज्ञान)

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Physics (भौतिक विज्ञान)
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वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों की पारिभाषिकी पाठ्यपुस्तक में दी गई है। सूत्र E = hν (विकिरण के एक क्वांटम की ऊर्जा के लिए : फोटॉन) का उपयोग कीजिए तथा em वर्णक्रम के विभिन्न भागों के लिए eV के मात्रक में फोटॉन की ऊर्जा निकालिए। फोटॉन ऊर्जा के जो विभिन्न परिमाण आप पाते हैं वे वैद्युतचुंबकीय विकिरण के स्रोतों से किस प्रकार संबंधित हैं?

[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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em वर्णक्रम (विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम) के विभिन्न भागों के लिए लाक्षणिक ताप परिसरों को ज्ञात करने के लिए λmT = 0.29 cm K सूत्र का उपयोग कीजिए। जो संख्याएँ आपको मिलती हैं वे क्या बतलाती हैं?

[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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वैद्युतचुम्बकीय विकिरण से सम्बन्धित नीचे कुछ प्रसिद्ध अंक, भौतिकी में किसी अन्य प्रसंग में वैद्युतचुम्बकीय दिए गए हैं। स्पेक्ट्रम के उस भाग का उल्लेख कीजिए जिससे इनमें से प्रत्येक सम्बन्धित है।

  1. 21 cm (अन्तरातारकीय आकाश में परमाण्वीय हाइड्रोजन द्वारा उत्सर्जित तरंगदैर्घ्य)
  2. 1057 MHz (लैंब-विचलन नाम से प्रसिद्ध, हाइड्रोजन में, पास जाने वाले दो समीपस्थ ऊर्जा स्तरों से उत्पन्न विकिरण की आवृत्ति)
  3. 2.7 K (सम्पूर्ण अन्तरिक्ष को भरने वाले समदैशिक विकिरण से सम्बन्धित ताप-ऐसा विचार जो विश्व में बड़े धमाके ‘बिग बैंग के उद्भव का अवशेष माना जाता है।)
  4. 5890 Å – 5896 Å (सोडियम की द्विक रेखाएँ)
  5. 14.4 keV [57Fe नाभिक के एक विशिष्ट संक्रमण की ऊर्जा जो प्रसिद्ध उच्च विभेदन की स्पेक्ट्रमी विधि से सम्बन्धित है (मॉसबौर स्पेक्ट्रोस्कॉपी)]
[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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लम्बी दूरी के रेडियो प्रेषित्र लघु-तरंग बैंड का उपयोग करते हैं। क्यों?

[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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लम्बी दूरी के TV प्रेषण के लिए उपग्रहों का उपयोग आवश्यक है। क्यों?

[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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प्रकाशीय तथा रेडियो दूरदर्शी पृथ्वी पर निर्मित किए जाते हैं किन्तु X-किरण खगोल विज्ञान का अध्ययन पृथ्वी का परिभ्रमण कर रहे उपग्रहों द्वारा ही सम्भव है। क्यों?

[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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समतापमण्डल के ऊपरी छोर पर छोटी-सी ओजोन की परत मानव जीवन के लिए निर्णायक है। क्यों?

[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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यदि पृथ्वी पर वायुमण्डल नहीं होता तो उसके धरातल का औसत ताप वर्तमान ताप से अधिक होता या कम?

[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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कुछ वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि पृथ्वी पर नाभिकीय विश्व युद्ध के बाद ‘प्रचण्ड नाभिकीय शीतकाल होगा जिसका पृथ्वी के जीवों पर विध्वंसकारी प्रभाव पड़ेगा। इस भविष्यवाणी का क्या आधार है?

[8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
Chapter: [8] वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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किसी 30 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस के संपर्क में रखे 20 cm फोकस दूरी के अवतल लेंस के संयोजन से बने संयुक्त लेंस (निकाय) की फोकस दूरी क्या है? यह तंत्र अभिसारी लेंस है अथवा अपसारी? लेंसों की मोटाई की उपेक्षा कीजिए।

[9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Chapter: [9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
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किसी वस्तु द्वारा नेत्र पर अंतरित कोण आवर्धक लेंस द्वारा उत्पन्न आभासी प्रतिबिंब द्वारा नेत्र पर अंतरित कोण के बराबर होता है। तब फिर किन अर्थों में कोई आवर्धक लेंस कोणीय आवर्धन प्रदान करता है?

[9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Chapter: [9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
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किसी आवर्धक लेंस से देखते समय प्रेक्षक अपने नेत्र को लेंस से अत्यधिक सटाकर रखता है। यदि प्रेक्षक अपने नेत्र को पीछे ले जाए तो क्या कोणीय आवर्धन परिवर्तित हो जाएगा?

[9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
Chapter: [9] किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
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सोडियम के स्पेक्ट्रमी उत्सर्जन रेखा के प्रकाश का तरंगदैर्घ्य 589 nm है। वह गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए जिस पर

  1. एक इलेक्ट्रॉन, और
  2. एक न्यूट्रॉन का डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य समान होगा।
[11] विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति
Chapter: [11] विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति
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जब कोई हाइड्रोजन परमाणु स्तर n से स्तर (n-1) पर व्युत्तेजित होता है तो उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।n के अधिक मान हेतु, दर्शाइए कि यह आवृत्ति, इलेक्ट्रॉन की कक्षा में परिक्रमण की क्लासिकी आवृत्ति के बराबर है।

[12] परमाणु
Chapter: [12] परमाणु
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क्लासिकी रूप में किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किसी भी कक्षा में हो सकता है। तब प्रारूपी परमाण्वीय साइज किससे निर्धारित होता है? परमाणु अपने प्रारूपी साइज की अपेक्षा दस हजार गुना बड़ा क्यों नहीं है? इस प्रश्न ने बोर को अपने प्रसिद्ध परमाणु मॉडल, जो आपने पाठ्यपुस्तक में पढ़ा है, तक पहुँचने से पहले बहुत उलझन में डाला था। अपनी खोज से पूर्व उन्होंने क्या किया होगा, इसको अनुकरण करने के लिए हम मूल नियतांकों की प्रकृति के साथ निम्न गतिविधि करके देखें कि क्या हमें लम्बाई की विमा वाली कोई राशि प्राप्त होती है, जिसका साइज, लगभग परमाणु के ज्ञांत साइज (~10-10m) के बराबर है।

  1. मूल नियतांकों e, me और c से लम्बाई की विमा वाली राशि की रचना कीजिए। उसका संख्यात्मक मान भी निर्धारित कीजिए।
  2. आप पाएँगे कि (a) में प्राप्त लम्बाई परमाण्वीय विमाओं के परिमाण की कोटि से काफी छोटी है। इसके अतिरिक्त इसमें सम्मिलित है। परन्तु परमाणुओं की ऊर्जा अधिकतर अनापेक्षिकीय क्षेत्र (non: relativistic domain) में है जहाँ c की कोई अपेक्षित भूमिका नहीं है। इसी तर्क ने बोर को c का परित्याग कर सही परमाण्वीय साइज को प्राप्त करने के लिए कुछ अन्य देखने के लिए प्रेरित किया। इस समय प्लांक नियतांक h का कहीं और पहले ही आविर्भाव हो चुका था। बोर की सूक्ष्मदृष्टि ने पहचाना कि h, me और e के प्रयोग से ही सही परमाणु साइज प्राप्त होगा। अतः h, me और e से ही लम्बाई की विमा वाली किसी राशि की रचना कीजिए और पुष्टि कीजिए कि इसका संख्यात्मक मान वास्तव में सही परिमाण की कोटि का है।
[12] परमाणु
Chapter: [12] परमाणु
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निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर \[\ce{_26^56Fe}\] एवं \[\ce{_83^209 Bi}\] नाभिकों की बंधन-ऊर्जा MeV
में ज्ञात कीजिए। m\[\ce{(_26^56Fe)}\] = 55.934939 u, m \[\ce{(_83^209Fe)}\] = 208.980388 u.

[13] नाभिक
Chapter: [13] नाभिक
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बिना बायस p-n संधि में, होल क्षेत्र में n-क्षेत्र की ओर विसरित होते हैं, क्योंकि ______.

[14] अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ
Chapter: [14] अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ
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जब p- n संधि पर अग्रदिशिक बायस अनुप्रयुक्त किया जाता है, तब यह ______.

[14] अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ
Chapter: [14] अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ
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किसी p-n सन्धि डायोड में धारी I को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है

I = `"I"_0 " exp"("eV"/(2"K"_"B""T") - 1)`

जहाँ I0 को उत्क्रमित संतृप्त धारा कहते हैं, V डायोड के सिरों पर वोल्टता है तथा यह अग्रदिशिक बायस के लिए धनात्मक तथा पश्चदिशिक बायस के लिए ऋणात्मक है। V डायोड से प्रवाहित धारा है, KB बोल्ट्जमान नियतांक (8.6 x 10-5 eV/K) है तथा T परम ताप है। यदि किसी दिए गए डायोड के लिए I0 = 5 x 10-12 A तथा T= 300K है, तब

  1. 0.6 अग्रदिशिक वोल्टता के लिए अग्रदिशिक धारा क्या होगी?
  2. यदि डायोड के सिरों पर वोल्टता को बढ़ाकर 0.7 V कर दें तो धारा में कितनी वृद्धि जाएगी?
  3. गतिक प्रतिरोध कितना है?
  4. यदि पश्चदिशिक वोल्टता को 1 से 2V कर दें तो धारा का मान क्या होगा?
[14] अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ
Chapter: [14] अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी - पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ
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0.4 μC आवेश के किसी छोटे गोले पर किसी अन्य छोटे आवेशित गोले के कारण वायु में 0.2 N बल लगता है। यदि दूसरे गोले पर 0.8 μC आवेश हो तो

  1. दोनों गोलों के बीच कितनी दूरी है?
  2. दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण कितना बल लगता है?
[1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
Chapter: [1] वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
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