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Commerce (Hindi Medium) Class 12 [कक्षा १२] - CBSE Question Bank Solutions

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पाठ में आए पूजा-अर्चना के शब्दों तथा इनसे संबंधित वाक्यों को छाँटकर लिखिए।

[2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
Chapter: [2.09] ममता कालिया : दूसरा देवदास
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'नाम' क्यों बड़ा है? लेखक के विचार अपने शब्दों में लिखिए।

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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'कुट', 'कुटज' और 'कुटनी' शब्दों का विश्लेषण कर उनमें आपसी संबंध स्थापित कीजिए।

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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कुटज किस प्रकार अपनी अपराजेय जीवनी-शक्ति की घोषणा करता है?

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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'कुटज' हम सभी को क्या उपदेश देता है? टिप्पणी कीजिए।

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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कुटज के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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कुटज क्या केवल जी रहा है- लेखक ने यह प्रश्न उठाकर किन मानवीय कमज़ोरियों पर टिप्पणी की है?

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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लेखक क्यों मानता है कि स्वार्थ से भी बढ़कर जिजीविषा से भी प्रचंड कोई न कोई शक्ति अवश्य है? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।
[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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'कुटज' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि 'दुख और सुख तो मन के विकल्प हैं।'
[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी पैठी रहती हैं। ये भी पाषाण की छाती फाड़कर न जाने किस अतर गह्वर से अपना भोग्य खींच लाते हैं।'

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य। नाम उस पद को कहते हैं जिस पर समाज की मुहर लगी होती है। आधुनिक शिक्षित लोग जिसे 'सोशल सैक्शन' कहा करते हैं। मेरा मन नाम के लिए व्याकुल है, समाज द्वारा स्वीकृत, इतिहास द्वारा प्रमाणित, समष्टि-मानव की चित्त-गंगा में स्नात!'

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
'रूप की तो बात ही क्या है! बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुपित यमराज के दारुण निःश्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है।' 

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
हृदयेनापराजितः! कितना विशाल वह हृदय होगा जो सुख से, दुख से, प्रिय से, अप्रिय से विचलति न होता होगा! कुटज को देखकर रोमांच हो आता है। कहाँ से मिलती है यह अकुतोभया वृत्ति, अपराजित स्वभाव, अविचल जीवन दृष्टि!'

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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कुटज को 'गाढ़े का साथी' क्यों कहा गया है?

[2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
Chapter: [2.1] हजारी प्रसाद द्विवेदी : कुटज
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लेखक सेवाग्राम कब और क्यू गया था

[2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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लेखक का गाॉधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव किस प्रकार का रहा? 

[2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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लेखक सेवाग्राम आने का किन-किन लोगों का जिर्क किया है

[2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यव्हार किस प्रकार का था

[2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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कश्मीर के लोग ने नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार किया?

[2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कोन सी विशेषता स्पष्ट होती है

[2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
Chapter: [2.05] भीष्म साहनी : गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
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