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English Medium Class 10 - CBSE Question Bank Solutions

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परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
Chapter: [2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
Chapter: [2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए -

बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही।।
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।

मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं?

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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भाव स्पष्ट कीजिए -

बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी।।
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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भाव स्पष्ट कीजिए -

इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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भाव स्पष्ट कीजिए-

गाधिसू नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।
अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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निम्नलिखित पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

बालकु बोलि बधौं नहि तोही।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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निम्नलिखित पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा।

बार बार मोहि लागि बोलावा||

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु।

बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु||

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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“सामाजिक जीवन में क्रोध की जरूरत बराबर पड़ती है। यदि क्रोध न हो तो मनुष्य दूसरे के द्वारा पहुँचाए जाने वाले बहुत से कष्टों की चिर-निवृत्ति का उपाय ही न कर सके।”

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का यह कथन इस बात की पुष्टि करता है कि क्रोध हमेशा नकारात्मक भाव लिए नहीं होता बल्कि कभी-कभी सकारात्मक भी होता है। इसके पक्ष या विपक्ष में अपना मत प्रकट कीजिए।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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संकलित अंश में राम का व्यवहार विनयपूर्ण और संयन्न है, लक्ष्मण लगातार व्यंग्य बाणों का उपयोग करते हैं और परशुराम का व्यवहार क्रोध से भरा हुआ है। आप अपने आपको इस परिस्थिति में रखकर लिखें कि आपका व्यवहार कैसा होता?

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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अपने किसी परिचित या मित्र के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।

[2] तुलसीदास : राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
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उन घटनाओं को याद करके लिखिए जब आपने अन्याय का प्रतिकार किया हो।

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अवधी भाषा आज किन-किन क्षेत्रों में बोली जाती है?

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