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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

उत्‍तर लिखिए : किसी से काम करवाने के लिए उपयुक्‍त - ______ हर समय अच्छी लगने वाली बात - ______ उत्‍तर लिखिए : अच्छा प्रयत्‍न यही है - ______ यही अधोगति है - ______ - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए

काम जरा लेकर देखो, सख्त बात से नहीं स्‍नेह से
अपने अंतर का नेह अरे, तुम उसे जरा देकर देखो ।
कितने भी गहरे रहें गर्त, हर जगह प्यार जा सकता है,
कितना भी भ्रष्‍ट जमाना हो, हर समय प्यार भा सकता है ।
जो गिरे हुए को उठा सके, इससे प्यारा कुछ जतन नहीं,
दे प्यार उठा पाए न जिसे, इतना गहरा कुछ पतन नहीं ।।

                                     (भवानी प्रसाद मिश्र)

अ) उत्‍तर लिखिए :

  1. किसी से काम करवाने के लिए उपयुक्‍त - ______
  2. हर समय अच्छी लगने वाली बात - ______

आ) उत्‍तर लिखिए :

  1. अच्छा प्रयत्‍न यही है - ______
  2. यही अधोगति है - ______

 इ) पद्‌यांश की तीसरी और चौथी पंक्‍ति का संदेश लिखिए ।

Answer in Brief
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Solution

अ)

  1. किसी से काम करवाने के लिए उपयुक्‍त - स्नेह
  2. हर समय अच्छी लगने वाली बात - प्यार 

आ)

  1. अच्छा प्रयत्‍न यही है - गिरे हुए को उठाना
  2. यही अधोगति है - गिरे हुए को न उठाना 

 इ)

कवि प्रेम का महत्त्व समझाते हुए कहता है कि भले ही कोई हमसे कितना भी सख्त, दूर या नाराज क्यों न हो, किंतु हम अपने अंतर का स्नेह प्रकट करके; उन्हें सहानुभूति देकर, उनके भीतर भी प्रेम की भावना निर्मित कर सकते हैं। कवि कहता है कि जमाना चाहे जितना भी भ्रष्ट हो जाए, किंतु नि:स्वार्थ, पवित्र व सच्चे प्रेम का अस्तित्व व उसकी लोकप्रियता सदैव बनी रहती है। वह हर समय अच्छा लग सकता है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने यह संदेश देना चाहा है कि हमें हर किसी से प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए।

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अपठित पद्यांश
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Chapter 1.06: गिरिधर नागर - अपठित पद्‌यांश [Page 26]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Lokbharati [English] Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 1.06 गिरिधर नागर
अपठित पद्‌यांश | Q (१) | Page 26

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित अपठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

नदी निकलती है पर्वत से, मैदानों में बहती है।
और अंत में मिल सागर से, एक कहानी कहती है।

बचपन में छोटी थी पर मैं, बड़े वेग से बहती थी।
आँधी-तूफाँ, बाढ़-बवंडर, सब कुछ हँसकर सहती थी।

मैदानों में आकर मैंने, सेवा का संकल्प लिया।
और बना जैसे भी मुझसे, मानव का उपकार किया।

अंत समय में बचा शेष जो, सागर को उपहार दिया।
सब कुछ अर्पित करके अपने, जीवन को साकार किया।

(1) कृति पूर्ण कीजिए: (2)

(2) ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्न शब्द हों: (2)

  1. सागर
  2. छोटी

(3) प्रस्तुत पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए। (2)


निम्नलिखित पदयांश के आधारित बहुविकल्‍पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए-

सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है महज़ संघर्ष ही।।
संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम
जो नत हुआ, वह मृत हुआ, ज्यों वृंत से झरकर कुसुम
जो पंथ भूल रुका नहीं,
जो हार देख झुका नहीं,
जिसने मरण को भी लिया हो जीत, है जीवन वहीं।। सच हम नहीं...

ऐसा करो जिससे न प्राणों में कहीं जड़ता रहे।जो है जहाँ चुपचाप अपने आप से लड़ता रहे।
जो भी परिस्थितियाँ मिलें,
काँटे चुभें, कलियाँ खिलें,
टूटे नहीं इनसान, बस संदेश यौवन का यही।। सच हम नहीं...

अपने हृदय का सत्य अपने आप हमको खोजना।
अपने नयन का नीर अपने आप हमको पोंछना।
आकाश सुख देगा नहीं,
धरती पसीजी है कहीं!
हर एक राही को भटककर ही दिशा मिलती रही।। सच हम नहीं...
-जगदीश गुप्त

  1.  इस कविता के केंद्रीय भाव हेतु दिए गए कथनों को पढ़कर सबसे सही विकल्प चुनिए-
    कथन
    (i) प्रतिकूलता के विरुद्ध जूझते हुए बढ़ना ही जीवन की सच्चाई है।
    (ii) परिस्थितियों से समझौता करके जोखिमों से बचना ही उचित है।
    (iii) लक्ष्य-संधान हेतु मार्ग में भटक जाने का भय त्याग देना चाहिए।
    (iv) जीवन में 'अपने छाले, ख़ुद सहलाने' का दर्शन अपनाना चाहिए।
    विकल्प
    (क) कथन ii सही है।
    (ख) कथन i व iii सही हैं।
    (ग) कथन i, iii व iv सही हैं।
    (घ) कथन i, ii, iii व iv सही हैं।

  2. मरण अर्थात मृत्यु को जीतने का आशय है-
    (क) साधुता व साधना से अमरत्व प्राप्त करना।
    (ख) योगाध्यास व जिजीविषा से दीर्घायु हो जाना।
    (ग) अर्थ, बल व दृढ़ इच्छाशक्ति से जीवन को कष्टमुक्त करना।
    (घ) जीवन व जीवन के बाद भी आदर्श रूप में स्मरण किया जाना।

  3. 'आकाश सुख देगा नहीं, धरती पसीजी है कहीं...' का अर्थ है कि-
    (क) आकाश और धरती दोनों में संवेदनशीलता नहीं है।
    (ख) ईश्वर उदार है, अतः वही सुख देता है, वही पसीजता है।
    (ग) जुझारू बनकर स्वयं ही जीवन के दुख दूर किए जा सकते हैं।
    (घ) सामूहिक प्रयत्नों से ही संकट की स्थिति से निकला जा सकता है।

  4. अपने आप से लड़ने का अर्थ है-
    (क) अपनी अच्छाइयों व बुराइयों से भलीभाँति परिचित होना।
    (ख) किसी मुद्दे पर दिल और दिमाग़ का अलग-अलग सोचना।
    (ग) अपने किसी ग़लत निर्णय के लिए स्वयं को संतुष्ट कर लेना।
    (घ) अपनी दुर्बलताओं की अनदेखी न करके उन्हें दृढ़ता से दूर करना।

  5. युवावस्था हमें सिखाती है कि-
    कथन पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए-
    कथन
    (i) स्वयं को चैतन्य, गतिशील, आत्मआलोचक व आशावादी बनाए रखें।
    (ii) सजग रहें; जीवन में कभी कठिन परिस्थितियाँ उत्पन्न ही न होने दें।
    (iii) सुख-दुख, उतार-चढ़ाव को भाग्यवादी बनकर स्वीकार करना सीखें।
    (iv) प्रतिकूल परिस्थितियों के आगे घुटने न टेकें; बल्कि दो-दो हाथ करें।
    विकल्प
    (क) कथन i व ii सही हैं।
    (ख) कथन i व iv सही हैं।
    (ग) कथन ii व iii सही हैं।
    (घ) कथन iii व iv सही हैं।

निम्नलिखित पदयांश के आधारित बहुविकल्‍पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए-

'फ़सल' किसान के कच्चे-अधपके
सपनों की लहलहाती आस है
यह उसके हृदय की गहराइयों में
अंकुरित एक विश्वास है
यह विश्वास है-
ढही हुई दीवार की चिनाई का
अट्ठारह पार कर चुकी बेटी की सगाई का
परचूनिए की उधारी चुकाने का
मन के सपनों को नए परिधान पहनाने का
इसी विश्वास की सलामती के लिए
वह मूँदता है आँखें
दिन में न जाने कितनी बार...
और दुआएँ प्रेषित करता है ऊपर तक
भरोसे और आशंका की रस्साकशी में
न जाने कितनी बार वह जागता है नींद से
और जगा देना चाहता है उस परमात्मा को भी 
जिसके बारे मैं सुनता आया है कि सभी कुछ उसके ही हाथ है...
और इसीलिए जब फ़सल सौंधियाती है
असल में, किसान के सपने सौंधियाते हैं
और फ़सल घर आ जाने पर, सपने पक जाते हैं...
-डॉ. विनोद 'प्रसून'

  1. फ़सल को किसानों के कच्चे-अधपके सपनों की लहलहाती आस कहने का कारण है - कथन पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए -
    कथन
    (i) फ़सल देखकर बैंकों से सस्ते ब्याज पर ऋण सरलता से मिल जाना
    (ii) फ़सल से किसान के स्वप्नों की संबद्धता और भावात्मक लगाव होना
    (iii) फ़सल से जुड़े निराई, सिंचाई, कटाई, गहाई, भंडारण आदि के सपने देखना
    (iv) फ़सल से ही जीवन की ज़रूरी इच्छाओं के साकार होने की संभावना जुड़ी होना
    विकल्प
    (क) कथन i व ii सही हैं।
    (ख) कथन ii व iii सही हैं।
    (ग) कथन ii व iv सही हैं।
    (घ) कथन iii व iv सही हैं।

  2. किसान के हृदय की गहराइयों में अंकुरित हुए विश्वास की परिधि में आते हैं -
    (क) कुछ पाकर सामाजिक कार्य करने की इच्छाएँ
    (ख) अति आवश्यक कार्य एवं मन के भावात्मक सपने
    (ग) आधुनिक कृषि यंत्र आदि जुटा लेने की अभिलाषाएँ
    (घ) कठिन समय के लिए कुछ बचाकर रखने की योजनाएँ

  3. 'दुआएँ प्रेषित करता है ऊपर तक' का आशय है -
    (क) ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए व्रत-उपवास रखना
    (ख) सामूहिक यज्ञ करके फ़सल की कुशलता की कामना करना
    (ग) फ़सल की कुशलता हेतु मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना करना
    (घ) निवेदन को ग्राम्य विकास से जुड़े अधिकारियों तक पहुँचाना

  4. 'भरोसे और आशंका की रस्साकशी में' पंक्ति के आधार पर किसान की मनोदशा से जुड़ा सही विकल्प है -
    (क) ईश्वर पर अटूट विश्वास कि वे फ़सल को कोई हानि नहीं होने देंगे
    (ख) ईश्वर पर विश्वास, किंतु फ़सल की कुशलता को लेकर मन आशंकित रहना
    (ग) परिश्रम पर पूर्ण विश्वास, किंतु 'भाग्य में क्या लिखा है' इससे सदा आशंकित रहना
    (घ) स्वयं पर भरोसा करना, किंतु प्राकृतिक आपदाओं की आशंका से सदैव भयभीत बने रहना

  5. कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए-
    कथन (A) - किसान अपनी फ़सल के साथ भावात्मक रूप से जुड़ा होता है।
    कारण (R) - व्यवसाय और व्यवसायी के बीच ऐसे संबंध स्वाभाविक हैं।
    (क) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
    (ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैं।
    (ग) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
    (घ) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।

निम्नलिखित पठित पद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए- 

तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढ़स बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग
और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ़ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।

  1. 'तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला' इस पंक्ति में 'उसका' शब्द किसके लिए प्रयोग किया गया है?
    (क) संगतकार के लिए
    (ख) प्रधान गायक के लिए
    (ग) गाने के इच्छुक संगीत प्रेमियों के लिए
    (घ) वाद्ययंत्र बजाने वाले कलाकारों के लिए

  2. संगतकार का स्वर मुख्य गायक की सहायता कब करता है?
    (क) जब ऐसा करने के लिए उसका मन उससे कहता है
    (ख) जब गायन को प्रभावी बनाकर वह वाहवाही लूटना चाहता है
    (ग) गायक के द्वारा किसी पंक्ति विशेष को गाने का आग्रह किए जाने पर
    (घ) गायक का कंठ कमज़ोर होने तथा प्रेरणा व उत्साह में गिरावट आने पर

  3. 'संगतकार' किसका प्रतीक है?
    (क) संगीत को पागलपन की हद तक चाहने वाले जज़्बात का
    (ख) स्वर को साधने के लिए अनवरत की जाने वाली साधना का
    (ग) किसी की सफलता में निस्स्वार्थ सहयोग करने की भावना का
    (घ) मनोरंजन, माधुर्य, मनुष्यत्व, अपनत्व, प्रतिबद्धता व प्रेरणा का

  4. कभी-कभी संगतकार गायक का यूँही साथ क्यों देता है?
    (क) अपने आप को उसके समकक्ष प्रदर्शित करने के लिए
    (ख) उसे यह संदेश देने के लिए कि वह स्वयं को अकेला न समझे
    (ग) वह मुख्य गायक की कमज़ोरियों से पूरी तरह परिचित होता है
    (घ) उसे विश्वास होता है कि बीच-बीच में गाने से गाने की मधुरता बनी रहेगी

  5. संगतकार की 'मनुष्यता' किन कार्यों से प्रकट होती है?
    (क) प्रधान गायक की सेवा मैं सदैव श्रद्धापूर्वक जुटे रहने से
    (ख) गाने से पहले प्रत्येक कार्य को करने की पूर्व योजना बनाने से
    (ग) स्वयं को विशिष्ट न बनाकर प्रधान गायक की विशिष्टता बढ़ाने से
    (घ) कार्यक्रम से पहले एवं उसके उपरांत प्रधान गायक के चरण स्पर्श करने से

नीचे अपठित काव्यांश दिए गए है उस काव्यांश पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

निर्मम कुम्हार की थापी से
कितने रुपों में कुटी-पिटी,
हर बार बिखेरी गई, किंतु
मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी।

आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़ कर छल जाए
सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमकी तो ढल जाए,
यों तो बच्चों की गुड़िया-सी, भोली मिट्टी की हस्ती क्या
आँधी आये तो उड़ जाए, पानी बरसे तो गल जाए।

फसलें उगतीं, फसलें कटती लेकिन धरती चिर उर्वर है
सौ बार बने सौ बार मिटे लेकिन धरती अविनश्वर है,
मिट्टी गल जाती पर उसका विश्वास अमर हो जाता है।

रो दे तो पतझर आ जाए, हँस दे तो मधुऋतु छा जाए
झूमे तो नंदन झूम उठे, थिरके तो तांड़व शरमाए,
यों मदिरालय के प्याले सी मिट्टी की मोहक मस्ती क्या
अधरों को छू कर सकुचाए, ठोकर लग जाए छहराए।

उनचास मेघ, उनचास पवन, अंबर अवनि कर देते सम
वर्षा थमती, आँधी रुकती, मिट्टी हँसती रहती हरदम,
कोयल उड़ जाती पर उसका निश्वास अमर हो जाता है
मिट्टी गल जाती पर उसका विश्वास अमर हो जाता है।

मिट्टी की महिमा मिटने में
मिट-मिट हर बार सँवरती है
मिट्टी-मिट्टी पर मिटती है
मिट्टी-मिट्टी को रचती है।

(1) कुम्हार को कठोर कहने से कवि कुम्हार की किस प्रवृत्ति को उजागर करता है? (1)

(क) अत्याचारी
(ख) दृढ़संकल्पी
(ग) क्रोधी
(घ) स्वेच्छाचारी

(2) मिट्टी के गल जाने पर भी उसका विश्वास अमर व अटूट रहता है क्योंकि मिट्टी है - (1)

(क) चिरवाई
(ख) अधीश्वर
(ग) अविनीता
(घ) चिरस्थायी

(3) ऋतुओं के अनुसार मिट्टी का रोना, हँसना, झूमना विश्लेषित करता है कि - (1)

(क) मनुष्य की भाँति भावुक प्रवृत्ति की है।
(ख) सब के अनुकूल स्वयं को ढाल लेती है।
(ग) प्रकृति में समयानुसार परिवर्तन होता है।
(घ) रूप-रंग की भिन्‍नता भौगोलिक भिन्नता है।

(4) ‘उनचास मेघ, उनचास पवन’ के माध्यम से कवि का आशय है - (1)

(क) मेघ और पवन की सर्वव्यापकता
(ख) प्रकृति के भयावह रूप का प्रदर्शन
(ग) कई बार या असंख्य बार का संकेत
(घ) वर्षा व आँधी का निरंतर कर्मरत रहना

(5) ‘यों तो बच्चों की गुड़िया-सी भोली मिट्टी’ का भावार्थ है - (1)

(क) बच्चों को मिट्टी और गुड़िया से खेलना प्रिय है
(ख) गुड़िया की भाँति मिट्टी का अस्तित्व व्यर्थ है
(ग) मूक मिट्टी को मनुष्य इच्छानुसार रूप प्रदान करता है
(घ) मिट्टी मूक है और फसलें उगा कर लोक सेवा करती है

(6) पेड़-पौधों का लहराना मिट्टी की किस क्रिया को दर्शाता है - (1)

(क) थिरकना
(ख) छलना
(ग) टकराना
(घ) बसना

(7) अनेक रूप धारण करने के बाद फिर से मिट्टी में विलय होना कविता की निम्नलिखित पंक्तियों द्वारा स्पष्ट होता है - (1)

(क) सौ बार बने सौ बार मिटे
(ख) ठोकर लग जाए छहराए
(ग) कितने रूपों में कुटी-पिटी
(घ) लेकिन धरती चिर उर्वर है

(8) कविता का संदेश है - (1)

(क) मिट्टी के प्रयोग से परिचित करवाना
(ख) मिट्टी की मोहक मस्ती की सुंदरता
(ग) मिट्टी की महिमा द्वारा प्रेरणा देना
(घ) मिट्टी के परोपकारी रूप का वर्णन


नीचे अपठित काव्यांश दिए गए है उस काव्यांश पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए।

अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूँगा।
देखो मैंने कंधे चौड़े कर लिये हैं
मुट्ठियाँ मजबूत कर ली हैं
और ढलान पर एड़ियाँ जमाकर
खड़ा होना मैंने सीख लिया है।

घबराओ मत
मैं क्षितिज पर जा रहा हूँ।
सूरज ठीक जब पहाड़ी से लुढ़कने लगेगा
मैं कंधे अड़ा दूँगा
देखना वह वहीं ठहरा होगा।

अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूँगा।
मैंने सुना है उसके रथ में तुम हो
तुम्हें मैं उतार लाना चाहता हूँ
तुम जो स्वाधीनता की प्रतिमा हो
तुम जो साहस की मूर्ति हो
तुम जो धरती का सुख हो
तुम जो कालातीत प्यार हो
तुम जो मेरी धमनी का प्रवाह हो
तुम जो मेरी चेतना का विस्तार हो
तुम्हें मैं उस रथ से उतार लाना चाहता हूँ।

रथ के घोड़े
आग उगलते रहें
अब पहिये टस से मस नहीं होंगे
मैंने अपने कंधे चौड़े कर लिए हैं।

सूरज जाएगा भी तो कहाँ
उसे यहीं रहना होगा
यहीं हमारी साँसों में
हमारी रगों मैं
हमारे संकल्पों में
हमारे रतजगों में
तुम उदास मत होओ
अब मैं किसी भी सूरज को
नहीं डूबने दूँगा।

(1) इन पंक्तियों में कवि का निश्चय प्रकट होता है कि वह - (1)

(क) पहाड़ी क्षेत्र में जाकर रहेगा
(ख) अपने लक्ष्य को पाकर रहेगा
(ग) प्रकृति के उपादानों से प्रेरित है
(घ) जीवन की उहापोह में उलझा है

(2) कवि का तैयार होना दर्शाता है कि वह - (1)

(क) शारीरिक एवं मानसिक रूप से तैयार है।
(ख) दुनिया से लड़ने का साहस रखता है।
(ग) नकारात्मक प्रभाव से बचाव चाहता है।
(घ) निरंतर कर्मरत एवं उपेक्षित रहता है।

(3) ‘घबराओ मत, मैं क्षितिज पर जा रहा हूँ।’ पंक्ति का भाव है - (1)

(क) पाठक के लिए सहृदयता
(ख) सूर्य के लिए अटूट श्रद्धा
(ग) पर्वतारोहण के लिए प्रयासरत
(घ) प्राप्य को पाने के लिए सावधान

(4) सूरज द्वारा लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि एवं प्रकाश का आगमन होता है। यह कथन दर्शाता है कि सूरज है - (1)

(क) चित्रात्मक
(ख) प्रतीकात्मक
(ग) प्रयोगात्मक
(घ) वर्णनात्मक

(5) ‘सूरज जाएगा भी तो कहाँ उसे यहीं रहना होगा।’ कथन दर्शाता है - (1)

(क) विवशता
(ख) स्थायित्व
(ग) आत्मबोध
(घ) दृढ़निश्चय

(6) कविता का संदेश क्या है? (1)

(क) अनुकूल परिस्थितियों में स्थिरता रखना
(ख) प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना
(ग) उद्देश्य प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्पित रहना
(घ) सूर्यास्त से पूर्व कार्यों का समापन करना

(7) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए - (1)

कथन (A): तुम जो साहस की मूर्ति हो, तुम जो धरती का सुख हो।

कारण (R): कवि स्वयं को साहस की मूर्ति मानता है, जो धरती के जीवों के लिए सुखद परिस्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।

(8) कवि के संबंध में इनमें से सही है कि वह - (1)

(क) सत्य की खोज करता है
(ख) भावुक प्रवृत्ति का है
(ग) लघुता का जानकार है
(घ) अदम्य साहस का धनी है


निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प-चयन द्वारा दीजिए।

चिड़िया को लाख समझाओ
कि पिंजड़े के बाहर
धरती बड़ी है, निर्मम है,
वहाँ हवा में उसे
बाहर जाने का टोटा है
यहाँ चुग्गा मोटा है।
बाहर बहेलिये का डर है
यहाँ निर्भय कंठ स्वर है।
फिर भी चिड़िया मुक्ति का गाना गाएगी,
अपने जिस्म की गंध तक नहीं मिलेगी।

यूँ तो बाहर समुद्र है, नदी है, झरना है,
पर पानी के लिए भटकना है,
यहाँ कटोरी में भरा जल गटकना है।
मारे जाने की आशंका से भरे होने पर भी
पिंजड़े से जितना अंग निकल सकेगा निकालेगी,
हर सू ज़ोर लगाएगी,
और पिंजरा टूट जाने या खुल जाने पर उड़ जाएगी।

(i) पिंजड़े के भीतर चिड़िया को क्या-क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं? (1)

(क) खाने की स्वतंत्रता, सम्मान और स्नेह
(ख) नीर, कनक, आवास और सुरक्षा
(ग) प्यार, पुरस्कार, भोजन और हवा
(घ) निश्चितता, निर्भयता, नियम और नीरसता

(ii) बाहर सुखों का अभाव और प्राणों का संकट होने पर भी चिड़िया मुक्ति ही क्यों चाहती है? (1)

(क) वह अपने परिवार से मिलना चाहती है।
(ख) वह आज़ाद जीवन जीना पसंद करती है।
(ग) वह जीवन से मुक्ति चाहती है।
(घ) वह लंबी उड़ान भरना चाहती है।

(iii) चिड़िया के समक्ष धरती को निर्मम बताने का मंतव्य है - (1)

(क) भयावह स्थिति उत्पन्न करना
(ख) छोटे जीव के प्रति दया भाव
(ग) बहेलिये से बचाव की प्रेरणा
(घ) जीवनोपयोगी वस्तुएँ जुटाने का संघर्ष दर्शाना

(iv) पद्यांश का मूल प्रतिपाद्य क्या है? (1)

(क) पिंजरे में रखने वालों को सही राह दिखाना
(ख) पिंजरे के भीतर और बाहर की दुनिया दिखाना
(ग) पिंजरे के पक्षी की उड़ान और दर्द से परिचित कराना
(घ) पिंजरे के पक्षी के माध्यम से स्वतंत्रता का महत्त्व बताना

(v) कवि के संबंध में इनमें से सही है कि वह - (1)

(क) प्रकृति के प्रति सचेत हैं
(ख) चिड़िया की सुरक्षा चाहते हैं
(ग) आज़ादी के समर्थक हैं
(घ) अन्न-जल की उपयोगिता बताते हैं


निम्‍नलिखित अपठित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

निर्मम कुम्‍हार की थापी से कितने रूपों में कुटी-पिटी,
हर बार बिखेरी गई किंतु मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी ।
आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़कर छल जाए,
सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमके तो ढल जाए,
यों तो बच्चों की गुड़िया-सी भोली मिट्टी की हस्‍ती क्‍या,
आँधी आए तो उड़ जाए, पानी बरसे तो गल जाए,

(१)  संजाल पूर्ण कीजिए :

(२) विधान के सामने सही अथवा गलत लिखिए :

१. हवा के आने से मिट्टी गल जाती है । - ______
२. पानी बरसने से मिट्टी उड़ जाती है । - ______
३. सूरज के दमकने पर मिट्टी ढल जाती है । - ______
४. मिट्टी कभी-कभी बिखर जाती है । - ______

(३) पद्य की प्रथम चार पंक्‍तियों का भावार्थ लिखिए ।


निम्नलिखित पद्यांश में से बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-

भले ही अँधेरा घिरे हर दिशा से,
मगर हम नया भोर लाकर रहेंगे।
घृणा-स्वार्थ के इस कठिन संक्रमण में,
सुनो हम नया दौर लाकर रहेंगे।
प्रगति और विज्ञान का नाम लेकर,
मनुज को मनुज आज ठगने लगे हैं।
नई आर्थिक दौड़ की रोशनी में,
हमें मूल्य सब झूठ लगने लगे हैं।
मगर बात इतनी सुनो विश्व वालो,
इसी रोशनी में कभी हम बहेंगे।

जरा भी उचित और अनुचित नहीं कुछ।
सुनो इस कदर स्वार्थ टकरा रहे हैं,
पतन की नहीं और सीमा रही कुछ।
मगर हम उठेंगे प्रलय मेघ बनकर,
कठिन दुर्ग पाखण्ड के सब ढहेंगे।
बताना हमें सत्य सारे जगत को,
जगाना हमें सुप्त इंसानियत को।
करेगा ज़माना सदा गर्व हम पर,
हमें खोजना एकता के अमृत को।
भले ही किसी राह जाए जमाना,
मगर हम सही राह थामे रहेंगे।

  1. कवि को विश्वास है कि-
    1. वह अंधकार को उजाले में बदलेगा।
    2. वह पुराने को नए में बदलेगा।
    3. वह रात को शाम में बदलेगा।
    4. वह दुःख को सुख में बदलेगा।
  2. जीवन-मूल्यों के कमज़ोर पड़ने का कारण है-
    1. अंधी दौड़।
    2. वैज्ञानिक दौड़।
    3. विदेश की दौड़।
    4. आर्थिक दौड़।
  3. भारत की किस विशेषता पर पूरा विश्व गर्व करेगा?
    1. अहिंसक प्रवृत्ति
    2. वैज्ञानिक प्रगति
    3. ऐतिहासिक ज्ञान
    4. एकता की भावना
  4. 'किसी का अंधानुकरण न करके अपने लिए सही मार्ग का चयन करेंगे'- यह भाव कविता की किन पंक्तियों में आया है?
    1. भले ही अँधेरा घिरे हर दिशा से,
      मगर हम नया भोर लाकर रहेंगे।
    2. घृणा-स्वार्थ के इस कठिन संक्रमण में,
      सुनो हम नया दौर लाकर रहेंगे।
    3. भले ही किसी राह जाए जमाना,
      मगर हम सही राह थामे रहेंगे।
    4. मगर बात इतनी सुनो विश्व वालो,
      इसी रोशनी में कभी हम बहेंगे।
  5. “कठिन दुर्ग पाखण्ड के सब ढहेंगे'- काव्य पंक्ति का आशय है-
    1. समाज से भेदभाव का नाश होगा। 
    2. लोगों में स्वार्थ भावना का अंत होगा।
    3. समाज से आडंबरों का नाश होगा।
    4. अंधविश्वास रूपी किलों का पतन होगा।

निम्नलिखित पद्यांश में से बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए-

सुनता हूँ, मैंने भी देखा,
काले बादल में रहती चाँदी की रेखा।
काले बादल जाति द्वेष के,
काले बादल विश्व क्लेश के,
काले बादल उठते पथ पर
नव स्वंतत्रता के प्रवेश के!
सुनता आया हूँ, है देखा,
काले बादल में हँसती चाँदी की रेखा!
आज दिशा है घोर अँधेरी
नभ में गरज रही रणभेरी,
चमक रही चपला क्षण-क्षण पर
झनक रही झिल्ली झन-झन कर,
नाच-नाच आँगन में गाते केकी-केका
काले बादल में लहरी चाँदी की रेखा!

  1. 'काले बादल' और 'चाँदी की रेखा' किनका प्रतीक हैं? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए नीचे दिए प्रतीकों को पढ़कर उचित विकल्प का चयनकर लिखिए।
    (a) विपत्तियाँ
    (b) कालिमा
    (c) आशा की किरण
    (d) बिजली
    विकल्प-
    I. (a, b)
    II. (c, d)
    III. (a, c)
    IV. (b, d)
  2.  स्वतंत्रता प्राप्ति के मार्ग में किस प्रकार के बादल छाए हुए हैं? नीचे दिए गए कारकों को पढ़कर इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कर लिखिए।
    (a) जाति द्वेष के
    (b) घनघोर-घटाओं के
    (c) परस्पर वैमनस्य के
    (d) वैश्विक अशांति के
    विकल्प-
    I. (a, b)
    II. (b, c)
    III. (c, d)
    IV. (a, d)
  3. कैसे वातावरण में आशा की किरण छिप जाती है? नीचे दिए कारकों को पढ़कर इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए उचित विकल्प का चयन कर लिखिए।
    (a) जब तेज वर्षा हो
    (b) जब मन निराशा से भयभीत हो
    (c) जब षड्यंत्र रचे जा रहे हों
    (d) जब बादल न छाए हों
    विकल्प-
    I. (a, b)
    II. (b, c)
    III. (c, d)
    IV. (a, d)

  4. मोर-मोरनी द्वारा आँगन में नृत्य प्रस्तुत करने से क्या अभिप्राय है?
    1. उन दोनों का प्रसन्न होकर नृत्य करना।
    2. निराशा के बादल छँटने लगे, खुशियों ने दस्तक दे दी है।
    3. दोनों नृत्य कर बादलों को बरसने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
    4. मोर सुहावने मौसम का आनंद ले रहे हैं। 
  5. 'चाँदी की रेखा' को 'सोने की रेखा' में कब बदला जा सकता है?

    1. देश-जातियों की एकता होने पर 
    2. काले बादलों के दूर होने पर
    3. बादलों में सूर्य के छिपने पर
    4. मृत्यु से भयभीत न होने पर

निम्नलिखित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पी/वस्तूपरक प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए।

हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं।
भरी थकन में सोते फिर भी -
उठते बड़े सवेरे हैं।।

धरती की सेवा करते हैं
कभी न मेहनत से डरते हैं
लू हो चाहे ठंड सयानी
चाहे झर-झर बरसे पानी
ये तो मौसम हैं हमने
तूफ़ानों के मुँह फेरे हैं।

खेत लगे हैं अपने घर से
हमको गरज नहीं दफ़्तर से
दूर शहर से रहने वाले
सीधे-सादे, भोले-भाले
रखवाले अपने खेतों के
जिनमें बीज बिखेरे हैं।

हाथों में लेकर हल-हँसिया
गाते नई फ़सल के रसिया
धरती को साड़ी पहनाते
दूर-दूर तक भूख मिटाते
मुट्ठी पर दानों को रखकर
कहते हैं बहुतेरे हैं

हम धरती के बेटे बड़े कमेंरे हैं।
भरी थकन में सोते फिर भी -
उठते बड़े सवेरे हैं।।

  1. 'हम धरती के बेटे बड़े कमेरे हैं!' से आशय है -
    A. हम धरती के बहुत परिश्रमी बेटे हैं।
    B. हम धरती के बहुत आलसी बेटे हैं।
    C. हम धरती के बहुत बुद्धिमान बेटे हैं।
    D. हम धरती के बहुत अज्ञानी बेटे हैं।
  2. कवि ने किसानों को 'फसलों का रसिया' कहा है क्योंकि वे -
    A. किसान फसलों को उगाते हैं
    B. किसान फसलों को काटते है।
    C. किसान फसलों से प्रेम करते हैं।
    D. किसान फसलों को बेच देते हैं।
  3. किसान 'धरती की सेवा' ______ करते हैं।
    A. खेतों में फसल उगाकर
    B. सर्दी, गर्मी, बरसात सहकर
    C. बिना विश्राम परिश्रम कर
    D. खेतों के पास घर बनाकर
  4. कथन (A) और कारण (R) पर विचार करते हुए सही विकल्प चुनिए:
    कथन (A): हमारे घर खेतों के पास स्थित होते हैं।
    कारण (R): हमारे घर शहरों से दूर होते हैं।
    A. कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
    B. कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
    C. कथन (A) व (R) सही हैं और कथन (A), (R) की सही व्याख्या है।
    D. कथन (A) व (R) सही हैं और कथन (A), (R) की सही व्याख्या नहीं है।
  5. 'हम किसानों ने धरती को फसलों के आवरण से ढक दिया है।' निम्नलिखित किस पंक्ति का यह आशय है -
    A. तूफानों के मुँह फेरे हैं
    B. रखवाले अपने खेतों के
    C. धरती को साड़ी पहनाते
    D. दूर-दूर तक भूख मिटाते

निम्नलिखित पद्यांश में से बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -

सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं
न चंद्रमा की ठंडक में
लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है
कि दुनिया में
करूणा की कमी पड़ गई है
इतनी कम पड़ गई है करुणा कि बर्फ़ पिघल नहीं रही
नदियाँ बह नहीं रहीं झरने झर नहीं रहे
चिड़ियाँ गा नहीं रहीं गायें रँभा नहीं रहीं
कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं
कि आदमी उसमें अपना चेहरा देख सके
और उसमें तैरते बादल के टुकड़े से धो-पोंछ सके

दरअसल पानी से होकर देखो
तभी दुनिया पानीदार रहती है
उसमें पानी के गुण समा जाते हैं
वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है
पता नहीं
आने वाले लोगों को दुनिया कैसी चाहिए
कैसी हवा कैसा पानी चाहिए
पर इतना तो तय है
कि इस समय दुनिया को
ढेर सारी करुणा चाहिए। 

  1. 'दुनिया में करुणा की कमी पड़ गई है' - पंक्ति का आशय है -

    1. वातावरण में शीतलता नहीं है।
    2. जल की निर्मलता समाप्त हो गई है।
    3. लोगों में संवेदना समाप्त हो गई है।
    4. लोगों में क्रूरता बढ़ गई है।
  2. 'करुणा कि बर्फ पिघल नहीं रही' - पंक्ति में 'बर्फ़ पिघल नहीं रही' का क्या अभिप्राय है?
    1. लोग स्वार्थ में आत्मकेन्द्रित हो गए हैं।
    2. लोग दूसरों के दुःखों से द्रवीभूत नहीं हो रहे हैं।
    3. लोगों के हदय की पवित्रता समाप्त हो गई है।
    4. लोग एक-दूसरे से सहमत नहीं हो रहे हैं।
  3. 'दूसरों के दुःख-दर्द के प्रति सहानुभूति दिखाने वाले लोग नहीं हैं' - इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है -
    1. कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं।
    2. सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं।
    3. लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है।
    4. वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है।
  4. 'सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं, न चंद्रमा की ठंडक में' - पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं -
    1. सूर्य की ऊर्जा में गर्मी की कमी नहीं है।
    2. चंद्रमा की चाँदनी में कोई कमी नहीं है।
    3. सूर्य और चंद्रमा के दैनिक क्रिया-कलापों में कोई परिवर्तन नहीं है?
    4. प्राकृतिक उपादानों में सहज करुणा की भावना है।
  5. इस समय समस्त विश्व को आवश्यकता है -
    1. स्वच्छ हवा 
    2. स्वच्छ पानी
    3. परोपकार
    4. करुणा

निम्नलिखित पद्यांश में से बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -

दरवाज़े से बाहर जाने से पहले
अपने जूतों के तस्मे बाँधने के लिए मैं झुकता हूँ
रोटी का कौर तोड़ने और खाने के लिए
झुकता हूँ अपनी थाली पर
जेब से अचानक गिर गई कलम या सिक्के को उठाने को
झुकता हूँ
झुकता हूँ लेकिन उस तरह नहीं
जैसे एक चापलूस की आत्मा झुकती है
किसी शक्तिशाली के सामने
जैसे लज्जित या अपमानित होकर झुकती हैं आँखें

झुकता हूँ
जैसे शब्दों को पढ़ने के लिए आँखें झुकती हैं
ताकत और अधीनता की भाषा से बाहर भी होते हैं
शब्दों और क्रियाओं के कई अर्थ
झुकता हूँ
जैसे घुटना हमेशा पेट की तरफ़ ही मुड़ता है
यह कथन सिर्फ़ शरीर के नैसर्गिक गुणों
या अवगुणों को ही व्यक्त नहीं करता
कहावतें अर्थ से ज़्यादा अभिप्राय में निवास करती हैं।

  1. किस तरह झुकना जीवन के सामान्य कार्य व्यवहार का हिस्सा नहीं है?
    1. जूते के फीते बाँधने के लिए झुकना। 
    2. खाने का कौर उठाने के लिए झुकना।
    3. ताकतवर के सामने सिर का झुकाना। 
    4. किसी गिरी वस्तु को उठाने के लिए झुकना।
  2. 'चापलूस की आत्मा' के झुकने से आप क्या समझते हैं? 
    1. किसी अधिकार सम्पन्न की खुशामद करने वाला व्यक्ति और उसकी आदतें। 
    2. अपने लाभ के लिए खुशामद करने वाले द्वारा आत्म-सम्मान को छोड़ दिया जाना।
    3. एक सत्ता सम्पन्न व्यक्ति द्वारा मज़बूर व्यक्तियों का लाभ उठाना।
    4. खुशामद पसंद व्यक्ति और उसके अनुयायियों का समूचा कार्य व्यवहार।
  3. शब्दों को पढ़ने के लिए आँखों के झुकने में किस प्रकार का भाव है?
    1. विनम्रता
    2. लज्जा
    3. अपमान
    4. आत्मालोचन
  4. "ताकत और अधीनता की भाषा से बाहर भी होते हैं शब्दों और क्रियाओं के कई अर्थ" पद्यांश के इस कथन का क्या आशय है? निम्नलिखित कथनों को पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए -
    (क) शब्दों और क्रियाओं के अर्थ समाज की सत्ता-संरचना द्वारा ही तय होते हैं।
    (ख) शब्दों और क्रियाओं को बरतना मनुष्य की चेतना के अधीन है।(ग) हम चाहें तो कोई भी हमें वैसा करने को बाध्य नहीं कर सकता जिससे लज्जित एवं अपमानित होना पड़े।
    1. सिर्फ (क) 
    2. सिर्फ (ख)
    3. (क) और (ग)
    4. (ख) और (ग) 
  5. इस कविता में प्रयुक्त 'अर्थ' एवं 'अभिप्राय' का तात्पर्य क्या है?
    1. अर्थ - मतलब; अभिप्राय - नीयत
    2. अर्थ - नीयत; अभिप्राय - मतलब
    3. अर्थ - आशय; अभिप्राय - लक्ष्य
    4. अर्थ - तात्पर्य; अभिप्राय - मंसूबा

दिए गए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:

कुश्ती कोई भी लड़े
ढोल बजाता है सिमरू ही
जिसके सधे हाथ
भर देते हैं जोश पूरे दंगल में
उछलने लगती है मिट्टी पूरे अखाड़े की
ताक धिना-धिन... ताक धिना-धिन
झाँकने लगते हैं लोग
एक-दूसरे के कन्धों के ऊपर से
उचक-उचक कर

बहुत गहरा है रिश्ता
सिमरू और ढोल का-
जैसे साँस और धड़कन का

ढोल ख़ामोश है
तो ख़ामोश है
अखाड़े की माटी

ख़ामोश ढोल को
जगाएँगे हाथ सिमरू के
ढोल बजेगा
जागेगा अखाड़ा
जागेगी माटी अखाड़े की
माटी ही तो है
जो स्वीकारती है सभी को
अच्छे हों या बुरे
हर रूप में!

  1. ढोल बजाता है सिमरू ही - पंक्ति में 'ही' क्या इंगित करता है?   1
    1. आदत
    2. महत्त्व
    3. आडंबर
    4. प्रेम
  2. कुश्ती में जोश कब भर आता है?   1
    1. जब हारता हुआ पहलवान जीतने लगता है।
    2. जब दोनों पहलवान बराबर की टक्कर वाले होते है।
    3. जब फ़ाइनल कुश्ती द्वारा राष्ट्रीय विजेता तय होता है।
    4. जब सिमरू द्वारा ढ़ोल बजाया जाता है।
  3. माटी द्वारा अच्छे-बुरे को स्वीकारने का क्या तात्पर्य है?   1
    1. माटी सबको जीतने का समान अवसर देती है।
    2. माटी का न्याय सबको स्वीकार्य होता है।
    3. अंत में अच्छे-बुरे सभी माटी में मिल जाते हैं।
    4. माटी की गोद में अच्छे-बुरे सभी पलते हैं।
  4. ढोल तथा अखाड़े की माटी में क्या समानता बताई गई है?   1
    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
    कथन (I): दोनों को उपयोग करने से पहले तैयार करना होता है।
    कथन (II): दोनों में श्रम की आवश्यकता होती है।
    कथन (III): दोनों का प्रयोग कर लोग अपनी कला सिद्ध करते है।
    कथन (IV): दोनों की परिवर्तन में भूमिका होती है।
    निम्नलिखित विकल्पों पर विचार कीजिए तथा सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    विकल्प:
    1. केवल कथन (III) सही है।
    2. केवल कथन (IV) सही है।
    3. केवल कथन (II) और (III) सही हैं।
    4. केवल कथन (I) और (IV) सही हैं।
  5. कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।   1
      कॉलम 1   कॉलम 2
    1 सिमरू (i) श्रमजीवी वर्ग
    2 ढोल (ii) सामाजिक भूमि
    3 अखाड़ा (iii) परिश्रम

    1. 1 - (iii), 2 - (i), 3 - (ii)
    2. 1 - (i), 2 - (iii), 3 - (ii)
    3. 1 - (i), 2 - (ii), 3 - (iii)
    4. 1 - (ii), 2 - (i), 3 - (iii)

दिए गए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:

हम जंग न होने देंगे!
विश्व शांति के हम साधक हैं, जंग न होने देंगे!

कभी न खेतों में फिर खूनी खाद फलेगी,
खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,
आसमान फिर कभी न अंगारे उगलेगा,
एटम से नागासाकी फिर नहीं जलेगी,

युद्धविहीन विश्व का सपना भंग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।

हथियारों के ढेरों पर जिनका है डेरा,
मुँह में शांति, बगल में बम, धोखे का फेरा,
कफन बेचने वालों से कह दो चिल्लाकर,
दुनिया जान गई है उनका असली चेहरा,
कामयाब हो उनकी चालें, ढंग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।

हमें चाहिए शांति, जिंदगी हमको प्यारी,
हमें चाहिए शांति, सृजन की है तैयारी,
हमने छेड़ी जंग भूख से, बीमारी से,
आगे आकर हाथ बटाए दुनिया सारी।
हरी-भरी धरती को खूनी रंग न लेने देंगे
जंग न होने देंगे।

(क) इस कविता के केन्द्रीय भाव हेतु दिए गए कथनों को पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए -  (1)

कथन

  1. आंतरिक वैमनस्य को विस्मृत करना
  2. विश्व-शांति के मार्ग पर अग्रसर होना
  3. युद्ध की नई तकनीकों पर विचार करना
  4. एटम-बम से ऐतिहासिक परचम लहराना

विकल्प -

  1. कथन 1 व 2 सही है।
  2. कथन 1, 2, 3 व 4 सही है।
  3. कथन 1 व 4 सही है।
  4. कथन 1 व 3 सही है।

(ख) 'खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,' प्रस्तुत पंक्ति में मौत की फसल से तात्पर्य है -   (1)

  1. युद्ध के कारण किसानों की मेहनत विफल नहीं होगी।
  2. प्रकृति का विनाश नहीं होगा।
  3. युद्ध अपार जन-हानि का कारण नहीं बनेगा।
  4. हरित सौन्दर्य रक्ताभ रूप में नहीं दिखेगा।

(ग) 'मुँह में शांति, बशल में बम, धोखे का फेरा' रेखांकित वाक्यांश के भाव को स्पष्ट कीजिए -    (1)

  1. छोटा मुँह बड़ी बात
  2. मुँह में राम बगल में छुरी
  3. बारूद की पुड़िया होना
  4. दिल छोटा करना

(घ) अपनी आँखों में कवि ने दुनिया का सपना सँजोया है -   (1)

  1. जहाँ युद्ध मात्र विकल्प हो
  2. जहाँ सर्वत्र शांति बयार चल रही हो
  3. हथियारों के ढेरों पर डेरा जमाना है
  4. हरी-भरी धरा का सपना

(ड) 'कफन बेचने वाले' कहकर कवि की लेखनी उद्घाटित करना चाह रही है -   (1)

  1.  वे मुल्क जो हथियारों की खरीद-फ़रोख्त करते हैं। 
  2. वे मुल्क जो कफन बेचने वालों को ललकार रहे हैं।
  3. वे मुल्क जो विश्व-शांति के लिए हथियारों की खरीद-फ़रोख्त करते हैं।
  4. वे मुल्क जो अन्य मुल्कों को गुलाम बनाना चाहते हैं।

(च) 'आसमान फिर न अँगारे उगलेगा' पंक्ति में अँगारे उगलने का तात्पर्य है -   (1)

  1. परमाणु परीक्षण पर पाबंदी से
  2. सौरमंडल में सूर्य की दशा परिवर्तन से
  3. परमाणु विस्फोट करने से
  4. भुखमरी के कारण मृत्युदर में वृद्धि

(छ) नागासाकी फिर नहीं जलेगी के माध्यम से कवि का अभिप्राय है -   (1)

  1. विश्व-शांति को विस्तारित करना
  2. हिरोशिमा नागासाकी को याद करना
  3. विश्व को अस्तर-शस्त्र रहित बनाना
  4. संसार में अस्त्र-शस्त्र का प्रचार-प्रसार करना

(ज) कवि ने किसके विरुद्ध रण की तान छेड़ रखी है -   (1)

  1. खेत-खलिहान खाद के विरुद्ध
  2. नव-सृजन की बात कहने के लिए
  3. निर्धनता व भुखमरी को संघर्षहीन बनाने के लिए
  4. हरित धरा को लहूलुहान होने से बचाने के लिए

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