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Question
कुटज को ‘गाढ़े का साथी’ क्यों कहा गया है?
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Solution
कालिदास ने आषाढ़ मास के प्रथम दिन रामगिरि पर यक्ष को जब मेघ की आराधना के लिए नियुक्त किया, तब उन्हें कुटज के ताजे फूलों की अंजलि अर्पित करके ही संतोष करना पड़ा था। उस पर्वत पर यदि उन्हें कोई दूसरा फूल नहीं मिलता, तो यक्ष मेघ के प्रति पुष्पांजलि अर्पित करने से वंचित रह जाता। ऐसी स्थिति में कुटज ने उनके संतुष्ट मन को सहारा प्रदान किया था। वह संकट के समय काम आया। इसी कारण ‘कुटज’ को ‘गाढ़े का साथी’ कहा गया है।
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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
‘कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी पैठी रहती हैं। ये भी पाषाण की छाती फाड़कर न जाने किस अतल गह्हर से अपना भोग्य खींच लाते हैं।’
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
‘रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे ‘सोशल सैक्शन’ कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नात!’
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
‘रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।’
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
‘हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलित न होता होगा! कुटज को देखकर रोमांच हो आता है। कहाँ से मिलती है यह अकुतोभया वृत्ति, अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन दृष्टि!’
