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निम्नलिखित पद्यांश में से बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए - सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहींन चंद्रमा की ठंडक मेंलेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है

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Question

निम्नलिखित पद्यांश में से बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -

सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं
न चंद्रमा की ठंडक में
लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है
कि दुनिया में
करूणा की कमी पड़ गई है
इतनी कम पड़ गई है करुणा कि बर्फ़ पिघल नहीं रही
नदियाँ बह नहीं रहीं झरने झर नहीं रहे
चिड़ियाँ गा नहीं रहीं गायें रँभा नहीं रहीं
कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं
कि आदमी उसमें अपना चेहरा देख सके
और उसमें तैरते बादल के टुकड़े से धो-पोंछ सके

दरअसल पानी से होकर देखो
तभी दुनिया पानीदार रहती है
उसमें पानी के गुण समा जाते हैं
वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है
पता नहीं
आने वाले लोगों को दुनिया कैसी चाहिए
कैसी हवा कैसा पानी चाहिए
पर इतना तो तय है
कि इस समय दुनिया को
ढेर सारी करुणा चाहिए। 

  1. 'दुनिया में करुणा की कमी पड़ गई है' - पंक्ति का आशय है -

    1. वातावरण में शीतलता नहीं है।
    2. जल की निर्मलता समाप्त हो गई है।
    3. लोगों में संवेदना समाप्त हो गई है।
    4. लोगों में क्रूरता बढ़ गई है।
  2. 'करुणा कि बर्फ पिघल नहीं रही' - पंक्ति में 'बर्फ़ पिघल नहीं रही' का क्या अभिप्राय है?
    1. लोग स्वार्थ में आत्मकेन्द्रित हो गए हैं।
    2. लोग दूसरों के दुःखों से द्रवीभूत नहीं हो रहे हैं।
    3. लोगों के हदय की पवित्रता समाप्त हो गई है।
    4. लोग एक-दूसरे से सहमत नहीं हो रहे हैं।
  3. 'दूसरों के दुःख-दर्द के प्रति सहानुभूति दिखाने वाले लोग नहीं हैं' - इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है -
    1. कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं।
    2. सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं।
    3. लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है।
    4. वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है।
  4. 'सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं, न चंद्रमा की ठंडक में' - पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं -
    1. सूर्य की ऊर्जा में गर्मी की कमी नहीं है।
    2. चंद्रमा की चाँदनी में कोई कमी नहीं है।
    3. सूर्य और चंद्रमा के दैनिक क्रिया-कलापों में कोई परिवर्तन नहीं है?
    4. प्राकृतिक उपादानों में सहज करुणा की भावना है।
  5. इस समय समस्त विश्व को आवश्यकता है -
    1. स्वच्छ हवा 
    2. स्वच्छ पानी
    3. परोपकार
    4. करुणा
Answer in Brief
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Solution

  1. लोगों में संवेदना समाप्त हो गई है।
  2. लोग दूसरों के दुःखों से द्रवीभूत नहीं हो रहे हैं।
  3. कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं।
  4. प्राकृतिक उपादानों में सहज करुणा की भावना है।
  5. करुणा
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अपठित पद्यांश
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