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जब कोई हाइड्रोजन परमाणु स्तर n से स्तर (n-1) पर व्युत्तेजित होता है तो उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।n के अधिक मान हेतु, दर्शाइए कि यह आवृत्ति, इलेक्ट्रॉन की कक्षा - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

जब कोई हाइड्रोजन परमाणु स्तर n से स्तर (n-1) पर व्युत्तेजित होता है तो उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।n के अधिक मान हेतु, दर्शाइए कि यह आवृत्ति, इलेक्ट्रॉन की कक्षा में परिक्रमण की क्लासिकी आवृत्ति के बराबर है।

Numerical
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Solution

n वें ऊर्जा स्तर में हाइड्रोजन परमाणु की ऊर्जा निम्नलिखित है

`"E"_"n" = - (2pi^2 "me"^4 k^2)/("n"^2"h"^2)   ...["जहाँ"  k = 1/(4piepsilon_0)]`

∴ (n - 1) वें ऊर्जा स्तर से (n - 1) वें ऊर्जा स्तर में लौटने पर v आवृति का विकिरण उत्सर्जित करता है तो 

hv = `"E"_"n" - "E"_("n - 1") = (2pi^2"me"^4k^2)/"h"^2 [1/(("n" - 1)^2) - 1/"n"^2]`

`=> "v" = (2pi^2"me"^4"k"^2)/"h"^3 * ("n"^2 - ("n - 1")^2)/(("n - 1")^2 "n"^2)`

`=> "v" = (2pi^2"me"^4"k"^2)/"h"^3 * ((2"n" - 1))/(("n" - 1)^2"n"^2)`     ...(1)

यही अभीष्ट व्यंजक है। 

यदि n का मान अधिक है तो (n - 1) ≈ n  तथा (2n - 1) ≈ 2n

तब v = `(2pi^2"me"^4"k"^2)/"h"^3 * "2n"/("n"^2 * "n"^2)`

`=> "v" = (4pi^2 "me"^4"k"^2)/("n"^3"h"^3)`    ....(2)

पुनः बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार n वें ऊर्जा स्तर में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग 

`"mv"_"n""r" = "nh"/(2pi)  =>  "v"_"n" = "nh"/(2pi"mr")`

जबकि r = `("n"^2"h"^2)/(4pi^2"mke"^2)`

∴ कक्षा में इलेक्ट्रॉन की क्लासिकी घूर्णन आवृति

`"v"_"e" = "v"_"n"/(2pi"r") = ("nh"//2pi"mr")/(2pi"r")`

`= "nh"/(4pi^2"mr"^2) = "nh"/(4pi^2"m" (("n"^2"h"^2)/(4pi^2 "mke"))^2)`

`"v"_"e" = (4pi^2"mk"^2"e"^4)/("n"^3"h"^3)`    ...(3)

अत: समीकरण (2) एवं (3) से स्पष्ट है कि के उच्च मानों हेतु 7वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की क्लासिकी घूर्णन आवृत्ति, हाइड्रोजन परमाणु द्वारा n वें ऊर्जा स्तर से (n-1) वें ऊर्जा स्तर में जाने के दौरान उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति के बराबर होती है।

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हाइड्रोजन परमाणु का लाइन स्पेक्ट्रम
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क्लासिकी रूप में किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किसी भी कक्षा में हो सकता है। तब प्रारूपी परमाण्वीय साइज किससे निर्धारित होता है? परमाणु अपने प्रारूपी साइज की अपेक्षा दस हजार गुना बड़ा क्यों नहीं है? इस प्रश्न ने बोर को अपने प्रसिद्ध परमाणु मॉडल, जो आपने पाठ्यपुस्तक में पढ़ा है, तक पहुँचने से पहले बहुत उलझन में डाला था। अपनी खोज से पूर्व उन्होंने क्या किया होगा, इसको अनुकरण करने के लिए हम मूल नियतांकों की प्रकृति के साथ निम्न गतिविधि करके देखें कि क्या हमें लम्बाई की विमा वाली कोई राशि प्राप्त होती है, जिसका साइज, लगभग परमाणु के ज्ञांत साइज (~10-10m) के बराबर है।

  1. मूल नियतांकों e, me और c से लम्बाई की विमा वाली राशि की रचना कीजिए। उसका संख्यात्मक मान भी निर्धारित कीजिए।
  2. आप पाएँगे कि (a) में प्राप्त लम्बाई परमाण्वीय विमाओं के परिमाण की कोटि से काफी छोटी है। इसके अतिरिक्त इसमें सम्मिलित है। परन्तु परमाणुओं की ऊर्जा अधिकतर अनापेक्षिकीय क्षेत्र (non: relativistic domain) में है जहाँ c की कोई अपेक्षित भूमिका नहीं है। इसी तर्क ने बोर को c का परित्याग कर सही परमाण्वीय साइज को प्राप्त करने के लिए कुछ अन्य देखने के लिए प्रेरित किया। इस समय प्लांक नियतांक h का कहीं और पहले ही आविर्भाव हो चुका था। बोर की सूक्ष्मदृष्टि ने पहचाना कि h, me और e के प्रयोग से ही सही परमाणु साइज प्राप्त होगा। अतः h, me और e से ही लम्बाई की विमा वाली किसी राशि की रचना कीजिए और पुष्टि कीजिए कि इसका संख्यात्मक मान वास्तव में सही परिमाण की कोटि का है।

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