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Question
उदाहरणानुसारं लिखत –
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| शाखा | तृतीया | शाखाया | शाखाभ्याम् | शाखाभिः |
| लता | ______ | ______ | ______ | ______ |
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Solution
| शब्दः | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| शाखा | तृतीया | शाखाया | शाखाभ्याम् | शाखाभिः |
| लता | तृतीया | लतया | लताभ्याम् | लताभिः |
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उदाहरणानुसारं सार्थक पदं लिखत –
| क | दा | चि | त |
उदाहरणानुसारं लिखित –
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| शाखा | द्वितीया | शाखाम् | शाखे | शाखाः |
| लता | ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखित –
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| पत्र | द्वितीया | पत्रम् | पत्रे | पत्राणि |
| फल | ______ | ______ | ______ | ______ |
उचितपदेन रिक्तस्थानानि पूरयत –
विद्यालस्य विद्यालयत्वं ______ भवति।
उचितपदेन रिक्तस्थानानि पूरयत –
रङ्गशालायः शोभा ______ भवति।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ किं प्रयोजनम्।
कोष्ठकप्रदत्तपदैः सह उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत –
______ ते चिरकालात् पंक्तौ तिष्ठन्ति। (आहार)
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
सूद: ______ पाकाशाला गच्छित।
चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि स्थूलरेखया चिह्नतानि कुरुत पृथक्तया लिखत च –
ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय।
पंचमीविभक्तियुक्तपदं उदाहरणानुसारं चिह्नितं कुरुत –
यथा- काष्ठात् अग्निः जायते मध्यमानात्।
कोटः अपि सुमनः सङ्गात् आरोहित सतां शिरः।
पंचमीविभक्तियुक्तपदं उदाहरणानुसारं चिह्नितं कुरुत –
यथा-काष्ठात् अग्निः जायते मध्यमानात्।
सत्यात् अपि हितं वदेत्।
पंचमीविभक्तियुक्तपदं उदाहरणानुसारं चिह्नितं कुरुत –
यथा- काष्ठात् अग्निः जायते मध्यमानात्।
दोषक्षयोऽग्निवृद्धिश्च व्यायामादुपजायते।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत –
अद्य चिकित्सालयेषु ______ संख्या प्रतिदिनं वर्धते।
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते
आयुर्विद्या यशो बलम्।
| अभिवादनशीलस्य | वृद्धोपसेविनः |
| तस्य | |
उदाहरणानुसारं लिखत –
यथा-
| नर | ||
| नरस्य | नर्योः | नराणां |
| क्षमा | ||
| ______ | ______ | ______ |
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितान् कोष्ठकान् यथायोग्यपदैः पूरयत –
यथा- जन
| जने | जन्योः | जनेषु |
आत्मन्
| ______ | ______ | ______ |
उदाहरणमनुसृत्य अधोलिखितान् कोष्ठकान् यथायोग्यपदैः पूरयत –
यथा- जन
| जने | जन्योः | जनेषु |
क्षमा
| ______ | ______ | ______ |
सप्तमीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
परोक्षे कार्यहन्तारम्,
प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्ययेत् तादृशं मित्रम्,
विषकुम्भं पयोमुखम्॥

अधिकरणकारकं सप्तमीविभक्तिं च उपयुज्य प्रदत्तम् उदाहरणाम् अनुसृत्य पञ्च वाक्यानि लिखत।
उदाहरणम् –
1. जले मत्स्याः सन्तरन्ति।
2. लतायां पुष्पाणि सन्ति
