English
Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 6th Standard

सच्चाई में ही सफलता निहित है।

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Question

सच्चाई में ही सफलता निहित है।

Short/Brief Note
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Solution

माता जी और पिता जी कहते हैं कि झूठ बोलना पाप है। यदि हम झूठ बोलकर अपना कोई काम बना लेते हैं, तो यह गलत बात है। इसके अलावा हमारी सच्चाई का पता चलने पर हमारा बना बनाया काम बिगड़ सकता है। हमारे दोस्तों का यकीन हम खो देंगे और हम अंतत: असफल हो जाएँगे। इसके विपरीत यदि हम सच्चाई के साथ अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहेंगे, तो हम अवश्य एक दिन सफल होंगे। हमें हर परिस्थिति में सच्चाई का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 1.03: उपहार - उपहार [Page 10]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
Chapter 1.03 उपहार
उपहार | Q (८) | Page 10

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तुम्हें रुपयों से भरा बटुआ मिल जाए तो .....


हजारी प्रसाद द्विवेदी की ‘कबीर ग्रंथावली’ से पाँच दोहे ढूँढकर सुंदर अक्षरों में लिखो।


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


अपने नाना जी/दादा जी को अपने मन की बात लिखकर भेजो।


।। जीवदया ही भूतदया है ।।


।। स्वतंत्रता मेरा जन्म सिद्‌ध अधिकार है।।


आपने समाचारपत्रों, टी.वी. आदि पर अनेक प्रकार के विज्ञापन देखे होंगे जिनमें ग्राहकों को हर तरीके से लुभाने का प्रयास किया जाता है, नीचे लिखे बिंदुओं के संदर्भ में किसी एक विज्ञापन की समीक्षा कीजिए और यह लिखिए कि आपको विज्ञापन की किस बात से सामान खरीदने के लिए प्रेरित किया।

  1. विज्ञापन में सम्मिलित चित्र और विषय-वस्तु
  2. विज्ञापन में आए पात्र व उनका औचित्य
  3. विज्ञापन की भाषा

निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।

खेतों में भुट्टे की फसल देख, हर कोई कहता- कितनी बढ़िया है। दो-चार दिन में कटाई की तैयारी थी लेकिन .......


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

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