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शीत प्रदेशों मे जलीय वनस्पतियाँ और जलचरों को जीवित रखने के लिए पानी के असंगत व्यवहार की भूमिका स्पष्ट कीजिए। - Science and Technology 1 [विज्ञान और प्रौद्योगिकी १]

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Question

शीत प्रदेशों मे जलीय वनस्पतियाँ और जलचरों को जीवित रखने के लिए पानी के असंगत व्यवहार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

Explain
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Solution 1

पानी के असंगत व्यवहार के कारण पानी का घनत्व 4°C तापमान पर महत्तम होता है। शीत प्रदशों में तालाबों में जब पानी का तापमान कम होने लगता है, उस समय 4°C तापमान वाला पानी तल में रहता है तथा उससे कम तापमान वाला पानी तथा उसके घनीभवन से बनी बर्फ सतह पर रहती है। पानी तथा बर्फ ऊष्मा का कुचालक होने के कारण तल में स्थित पानी पर बाहर की ठंडी का बहुत अधिक प्रभाव नहीं होता। इस कारण उस पानी में तालाब की जलीय वनस्पतियाँ तथा जलचर सुरक्षित रहते हैं।

 

शीत प्रदेशों के पानी में जलीय वनस्पति तथा जलचर 

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Solution 2

0°C तापमान के पानी को गर्म करने पर 4°C तक पहुँचने तक पानी सिकुड़ता नहीं है। 4°C पर पानी का आयतन सबसे कम होता है और 4°C से अधिक तापमान पर पानी का आयतन बढ़ने लगता है। 0°C से 4°C के बीच पानी का यह व्यवहार “पानी का असंगत व्यवहार” कहलाता है।

ठंडे क्षेत्रों में, जब वातावरण का तापमान 0°C से नीचे चला जाता है, तो पानी सिकुड़ता है और उसका घनत्व बढ़ता है। पानी का तापमान 4°C से कम होने पर असंगत व्यवहार के कारण पानी फैलता है और घनत्व कम हो जाता है।

  1. असंगत व्यवहार के कारण पानी का घनत्व 4°C पर अधिक होता है।
  2. ठंडे क्षेत्रों में तालाबों में जब पानी ठंडा होने लगता है, तो तल में 4°C वाला पानी रहता है और उसके ऊपर कम तापमान वाला पानी तथा बर्फ सतह पर रहती है।
  3. पानी और बर्फ की ऊपरी परत का ठंडा होना तल में पानी पर बाहरी ठंड का अधिक प्रभाव नहीं डालता। इस कारण वहाँ जलजीव और जलचर सुरक्षित रहते हैं।
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Notes

छात्रों को अपने प्रश्न और अपेक्षित अंकों के अनुसार उत्तर देखना चाहिए।

पानी का असंगत व्यवहार
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Chapter 5: ऊष्मा - स्वाध्याय [Page 71]

APPEARS IN

Balbharati Vigyaan aur Prodyogiki 1 [Hindi] Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 5 ऊष्मा
स्वाध्याय | Q 6. अ. | Page 71
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