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प्रश्न
निम्नलिखित पद्यांश में से बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए -
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सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं दरअसल पानी से होकर देखो |
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'दुनिया में करुणा की कमी पड़ गई है' - पंक्ति का आशय है -
- वातावरण में शीतलता नहीं है।
- जल की निर्मलता समाप्त हो गई है।
- लोगों में संवेदना समाप्त हो गई है।
- लोगों में क्रूरता बढ़ गई है।
- 'करुणा कि बर्फ पिघल नहीं रही' - पंक्ति में 'बर्फ़ पिघल नहीं रही' का क्या अभिप्राय है?
- लोग स्वार्थ में आत्मकेन्द्रित हो गए हैं।
- लोग दूसरों के दुःखों से द्रवीभूत नहीं हो रहे हैं।
- लोगों के हदय की पवित्रता समाप्त हो गई है।
- लोग एक-दूसरे से सहमत नहीं हो रहे हैं।
- 'दूसरों के दुःख-दर्द के प्रति सहानुभूति दिखाने वाले लोग नहीं हैं' - इस भाव को व्यक्त करने वाली पंक्ति है -
- कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं।
- सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं।
- लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है।
- वरना कोरी आँखों से कौन कितना देख पाता है।
- 'सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं, न चंद्रमा की ठंडक में' - पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं -
- सूर्य की ऊर्जा में गर्मी की कमी नहीं है।
- चंद्रमा की चाँदनी में कोई कमी नहीं है।
- सूर्य और चंद्रमा के दैनिक क्रिया-कलापों में कोई परिवर्तन नहीं है?
- प्राकृतिक उपादानों में सहज करुणा की भावना है।
- इस समय समस्त विश्व को आवश्यकता है -
- स्वच्छ हवा
- स्वच्छ पानी
- परोपकार
- करुणा
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उत्तर
- लोगों में संवेदना समाप्त हो गई है।
- लोग दूसरों के दुःखों से द्रवीभूत नहीं हो रहे हैं।
- कहीं पानी का कोई ऐसा पारदर्शी टुकड़ा नहीं।
- प्राकृतिक उपादानों में सहज करुणा की भावना है।
- करुणा
