Please select a subject first
Advertisements
Advertisements
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत
| समस्तपदम | विग्रहः | समासनाम |
| निद्रमग्नः | ______ | सप्तमी - तत्पुरुषः |
Concept: समासा:।
| समस्तपदम | विग्रहः | समासनाम |
| हस्तस्थम् | हस्ते तिष्ठति इति | ______ |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत ।
| समस्तपदम | विग्रहः | समासनाम |
| अनावश्यकम | ______ | नञ्-तत्पुरुषः |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत ।
| समस्तपदम | विग्रहः | समासनाम |
| ______ | विविधानि बीजानि | कर्मधारयः |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत ।
| समस्तपदम | विग्रहः | समासनाम |
| प्रतिदिनम् | दिनेदिने | ______ |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम | विग्रहः | समासनाम |
| ........... | परमः अणुः | कर्मधारयः। |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम | विग्रहः | समासनाम |
| क्षुद्र्बुद्धिः | ........ | बहुव्रीहिः। |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| मातृसेवा | मातुः सेवा। | ........ |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रह: | समासनाम |
| प्रत्यहम् | अहनि अहनि। | ______। |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रह: | समासनाम |
| ______ | जलं ददाति इति। | उपपद-तत्पुरुष:। |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रह: | समासनाम |
| असत्यम् | न सत्यम्। | ______। |
Concept: समासा:।
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| व्याघ्रभल्लूकौ | ______ | इतरेतर द्वन्द्व:। |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रह: | समासनाम |
| पन्नगभूषण: | ______। | बहुव्रीहि:। |
Concept: समासा:।
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
शङ्करेण संन्यासार्थं कथम् अनुमतिः लब्धा?
Concept: आदिशक्ङराचार्य:
माध्यमभाषया उत्तरत।
ज्ञानग्रहणविषये शङ्कराचार्याणां किं मतम्?
Concept: आदिशक्ङराचार्य:
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
आचार्यः तं प्रणनाम।
(लङ्-लकारे परिवर्तयत।)
Concept: आदिशक्ङराचार्य:
गद्यांशं पठित्वा निर्दिष्टा: कृती: कुरुत।
|
एकस्मिन् दिने आचार्य: शिष्यगणेन सह गङ्गास्नानार्थम् अगच्छत्। तदा मार्गे कोऽपि दरिद्र: मलिनकाय:, जीर्णवस्त्रधारी मनुष्य: तस्य पुरत: आगच्छत्। तं दृष्ट्वा शिष्या: तम्, 'अपसर, अपसर इति उच्चै: अवदन्। स: मनुष्य: अपृच्छत्- “अपसर, अपसर इति कं वदसि ? शरीरं वा आत्मानं वा? आत्मा तु परमेश्वरस्य अंश: अत: सर्वेषां समान: एव। तथा च सर्वेषां शरीराणि पञ्चमहाभूतात्मकानि। तर्हि कथं तव शरीरं मम शरीराद् भिन्नम्, अहं च त्वद् भिन्न: ?" वेदान्तततत्वस्य सारं तस्य मुखात् श्रुत्वा आचार्य: तं प्रणनाम। ज्ञानं तु कस्मादपि ग्राह्यम्। यस्माद् ज्ञानं लभते स गुरुरेव इति विचारेण आचार्य: तत्रैव `मनीषापञ्चकम्' इति स्तोत्रं रचितवान्। एवम् आसेतुहिमाचलं पर्यटन् अद्वैत-सिद्धान्तस्य प्रचारम् अकरोत् सः। |
(1) अवबोधनम्। (4 तः 3)
(क) उचितं कारणं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत। 1
शङ्कर: मलिनकायं मनुष्यं प्रणनाम यत: ______।
- मलिनकाय: मनुष्य: शङ्करं सङ्कटात् अरक्षत् ।
- सः मलिनकाय: मनुष्य: वेदान्तस्य सारं जानाति स्म।
(ख) कः कं वदति? 1
'अपसर अपसर इति कं वदसि?'
(ग) वाक्यं पुनर्लिखित्वा सत्यम्/असत्यम् इति लिखत। 1
यस्मात् ज्ञानं लभते स: गुरुः।
(घ) अमरकोषात् शब्दं योजयित्वा वाक्यं पुनर्लिखत। 1
मार्गे कोऽपि मनुष्य: तस्य पुरतः आगच्छत्।
(2) शब्दज्ञानम्। (3 तः 2)
(क) सन्धिविग्रहं कुरुत। 1
पूर्वपदं उत्तरपदं च लिखत
- तत्रैव = ______ + एव।
- कस्मादपि = कस्मात् + ______।
(ख) विशेषण-विशेष्ययोः मेलनं कुरुत। 1
| 'अ' | 'आ' |
| (1) दरिद्रः | (1) शरीरम् |
| (2) भिन्नम् | (2) शिष्यः |
| (3) मनुष्यः |
(ग) गद्यांशात् द्वे त्वान्त-अव्यये चित्वा लिखत। 1
(3) जालरेखाचित्ं पूरयत। 1

Concept: आदिशक्ङराचार्य:
सर्वनामतालिका पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| ...... | आवाभ्याम् | ...... | पञ्चमी |
Concept: अभ्यासपत्रम् - ३।
सर्वनामतालिका पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| इयम् | ...... | ...... | प्रथम |
Concept: अभ्यासपत्रम् - ३।
