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Question
शब्द पहेली से मुहावरे, कहावतें ढूँढ़िए। उनकी सूची बनाइए और अर्थ बताकर उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए:-
| आँखों से | ईंट का | कमर | डूबते | हाथ | अँधेरा | होगा |
| ओखली में | ऊँट के | तोड़ना | तारा | तले | जवाब | चार |
| छाती | ओझल | को | जीरा | देना | निकालना | पत्थर से |
| चिराग | तिनके का | सहारा | होना | आरसी | मुँह में | देना |
| आँखों का | क्या | मात | कंगन को | सिर | देना | कलेजा |
| लालच | कचूमर | हाथ | आना | फुलाना | मुँह को | चाँद |
| जड़ से | बुरी | मलना | उखाड़ | बला | लगाना | देना |
| मुहावरे | कहावतें |
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Solution
| मुहावरे | कहावतें |
| डूबते को तिनके का सहारा | हाथ कंगन को आरसी क्या |
| लालच बुरी बला | चिराग तले अँधेरा |
| हाथ मलना | ओखली में सिर देना |
| कलेजा मुँह को आना | ऊँट के मुँह में जीरा |
| आँखों से ओझल होना | |
| आँखों का तारा | |
| ईंट का जवाब पत्थर से देना |
मुहावरे -
1) डूबते को तिनके का सहारा - संकट के समय थोड़ी-सी सहायता बहुत होती हैं।
वाक्य: राकेश ने मुझे थोड़े-से रुपए क्या दिए डूबते को तिनके का सहारा मिल गया।
2) लालच बुरी बला - अधिक लालच अच्छी नहीं होती।
वाक्य: राम को एक बार लाटरी खरीदने पर पुरस्कार के रूप में कुछ रुपए मिल गए। लोभ के कारण बार-बार लाटरी का टिकट खरीदने से उसके घर के पैसे भी बरबाद हो गए। ठीक ही कहा है कि लालच बुरी बला होती है।
3) हाथ मलना - पछताना
वाक्य: जो व्यक्ति समय रहते काम नहीं करते, वे समय निकल जाने पर हाथ मलते रह जाते हैं।
4) कलेजा मुँह को आना - किसी की पीड़ा से अति व्याकुल होना।
वाक्य: मीना के सिर दर्द को देखकर उसके पिता का कलेजा मुँह को आ रहा था।
5) आँखों से ओझल होना - गायब होना।
वाक्य: चोर चोरी करके घटना स्थल से मिनटों में आँखों से ओझल हो गया।
6) आँखों का तारा - बहुत प्रिय।
वाक्य: राम और लक्ष्मण दशरथ की आँखों के तारे थे।
7) ईंट का जवाब पत्थर से देना - दुष्ट के साथ दुष्टता करना।
वाक्य: अकबर के आक्रमण करने पर महाराणा प्रताप ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
कहावतें -
1) हाथ कंगन को आरसी क्या - प्रत्यक्ष वस्तु के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
वाक्य: तुम्हारे परीक्षाफल से तुम्हारी योग्यता का पता लग गया, फिर हाथ कंगन को आरसी क्या?
2) चिराग तले अँधेरा - लोगों को अपनी बुराई नहीं दिखती।
वाक्य: वैसे तो नेताजी दहेज प्रथा के विरोधी हैं, किंतु अपने पुत्र की शादी में वे दहेज के लिए लालायित होकर चिराग तले अँधेरा की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं।
3) ओखली में सिर देना - झंझट में पड़ना, जिम्मेदारी लेना।
वाक्य: मोहनलाल ने जब विधवा विवाह का समर्थन किया, तो कुछ पुरातनपंथी उनका विरोध करने लगे। उन्होंने लोगों से कहा कि जब ओखली में सिर दिया है, तो मूसलों से डरना नहीं है।
4) ऊँट के मुँह में जीरा - अधिक खाने वाले को कम परोसना।
वाक्य: गाँव के मजदूरों के पत्तलों पर रखी दो-दो पूरियाँ और तरकारी जब रमेश ने देखी, तो उसने कहा, यह तो ऊँट के मुँह में जीरा देने के बराबर है।
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क्रिया का लिंग और वचन सामान्यतः कर्ता और कर्म के लिंग और वचन के अनुसार निर्धारित होता है। वाक्य में कर्ता और कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार जब क्रिया के लिंग, वचन आदि में परिवर्तन होता है तो उसे अन्विति कहते हैं।
क्रिया के लिंग, वचन में परिवर्तन तभी होता है जब कर्ता या कर्म परसर्ग रहित हों;
जैसे- सवार कारतूस माँग रहा था। (कर्ता के कारण)
सवार ने कारतूस माँगे। (कर्म के कारण)
कर्नल ने वज़ीर अली को नहीं पहचाना। (यहाँ क्रिया, कर्ता और कर्म किसी के भी कारण प्रभावित नहीं है)
अतः कर्ता और कर्म के परसर्ग सहित होने पर क्रिया कर्ता और कर्म से किसी के भी लिंग और वचन से प्रभावित नहीं होती और वह एकवचन पुल्लिंग में ही प्रयुक्त होती है। नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए-
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निम्नलिखित शब्द का वचन बदलकर वाक्य में प्रयोग करके लिखो:
रोटी →
निम्नलिखित वाक्य पढ़ो तथा मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :
राघव ने चुपचाप घर में प्रवेश किया।
निम्नलिखित वाक्य पढ़ो और मोटे और अधोरेखित किये गए शब्द पर ध्यान दो :
अरे! हम कहॉं आ गए ?
अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो :
वाह ! क्या बनावट है ताजमहल की !
निम्न विशेषण शब्द का अपने वाक्य में प्रयोग करके उनका प्रकार लिखो।

पढ़ो :
हल लगाकर जुड़ें हम
| सिद्धू | द्वार |
| लड्डू | खट्टा |
| बाह्य | वाङ्मय |
निम्न शब्द के तीन पर्यायवाची शब्द रिक्त स्थान में लिखिए:-
| शब्द | पर्यायवाची शब्द | |||
| हर्ष | ||||
परिच्छेद पढ़िए और उसमें आए शब्दों के लिंग एवं वचन बदलकर लिखिए।
|
मैं गाँव से शहर पढ़ने आता था। गाँव का मेरा एक मित्र भी था। सावन-भादों की बादलों से ढँकी रात में बीहड़ पानी बरसता है। पूरा सन्नाटा शेर की दहाड़ सरीखा गरज उठता है। छमाक से बिजलियाँ कड़कती हैं। माँ बच्चे को अपने छाती से चिपकाती है। हाँड़ी में उबलते दाल-भात के साथ उसकी उम्मीद भी पकती है। उसका श्रम पकता है। अंत में कभी-कभी माँ हाँड़ी में चिपके मुट्ठी भर बचे चावल खाती है। न जाने कहाँ से अपनी आँखों में इतनी तेज चमक पैदा कर लेती है कि भरे पेटवाले की आँखें चौंधियाँ जाती हैं। उसके त्याग और संतान की तृप्ति के पानी से उसकी साध लहलहाती है। बैलगाड़ी में बैठी संतान को छतरी की छाँव करती है। बस में बच्चा खिड़की के पास बैठा बाहर दृश्यों को देखता है और वह पूरी यात्रा बच्चे को देखती रहती है। सँभालती रहती है। रेल जब बोगदे के भीतर से गुजरती है, तो अनायास उसका हाथ बच्चे की बाँह पर चला जाता है और पिता का सामान पर। |
रिक्त स्थान की पूर्ति अव्यय शब्द से कीजिए और नया वाक्य बनाइए:
______ ! मैं सच कहता हूँ बाबू जी ।
