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Question
टिप्पणी लिखिए।
हेमाड़पंती शैली
Short/Brief Note
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Solution
मुख्य रूप से बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी में यादवों के कार्यकाल में महाराष्ट्र में हेमाड़पंती मंदिरों का निर्माण हुआ।
- हेमाड़पंती स्थापत्यशैली की यह मुख्य विशेषता थी कि दो पत्थरों के बीच की जगह में चूना अथवा मिट्टी नहीं भरी जाती थी। पत्थरों में बने छेद में चूल बिठाकर उन्हें एक-दूसरे से फँसाया जाता था और इस प्रकार दीवार तैयार की जाती थी।
- हेमाड़पंती मंदिरों की बनावट में मुख्य रूप से तारकाकृति निर्माण कार्य पाया जाता है।
- तारकाकृति मंदिरों की बाहरी दीवार अनेक कोणों में विभाजित होती हैं।
- इन पत्थरों की दीवारों पर उकेरे गए देवताओं के शिल्प पर्यटकों के आकर्षण केंद्र हैं। संपूर्ण महाराष्ट्र में हेमाड़पंती शैली के ये मंदिर तत्कालीन शिल्प तथा स्थापत्य कला का विकास दर्शाते हैं।
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