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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 9th Standard

शब्‍द संपदा - शब्‍दों के लिंग, वचन, विलोमार्थक, समानार्थी, पर्यायवाची, शब्‍दयुग्‍म, अनेक शब्‍दों के लिए एक शब्‍द, भिन्नार्थक शब्‍द, कठिन शब्‍दों के अर्थ, विरामचिह्न, उपसर्ग-प्रत्‍यय पहचानना/अलग करना

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Question

शब्‍द संपदा -

शब्‍दों के लिंग, वचन, विलोमार्थक, समानार्थी, पर्यायवाची, शब्‍दयुग्‍म, अनेक शब्‍दों के लिए एक शब्‍द, भिन्नार्थक शब्‍द, कठिन शब्‍दों के अर्थ, विरामचिह्न, उपसर्ग-प्रत्‍यय पहचानना/अलग करना, लय-ताल युक्‍त शब्‍द ।

Long Answer
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Solution

  1. लिंग: संज्ञा के जिस रूप से किसी वस्तु की जाति (पुरुष अथवा स्त्री) का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं।
    लिंग के दो भेद हैं:
    1. पुल्लिंग: संज्ञा के जिस रूप से पुरुष जाति का बोध होता है, उसे पुल्लिंग कहते हैं।
      उदाहरण: 
      1. मेरा वजन बढ़ता ही जा रहा है।
      2. मैं वन में जाना चाहता हूँ।
    2. स्त्रीलिंग: संज्ञा के जिस रूप से स्त्री जाति का बोध होता है, उसे स्त्रीलिंग कहते हैं।
      उदाहरण: 
      1. एक कमरे में दो खटिया पड़ी थी।
      2. एक साल से हम उसकी तलाश कर रहे हैं।
  2. वचन: संज्ञा अथवा सर्वनाम के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि वह एक के लिए प्रयुक्त हुआ है अधवा एक से अधिक के लिए उसे वचन कहते हैं।
    वचन के दो भेद हैं:
    1. एकवचन: जिस शब्द के रूप से एक का बोध हों, उसे एकवचन कहते हैं।
      उदाहरण: 
      1. गाय घास खा रही है।
      2. लकड़ी टूट गई।
    2. बहुवचन: जिस शब्द के रूप से एक से अधिक का बोध हो, उस बहुबचन कहते है।
      उदाहरण: 
      1. वह मालाएँ खरीद रहा है।
      2.  कपड़े अभी सूख रहे हैं।
  3. विलोमार्थक शब्‍द: एक-दूसरे के विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्दों को, विलोमा शब्‍द कहते है अर्थात् जो शब्द किसी दूसरे शब्द का उल्टा अर्थ बताते हैं, उन्हें विलोम शब्द या विपरीतार्थक शब्द या विरुद्धार्थी शब्द कहते है।
    उदाहरण: कड़वा - मीठा, अल्पसंख्यक बहुसंख्यक, एकतंत्र - बहुतंत्र, अनुराग - विराग
  4. समानार्थी शब्‍द अथवा पर्यायवाची शब्‍द: किसी शब्द का समान अर्थ वाले दूसरे शब्द या उसी के समान कोई दूसरा नाम उसे समानार्थी शब्‍द अथवा पर्यायवाची शब्‍द कहते है।
    उदाहरण: अलंकार- आभूषण, अनादर - तिरस्कर, अंग- अंश, अग्नि- दहन
  5. शब्‍दयुग्‍म शब्‍द: किसी वाक्य में दो या दो से अधिक शब्दों का समूह होता है जो कि साथ में आकार, अर्थ या भाषा के आधार पर मिलकर एक पूर्ण अर्थ दर्शाते हैं।
    उदाहरण: शाक - सब्जी, नहाना - धोना, उठना - बैठना, मान - सम्मान
  6. अनेक शब्‍दों के लिए एक शब्‍द - हर भाषा में कुछ ऐसे शब्द होते हैं जिनके एक से अधिक अर्थ निकलते हैं। ये अलग-अलग अवसरों में, वाक्यों के साथ मिलकर अलग-अलग अर्थ देते हैं। ये शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं।
    उदाहरण: 
    1. औसत - बीच का, साधारण, दरमियानी
    2. कर्ण - कर्ण (नाम), कान
    3. कुंभ - घड़ा, एक राशि, हाथी का मस्तक
  7. भिन्नार्थक शब्‍द: ऐसे शब्द जो पढ़ने और सुनने में लगभग एक-से लगते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से भिन्न्न होते हैं, श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं। कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनमें स्वर, मात्रा अथवा व्यंजन में थोड़ा-सा अन्तर होता है। वे बोलचाल में लगभग एक जैसे लगते हैं, परन्तु उनके अर्थ में भिन्नता होती है।
    उदाहरण: 
    1. कोश - म्यान
      कोष - खजाना
    2. खोलना - बन्धनमुक्त करना
      खौलना - उबलना
  8. कठिन शब्‍दों के अर्थ: कठिन का तात्पर्य उन सभी चीजों के विपरीत है जो आसान है। कठिन का तात्पर्य उन बाधाओं की उपस्थिति से है जिन्हें पार करना है या पहेलियों को हल करना है और कौशल या साहस की आवश्यकता का सुझाव देता है। कठिन श्रमसाध्य और सतत परिश्रम की आवश्यकता पर बल देता है।
    उदाहरण: 
    1. क्लिष्ट = जटिल
    2. यत्किंचित = कुछ; थोड़ा सा; ज़रा सा।
    3. अट्टालिका = किसी उंच्ची इमारत का ऊपरी कक्ष या हिस्सा।
  9. विरामचिह्न: वाक्य पढ़ते समय कहाँ रुकना; कितना रुकना, वाक्य का भाव कैसे प्रकट करना इत्यादि बताने के लिए जिन विविध चिहनों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें विरामचिह्न कहते हैं।
    विरामचिहन निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:
    1. पूर्णविराम (.) - विधानात्मक वाक्य पूर्ण हुआ है यह दिखाने के लिए जिस चिहन का प्रयोग किया जाता है, उसे पूर्णविराम कहते हैं।
      उदाहरण: 
      1. उसने बताया नहीं कि वह कहाँ जा रहा है।
    2. अल्पविराम (,) - वाक्य बोलते समय बीच-बीच में ठहरने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, उसे अल्पविराम कहते हैं।उदाहरण: 
      1. राधे, तुम आज भी विद्यालय नहीं गयीं।
    3. अर्धविराम (;) - वाक्य में जब ठहराव अल्पविराम से अधिक और पूर्णविराम से कम हो तो अर्धविराम॑ का प्रयोग किया जाता है।
      उदाहरण: 
      1. उसने बताया नहीं कि वह कहाँ जा रहा है।
    4. प्रश्नवाचक चिहन (?) - प्रश्न पूछने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग किया जाता है, उसे प्रश्नवाचक चिह्न कहते हैं।
      उदाहरण: 
      1. उसकी पुस्तक किसने ली ?
      2. राम घर पर आया या नहीं ?
    5. विस्मयादिबोधक चिह्न (!) - वाक्य में हर्ष, शोक, विस्मय इत्यादि व्यक्त करने के लिए जिस चिह्न का प्रयोग कियां जाता है, उसे विस्मयादिबोधक चिह्न कहते हैं।
      उदाहरण: 
      1. हाय ! अब मैं क्या करूँ ?
      2. अरे ! तुम प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो गये।
    6. अवतरण चिह्न (””) - किसी के कहें वाक्य को ज्यों-का-त्यों व्यक्त करने के | लिए जिस चिहन का प्रयोग किया जाता है, उसे अवतरण चिह्न कहते हैं।
      1. इकहरा अवतरण चिह्न ('') - शीर्षक, पुस्तक, संस्था. का नामनिर्देश करते समय इकहरा अवतरण चिह्न ('') का प्रयोग किया जाता है।
        उदाहरण: रामधारीसिंह ‘दिनकर’ ओज के कवि हैं।
      2. दुहरा अवतरण चिह्न (””) - किसी के कथन को दिखाने के लिए दुहरा अवतरण चिह्न (””) का प्रयोग किया जाता है।
        उदाहरण: महावीर ने कहा, ‘‘अहिंसा परमोधर्मः।’’
    7. निर्देशक चिह्न (―) - जहाँ एक शब्द या शब्दों को दूसरे शब्दों से अलग किया जाता है तथा आगे किसी विशेष बात का उल्लेख किया जाता है, वहाँ निर्देशक चिह्न (-) का प्रयोग होता है।
      उदाहरण: मनसा ― बेटी,यदि तू जानती।
    8. योजक चिह्न (-) - दो शब्दों को युग्म बनाने के लिए या एक ही शब्द को दो या अधिक बार दुहराने पर योजक चिहन (-) का प्रयोग किया जाता है।
      उदाहरण: माता-पिता, प्रेम-सागर
    9. अपूर्णविराम (:) - संवाद-लेखन, एकांकी-लेखन या नाटक-लेखन में अपूर्णविराम का प्रयोग अधिक किया जाता है।
      उदाहरण: छोटा सवाल : बड़ा सवाल
  10. उपसर्ग पहचानना/अलग करना: वह अव्यय या शब्दांश, जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ बनाते हैं, उन्हें उपसर्ग कहा जाता है।
    उदाहरण: 
    1. प्र+हार = प्रहार
    2. आ+हार = आहार
  11. प्रत्‍यय पहचानना/अलग करना: जो शब्दांश शब्दों के अंत में विशेषता या परिवर्तन ला देते हैं, वे प्रत्यय कहलाते हैं।
    उदाहरण: 
    1. लेखक = लेख् + अक
    2. प्रत्यय = प्रति + अय
  12. लय-ताल युक्‍त शब्‍द: 
    उदाहरण: 
    1. हवा - रवा
    2. बावली - साँवली
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व्याकरण
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Chapter 3: व्याकरण विभाग - व्याकरण विभाग [Page 84]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Lokbharati Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 3 व्याकरण विभाग
व्याकरण विभाग | Q (६) | Page 84

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पाठ्‌यपुस्‍तक के पाठों से विलोम और समानार्थी शब्‍द ढूँढ़कर उनकी सूची बनाओ और उनका अलग-अलग वाक्‍यों में प्रयोग करो।


निम्‍नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक हिंदी शब्द का अर्थ लिखो तथा उन शब्द का अलग-अलग पूर्ण वाक्‍यों में प्रयोग कराे :

सुमन


पाठों में आए अलग-अलग काल के वाक्‍य ढूँढ़कर उनका अन्य कालों में परिवर्तन करो।


कविता (सौहार्द-सौमनस्‍य) में प्रयुक्‍त विलोम शब्‍दों की जोड़ियाँ लिखो।


निम्न संधि का विग्रह कर उसका प्रकार लिखिए:

भारतीय कलाकारों का सम्‍मान तथा उन्हें नमन करने का मन करता है।


सहायक क्रिया पहचानिए :

काँच का कार्य पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर देता है।


दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

__________________

__________________


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो :

ताकत के लिए संतुलित आहार आवश्यक है।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो :

जन्म के बाद एक मामी जी ने मुझे गोद ले लिया।


निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्दों पर ध्यान दो :

जलाशय चॉंदी की भाँति चमचमा रहा था।


अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो :

वाह ! क्या बनावट है ताजमहल की !


विरामचिह्न रहित अनुच्छेद में विरामचिह्न लगाओ।

(,, !, ।, ?, -, – , ‘ ’ , ‘‘ ’’)

काबुलीवाले ने पूछा बिटिया अब कौन सी चूड़ियॉं चाहिए मैंने अपनी गुड़िया दिखाकर कहा मेरी गुड़िया के लिए अच्छी सी चूड़ियॉं दे दो जैसे लाल नीली पीली (यह अनुच्छेद काबुलीवाला कहानी से है।)


पढ़ो :

पाई हटाकर जुड़ें हम

ग्वाला पुष्प  
गुच्छा डिब्बा 
चप्पल पत्थर

पढ़ो :

हल लगाकर जुड़ें हम

सिद्धू   द्वार 
लड्डू  खट्टा 
बाह्य वाङ्मय

अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

तुम मेरे मित्र हो, मैं आपको खूब जानता हूँ।


अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

गत रविवार वह मुंबई जाएगा।


अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

तुमने मेरी पुस्तक क्यों नहीं लौटा दी है?


अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

हिंदी शब्दों को, प्रयोग के आधार पर लेखन करना।


शब्‍द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

मनुष्‍य


अलंकार पढ़िए और समझिए:


निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
सेवार्थ ______ + ______  

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
ब्रह्मर्षि
______ + ______  

निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
निर्विघ्न ______ + ______  

पाठ्यपुस्‍तक की पहली इकाई के १ से ६ पाठों से भेदों सहित संज्ञाओं को ढूँढ़कर उनका वाक्‍यों में प्रयोग कीजिए।


वचन बदलिए।

एक = ______


पाठ (चेतना) में आए अव्ययों को ढूँढ़िए और उनके भेद बताकर वाक्‍य में प्रयोग कीजिए।


कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।

उपर्युक्‍त अंश से पंद्रह शब्‍द ढूँढ़िए उनमें प्रत्‍यय लगाकर शब्‍दों को पुनः लिखिए।


रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:

गर्मी के कारण बेचैनी हो रही है।


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