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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

निम्न सारिणी पूर्ण कीजिए। मंदिर स्थापत्य शैली नागर द्राविड़ हेमाड़पंती विशेषताएँ उदाहरण

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प्रश्न

निम्न सारिणी पूर्ण कीजिए।

मंदिर स्थापत्य शैली नागर द्राविड़ हेमाड़पंती
विशेषताएँ      
उदाहरण      
सारिणी
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उत्तर

मंदिर स्थापत्य शैली नागर द्राविड़ हेमाड़पंती

विशेषताएँ
(१) क्रमश: छोटे होते जाते शिखरों की प्रकृतियाँ ऊपर तक रची होती हैं। (१) मंदिरों के शिखर पिरामिड के आकार के होते हैं। (१) इस शैली के मंदिरों की बनावट वर्गाकार तथा तारकाकृति होती है।
(२) शिखरों की रचना नीचे से ऊपरी छोर तक खंडित होती है। (२) शिखरों की अपेक्षा गोपुर (मुख्य प्रवेशद्वार) बड़ा तथा भव्य होता है। (२) मंदिर की बनावट में चूने अथवा मिट्टी का उपयोग नहीं दिखाई देता।
(३) शिखर की मोटाई क्रमशः कम होती जाती है। (३) उस पर पौराणिक कथा चित्र उकेरे होते हैं।  
(४) शिखर कलाकार होता है।    
उदाहरण



(१) कंडारिया महादेव मंदिर, खजुराहो। (१) मदुरई का मीनाक्षी मंदिर। (१) सिन्नर का गोंदेश्वर मंदिर।
(२) भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर। (२) महाबलीपुरम का रथ मंदिर। (२) अमरनाथ का शिव मंदिर (अंब्रेश्वर)।
(३) कोणार्क का सूर्य मंदिर। (३) तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर। (३) खिद्रापुर का कोपेश्वर मंदिर।
(४) राजस्थान के आबू पहाड़ पर स्थित दिलवाड़ा मंदिर। (४) तिरुपति मंदिर। (४) हिंगोली जिले का औंढा नागनाथ मंदिर।
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अध्याय 1.4: भारतीय कलाओं का इतिहास - स्वाध्याय [पृष्ठ ३१]

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बालभारती Itihas aur rajneeti vigyan [Hindi] Standard 10 Maharashtra State Board
अध्याय 1.4 भारतीय कलाओं का इतिहास
स्वाध्याय | Q ४. | पृष्ठ ३१
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