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तीनू बाताँ सरसी’ के माध्यम से कवयित्री क्या कहना चाहती है? उसकी यह मनोकामना कैसे पूरी हुई ?

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Question

तीनू बाताँ सरसी’ के माध्यम से कवयित्री क्या कहना चाहती है? उसकी यह मनोकामना कैसे पूरी हुई ?

Short/Brief Note
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Solution

कवयित्री मीरा अपने प्रभु श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। वह श्रीकृष्ण की चाकरी करके उनका सामीप्य पाना चाहती थी। इस चाकरी से उन्हें अपने प्रभु के दर्शन मिल जाते। उनका नाम स्मरण करने से स्मरण रूपी जेब खर्च मिल जाता और भक्तिभाव रूपी जागीर उन्हें मिल जाती। उन्होंने अपनी इस मनोकामना की पूर्ति कृष्ण की अनन्य और भक्ति के माध्यम से पूरी की।

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पद
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Chapter 1.2: पद - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 1.2 पद
अतिरिक्त प्रश्न | Q 5

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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-

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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
बूढ़तो गजराज राख्योकाटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधरहरो म्हारी भीर।


काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
चाकरी में दरसण पास्यूँसुमरण पास्यूँ खरची।
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निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
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पद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -

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