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Commerce (English Medium) Class 12 - CBSE Question Bank Solutions for Hindi (Elective)

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Hindi (Elective)
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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-

‘हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलित न होता होगा! कुटज को देखकर रोमांच हो आता है। कहाँ से मिलती है यह अकुतोभया वृत्ति, अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन दृष्टि!’

[16] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [16] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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कुटज को ‘गाढ़े का साथी’ क्यों कहा गया है?

[16] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [16] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव किस प्रकार का रहा?

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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लेखक ने सेवाग्राम में किन-किन लोगों के आने का जिक्र किया है?

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार किस प्रकार का था?

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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कश्मीर के लोग ने नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार किया?

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता स्पष्ट होती है?

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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फिलिस्तीन के प्रति भारत का रवैया बहुत सहानभूतिपूर्ण एवं समर्थन भरा क्यों था?

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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अराफात के आतिथ्य प्रेम से संबन्धित किन्हीं दो घटनाओं का वर्णन कीजिए।

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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अराफात ने ऐसा क्यों बोला कि ‘वे आपके ही नहीं हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।’ इस कथन के आधार पर गांधी जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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नेहरू जी द्वारा सुनाई गई कहानी को अपने शब्दों में लिखिए।

[12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [12] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ के लिए कोई दूसरा शीर्षक लिखें तथा इसे चुनने के लिए अपने तर्क दें।

[14] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
Chapter: [14] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
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पारो और संभव में से आप किसके प्रति अधिक सहानुभूति रखते हैं और क्यों? ‘दूसरा देवदास’ पाठ के आधार पर उस पात्र की मन:स्थिति का वर्णन कीजिए।

[15] ममता कालिया : दूसरा देवदास
Chapter: [15] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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"व्यापार यहाँ भी था।" - 'दूसरा देवदास' पाठ के आधार पर इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

[15] ममता कालिया : दूसरा देवदास
Chapter: [15] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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औद्योगीकरण ने पर्यावरण को कैसे प्रभावित किया है? "जहाँ कोई वापसी नहीं" पाठ के आधार पर बताइए।

[14] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
Chapter: [14] निर्मल वर्मा : जहाँ कोई वापसी नहीं
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नीचे अपठित काव्यांश दिए गए है उस काव्यांश पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

निर्मम कुम्हार की थापी से
कितने रुपों में कुटी-पिटी,
हर बार बिखेरी गई, किंतु
मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी।

आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़ कर छल जाए
सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमकी तो ढल जाए,
यों तो बच्चों की गुड़िया-सी, भोली मिट्टी की हस्ती क्या
आँधी आये तो उड़ जाए, पानी बरसे तो गल जाए।

फसलें उगतीं, फसलें कटती लेकिन धरती चिर उर्वर है
सौ बार बने सौ बार मिटे लेकिन धरती अविनश्वर है,
मिट्टी गल जाती पर उसका विश्वास अमर हो जाता है।

रो दे तो पतझर आ जाए, हँस दे तो मधुऋतु छा जाए
झूमे तो नंदन झूम उठे, थिरके तो तांड़व शरमाए,
यों मदिरालय के प्याले सी मिट्टी की मोहक मस्ती क्या
अधरों को छू कर सकुचाए, ठोकर लग जाए छहराए।

उनचास मेघ, उनचास पवन, अंबर अवनि कर देते सम
वर्षा थमती, आँधी रुकती, मिट्टी हँसती रहती हरदम,
कोयल उड़ जाती पर उसका निश्वास अमर हो जाता है
मिट्टी गल जाती पर उसका विश्वास अमर हो जाता है।

मिट्टी की महिमा मिटने में
मिट-मिट हर बार सँवरती है
मिट्टी-मिट्टी पर मिटती है
मिट्टी-मिट्टी को रचती है।

(1) कुम्हार को कठोर कहने से कवि कुम्हार की किस प्रवृत्ति को उजागर करता है? (1)

(क) अत्याचारी
(ख) दृढ़संकल्पी
(ग) क्रोधी
(घ) स्वेच्छाचारी

(2) मिट्टी के गल जाने पर भी उसका विश्वास अमर व अटूट रहता है क्योंकि मिट्टी है - (1)

(क) चिरवाई
(ख) अधीश्वर
(ग) अविनीता
(घ) चिरस्थायी

(3) ऋतुओं के अनुसार मिट्टी का रोना, हँसना, झूमना विश्लेषित करता है कि - (1)

(क) मनुष्य की भाँति भावुक प्रवृत्ति की है।
(ख) सब के अनुकूल स्वयं को ढाल लेती है।
(ग) प्रकृति में समयानुसार परिवर्तन होता है।
(घ) रूप-रंग की भिन्‍नता भौगोलिक भिन्नता है।

(4) ‘उनचास मेघ, उनचास पवन’ के माध्यम से कवि का आशय है - (1)

(क) मेघ और पवन की सर्वव्यापकता
(ख) प्रकृति के भयावह रूप का प्रदर्शन
(ग) कई बार या असंख्य बार का संकेत
(घ) वर्षा व आँधी का निरंतर कर्मरत रहना

(5) ‘यों तो बच्चों की गुड़िया-सी भोली मिट्टी’ का भावार्थ है - (1)

(क) बच्चों को मिट्टी और गुड़िया से खेलना प्रिय है
(ख) गुड़िया की भाँति मिट्टी का अस्तित्व व्यर्थ है
(ग) मूक मिट्टी को मनुष्य इच्छानुसार रूप प्रदान करता है
(घ) मिट्टी मूक है और फसलें उगा कर लोक सेवा करती है

(6) पेड़-पौधों का लहराना मिट्टी की किस क्रिया को दर्शाता है - (1)

(क) थिरकना
(ख) छलना
(ग) टकराना
(घ) बसना

(7) अनेक रूप धारण करने के बाद फिर से मिट्टी में विलय होना कविता की निम्नलिखित पंक्तियों द्वारा स्पष्ट होता है - (1)

(क) सौ बार बने सौ बार मिटे
(ख) ठोकर लग जाए छहराए
(ग) कितने रूपों में कुटी-पिटी
(घ) लेकिन धरती चिर उर्वर है

(8) कविता का संदेश है - (1)

(क) मिट्टी के प्रयोग से परिचित करवाना
(ख) मिट्टी की मोहक मस्ती की सुंदरता
(ग) मिट्टी की महिमा द्वारा प्रेरणा देना
(घ) मिट्टी के परोपकारी रूप का वर्णन

[4] अपठित विभाग
Chapter: [4] अपठित विभाग
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नीचे अपठित काव्यांश दिए गए है उस काव्यांश पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूँगा।
देखो मैंने कंधे चौड़े कर लिये हैं
मुट्ठियाँ मजबूत कर ली हैं
और ढलान पर एड़ियाँ जमाकर
खड़ा होना मैंने सीख लिया है।

घबराओ मत
मैं क्षितिज पर जा रहा हूँ।
सूरज ठीक जब पहाड़ी से लुढ़कने लगेगा
मैं कंधे अड़ा दूँगा
देखना वह वहीं ठहरा होगा।

अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूँगा।
मैंने सुना है उसके रथ में तुम हो
तुम्हें मैं उतार लाना चाहता हूँ
तुम जो स्वाधीनता की प्रतिमा हो
तुम जो साहस की मूर्ति हो
तुम जो धरती का सुख हो
तुम जो कालातीत प्यार हो
तुम जो मेरी धमनी का प्रवाह हो
तुम जो मेरी चेतना का विस्तार हो
तुम्हें मैं उस रथ से उतार लाना चाहता हूँ।

रथ के घोड़े
आग उगलते रहें
अब पहिये टस से मस नहीं होंगे
मैंने अपने कंधे चौड़े कर लिए हैं।

सूरज जाएगा भी तो कहाँ
उसे यहीं रहना होगा
यहीं हमारी साँसों में
हमारी रगों मैं
हमारे संकल्पों में
हमारे रतजगों में
तुम उदास मत होओ
अब मैं किसी भी सूरज को
नहीं डूबने दूँगा।

(1) इन पंक्तियों में कवि का निश्चय प्रकट होता है कि वह - (1)

(क) पहाड़ी क्षेत्र में जाकर रहेगा
(ख) अपने लक्ष्य को पाकर रहेगा
(ग) प्रकृति के उपादानों से प्रेरित है
(घ) जीवन की उहापोह में उलझा है

(2) कवि का तैयार होना दर्शाता है कि वह - (1)

(क) शारीरिक एवं मानसिक रूप से तैयार है।
(ख) दुनिया से लड़ने का साहस रखता है।
(ग) नकारात्मक प्रभाव से बचाव चाहता है।
(घ) निरंतर कर्मरत एवं उपेक्षित रहता है।

(3) ‘घबराओ मत, मैं क्षितिज पर जा रहा हूँ।’ पंक्ति का भाव है - (1)

(क) पाठक के लिए सहृदयता
(ख) सूर्य के लिए अटूट श्रद्धा
(ग) पर्वतारोहण के लिए प्रयासरत
(घ) प्राप्य को पाने के लिए सावधान

(4) सूरज द्वारा लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि एवं प्रकाश का आगमन होता है। यह कथन दर्शाता है कि सूरज है - (1)

(क) चित्रात्मक
(ख) प्रतीकात्मक
(ग) प्रयोगात्मक
(घ) वर्णनात्मक

(5) ‘सूरज जाएगा भी तो कहाँ उसे यहीं रहना होगा।’ कथन दर्शाता है - (1)

(क) विवशता
(ख) स्थायित्व
(ग) आत्मबोध
(घ) दृढ़निश्चय

(6) कविता का संदेश क्या है? (1)

(क) अनुकूल परिस्थितियों में स्थिरता रखना
(ख) प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना
(ग) उद्देश्य प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्पित रहना
(घ) सूर्यास्त से पूर्व कार्यों का समापन करना

(7) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए - (1)

कथन (A): तुम जो साहस की मूर्ति हो, तुम जो धरती का सुख हो।

कारण (R): कवि स्वयं को साहस की मूर्ति मानता है, जो धरती के जीवों के लिए सुखद परिस्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।

(8) कवि के संबंध में इनमें से सही है कि वह - (1)

(क) सत्य की खोज करता है
(ख) भावुक प्रवृत्ति का है
(ग) लघुता का जानकार है
(घ) अदम्य साहस का धनी है

[4] अपठित विभाग
Chapter: [4] अपठित विभाग
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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए -

बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दीख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, ‘लड्डू’। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया।उसके बचने की आशा है क्योंकि वह ‘लड्डू’ की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।

(1) ‘बच्चे के मुख पर रंग बदल रहे थे।’ इस पंक्ति के आधार पर आकलन करने से ज्ञात होता है कि बच्चे में उठ रहे भाव ______ के हैं। (1)

(क) सहृदयता
(ख) घबराहट
(ग) अंतरद्वंद्व
(घ) रोमांचकता

(2) गद्यांश के आधार पर कौन-सा वाक्य सही है? (1)

(क) काठ की अलमारी सदैव सिर दुखाती है।
(ख) शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य किया गया है।
(ग) बच्चों को पढ़ाना अत्यंत सहज कार्य है।
(घ) वृक्ष के हरे पतों का संगीत मधुर होता है।

(3) बालक द्वारा धीरे से लड्डू कहना दर्शाता है कि - (1)

(क) छोटी वस्तु भी पुरस्कार है।
(ख) कृत्रिमता का लबादा उतर गया।
(ग) कृत्रिमता का स्थायित्व संभव है।
(घ) लेखक का उद्देश्य पूरा हो गया।

(4) ‘अब मैंने सुख की साँस भरी’ के माध्यम से कह सकते हैं कि वह - (1)

(क) अत्यंत जागरूक नागरिक हैं।
(ख) बाल मनोविज्ञान से परिचित हैं।
(ग) स्तरानुसार शिक्षा के पक्षधर हैं।
(घ) अपने सुख की कामना करते हैं।

(5) गद्यांश हमें संदेश देता है कि - (1)

(क) स्वाभाविक विकास हेतु सहज एवं आनंदपूर्ण वातावरण होना चाहिए।
(ख) रटंत प्रणाली के कारण बच्चे की हृदय व्यथा चिंताजनक हो जाती है।(ग) बालक में निडरता थी तभी अपनी लड्डू की इच्छा को प्रकट कर पाया है।
(घ) अभिभावक एवं अध्यापकों को बालकों का चहुँमुखी विकास करना चाहिए।

(6) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए - (1)

कथन (A): लड़डू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था।

कारण (R): बालक द्वारा लड्डू माँगा जाना वृक्ष के हरे पत्तों के समान इंगित करता है।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।

[10] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
Chapter: [10] पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी : सुमिरिनी के मनके
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‘मैंने देखा, एक बूँद’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।

[3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
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