Advertisements
Advertisements
प्रश्न
टिप्पणी लिखिए।
हेमाड़पंती शैली
टिप्पणी लिखिए
Advertisements
उत्तर
मुख्य रूप से बारहवीं-तेरहवीं शताब्दी में यादवों के कार्यकाल में महाराष्ट्र में हेमाड़पंती मंदिरों का निर्माण हुआ।
- हेमाड़पंती स्थापत्यशैली की यह मुख्य विशेषता थी कि दो पत्थरों के बीच की जगह में चूना अथवा मिट्टी नहीं भरी जाती थी। पत्थरों में बने छेद में चूल बिठाकर उन्हें एक-दूसरे से फँसाया जाता था और इस प्रकार दीवार तैयार की जाती थी।
- हेमाड़पंती मंदिरों की बनावट में मुख्य रूप से तारकाकृति निर्माण कार्य पाया जाता है।
- तारकाकृति मंदिरों की बाहरी दीवार अनेक कोणों में विभाजित होती हैं।
- इन पत्थरों की दीवारों पर उकेरे गए देवताओं के शिल्प पर्यटकों के आकर्षण केंद्र हैं। संपूर्ण महाराष्ट्र में हेमाड़पंती शैली के ये मंदिर तत्कालीन शिल्प तथा स्थापत्य कला का विकास दर्शाते हैं।
shaalaa.com
भारत की दृश्य कला परंपरा
क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
मथुरा शिल्पशैली का उदय ______ के शासनकाल में हुआ।
निम्न से असत्य जोड़ी में सुधार कर पुनः लिखिए।
निम्न कथन को कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
कला के इतिहास का गहन अध्ययन करने वाले तज्ञों की आवश्यकता होती है।
निम्न कथन को कारणसहित स्पष्ट कीजिए।
चित्रकथी जैसी विलुप्त होती जा रही परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
निम्न सारिणी पूर्ण कीजिए।
| मंदिर स्थापत्य शैली | नागर | द्राविड़ | हेमाड़पंती |
| विशेषताएँ | |||
| उदाहरण |
भारत की मुस्लिम स्थापत्य शैली की सोदाहरण विशेषताएँ लिखिए।
नीचे दिए गए चित्र का निरीक्षण कीजिए और निम्न मुद्दों के आधार पर वारली चित्रकला के विषय में जानकारी लिखिए।

(अ) प्रकृति का चित्रण
(ब) मानवाकृतियों का आरेखन
(क) व्यवसाय
(ड) मकान
निम्न संकल्पना-चित्र को पूर्ण कीजिए:
