मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता ९ वी

शब्‍द पहेली से मुहावरे, कहावतें ढूँढ़िए। उनकी सूची बनाइए और अर्थ बताकर उनका अपने वाक्‍यों में प्रयोग कीजिए:- आँखों से ओखली में छाती चिराग आँखों का लालच जड़ से ईंट का ऊँट के ओझल

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प्रश्न

शब्‍द पहेली से मुहावरे, कहावतें ढूँढ़िए। उनकी सूची बनाइए और अर्थ बताकर उनका अपने वाक्‍यों में प्रयोग कीजिए:-

आँखों से ईंट का कमर डूबते हाथ अँधेरा होगा
ओखली में ऊँट के तोड़ना तारा तले जवाब चार
छाती ओझल को जीरा देना निकालना पत्‍थर से
चिराग तिनके का सहारा होना आरसी मुँह में देना
आँखों का क्‍या मात कंगन को सिर देना कलेजा
लालच कचूमर हाथ आना फुलाना मुँह को चाँद
जड़ से बुरी मलना उखाड़ बला लगाना देना

 

मुहावरे कहावतें
   
तक्ता
दीर्घउत्तर
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उत्तर

मुहावरे कहावतें
डूबते को तिनके का सहारा हाथ कंगन को आरसी क्या
लालच बुरी बला चिराग तले अँधेरा
हाथ मलना ओखली में सिर देना
कलेजा मुँह को आना ऊँट के मुँह में जीरा
आँखों से ओझल होना  
आँखों का तारा  
ईंट का जवाब पत्थर से देना  

मुहावरे -

1) डूबते को तिनके का सहारा - संकट के समय थोड़ी-सी सहायता बहुत होती हैं।

वाक्‍य: राकेश ने मुझे थोड़े-से रुपए क्या दिए डूबते को तिनके का सहारा मिल गया।

2) लालच बुरी बला - अधिक लालच अच्छी नहीं होती।

वाक्य: राम को एक बार लाटरी खरीदने पर पुरस्कार के रूप में कुछ रुपए मिल गए। लोभ के कारण बार-बार लाटरी का टिकट खरीदने से उसके घर के पैसे भी बरबाद हो गए। ठीक ही कहा है कि लालच बुरी बला होती है।

3) हाथ मलना - पछताना

वाक्य: जो व्यक्ति समय रहते काम नहीं करते, वे समय निकल जाने पर हाथ मलते रह जाते हैं।

4) कलेजा मुँह को आना - किसी की पीड़ा से अति व्याकुल होना।

वाक्य: मीना के सिर दर्द को देखकर उसके पिता का कलेजा मुँह को आ रहा था।

5) आँखों से ओझल होना - गायब होना।

वाक्य: चोर चोरी करके घटना स्थल से मिनटों में आँखों से ओझल हो गया।

6) आँखों का तारा - बहुत प्रिय।

वाक्य: राम और लक्ष्मण दशरथ की आँखों के तारे थे।

7) ईंट का जवाब पत्थर से देना - दुष्ट के साथ दुष्टता करना।

वाक्य: अकबर के आक्रमण करने पर महाराणा प्रताप ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया।

कहावतें -

1) हाथ कंगन को आरसी क्या - प्रत्यक्ष वस्तु के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं।

वाक्य: तुम्हारे परीक्षाफल से तुम्हारी योग्यता का पता लग गया, फिर हाथ कंगन को आरसी क्या?

2) चिराग तले अँधेरा - लोगों को अपनी बुराई नहीं दिखती।

वाक्य: वैसे तो नेताजी दहेज प्रथा के विरोधी हैं, किंतु अपने पुत्र की शादी में वे दहेज के लिए लालायित होकर चिराग तले अँधेरा की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं।

3) ओखली में सिर देना - झंझट में पड़ना, जिम्मेदारी लेना।

वाक्य: मोहनलाल ने जब विधवा विवाह का समर्थन किया, तो कुछ पुरातनपंथी उनका विरोध करने लगे। उन्होंने लोगों से कहा कि जब ओखली में सिर दिया है, तो मूसलों से डरना नहीं है।

4) ऊँट के मुँह में जीरा - अधिक खाने वाले को कम परोसना।

वाक्य: गाँव के मजदूरों के पत्तलों पर रखी दो-दो पूरियाँ और तरकारी जब रमेश ने देखी, तो उसने कहा, यह तो ऊँट के मुँह में जीरा देने के बराबर है।

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व्याकरण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.1: पृथ्‍वी-आकाश - स्वाध्याय [पृष्ठ ४५]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Kumarbharati Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 1.1 पृथ्‍वी-आकाश
स्वाध्याय | Q (१) | पृष्ठ ४५

संबंधित प्रश्‍न

सौहार्द-सौमनस्य इस पाठ में आए अव्ययों को पहचानो और उनके भेद बताकर उनका अलग-अलग वाक्यों में प्रयोग करो।


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

अमरु स्‍वभाव से अल्‍पभाषी है।


रेखांकित वाक्‍यांश के स्‍थान पर उचित मुहावरा लिखिए:

रुग्‍ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन का धीरज धीर-धीरे समाप्त हो रहा था।


अर्थ की दृष्‍टि से वाक्‍य परिवर्तित करके लिखिए :

सब तुमसे मिलने को उत्सुक हैं।


दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

 

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पाठ्‌यपुस्तक में आए संयुक्ताक्षरयुक्त तीन-तीन शब्द ढूँढ़ाे। उनके संयुक्ताक्षर बनने के प्रकारानुसार वर्गीकरण करो। उन शब्दों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो।

 


शब्‍द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

श्रृंखलाएँ


कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।

उपर्युक्‍त अंश से पंद्रह शब्‍द ढूँढ़िए उनमें प्रत्‍यय लगाकर शब्‍दों को पुनः लिखिए।


रिक्त स्थान की पूर्ति अव्यय शब्‍द से कीजिए और नया वाक्‍य बनाइए:

जहाँ एक लड़का ______ देख रहा था।


चुनाव में अपनी करारी हार देखकर नेताजी के पाँव तले ______ खिसक गई।


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